Bhopal के सरकारी गांधी मेडिकल कॉलेज से जुड़ा हुआ अस्पताल है हमीदिया अस्पताल (Hamidiya Hospital). यहां की 52 नर्सों ने अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर दीपक मरावी पर सेक्शुअल हरासमेंट का आरोप लगाया है. पीड़ित नर्सों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा, चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग और डीजीपी सुधीर सक्सेना को इस संबंध में एक पत्र भी लिखा है.
'चेंबर में बुलाकर छूता है, अचानक चेंजिंग रूम में घुस जाता है', 52 नर्सों ने बताई डॉक्टर की करतूत!
भोपाल के हमीदिया अस्पताल के प्रमुख डॉ. दीपक मरावी पर 52 नर्सों ने यौन शोषण का आरोप लगाया है, सभी ने सीएम शिवराज सिंह से न्याय मांगा है


आजतक से जुड़े हेमेंद्र शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक़, नर्सों ने आरोप लगाया है कि डॉ. मरावी उन्हें अपने चेंबर में बुलाकर गंदे तरीके से छूते हैं और भद्दी बातें करते हैं. कभी छुट्टी मंज़ूर करने के बहाने से, तो कभी जॉइनिंग के दौरान. पीड़ित नर्सों ने लिखा कि डॉ मरावी रात के वक़्त शराब के नशे में अनुचित कपड़े पहनकर नर्सों के चेंजिंग रूम में घुस जाते हैं और फूहड़ बातें करते हैं. विरोध करने पर नौकरी से निकालने की धमकी देते थे.
लेटर में लिखा गया,
"डॉ. मरावी ने 30 मई को अपने चेंबर में एक नर्स का बलात्कार करने की कोशिश की. हमारी इस सहकर्मी की हाल ही में शादी हुई है. हम उसका नाम नहीं ले रहे हैं, लेकिन अगर उचित जांच की जाती है तो हम अपना लिखित बयान देंगे."
आरोप ये भी लगाया गया कि आरोपी डॉक्टर निरीक्षण के दौरान कुछ नर्सों को चिन्हित कर बिना वजह अपने चेंबर में बुला लेते हैं और अभद्र बातें करते हैं.
अमर उजाला में छपी रिपोर्ट के अनुसार, एक पीड़िता के विरोध करने पर आरोपी डॉक्टर ने कहा,
कमलनाथ ने पूछा- 'यही है सुशासन?'"मुझे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधीक्षक बनाया है. नौकरी खा जाऊंगा और कहीं का नहीं छोडूंगा."
मामला सामने आया तो लोगों ने राज्य में महिला सुरक्षा पर सवाल उठाए. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी सरकार को घेरा. उन्होंने लिखा,
"आज भोपाल के प्रतिष्ठित हमीदिया अस्पताल की 50 महिला नर्सों के साथ अश्लील व्यवहार किये जाने की घटना सामने आई है. कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा से जुड़ा यह अत्यंत गंभीर मामला है. प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के साथ कैसा खिलवाड़ चल रहा है? अपराधी क्यों इतने बेखौफ हैं? सरकार कर क्या रही है? यही सुशासन है? यही कानून व्यवस्था है?"
उधर, इस मामले को सरकार ने अपने संज्ञान मे लिया है. चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने भोपाल के संभागीय आयुक्त गुलशन बामरा को मामले की जांच कराने के लिए कहा है. मंत्री ने कहा,
''मैंने संभागीय आयुक्त से कहा है कि यह जांच अस्पताल के बाहर के किसी प्रशासनिक अधिकारी से कराएं और जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी.''
विश्वास सारंग ने इस दौरान ये भी बताया कि जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के लिए 10 दिन का समय दिया गया है.











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