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बेटी ने मर्जी से शादी की तो पिता ने उसके लापता होने की शिकायत दर्ज करा दी

दिल्ली हाईकोर्ट ने लड़की को बाल गृह से रिहा करने का आदेश दिया है.

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दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि लड़की बालिग है और उसने मर्जी से शादी की है. पिता ने नाबालिग होने का दावा कर अपहरण का केस दर्ज कराया था.

दिल्ली में एक लड़की ने शादी कर ली. परिवार की मर्जी के खिलाफ. ऐसे में लड़की के पिता ने पुलिस स्टेशन जाकर लड़की के नाबालिग होने और लापता होने की शिकायत दर्ज करवा दी. पुलिस ने भी शिकायत दर्ज कर जांच शुरू की. लड़की को तलाशने लगे.और जब वो मिली, तो उसे बाल गृह भेज दिया गया. वहीं, लड़की का पति कोर्ट पहुंच गया. याचिका दायर कर पत्नी की रिहाई की मांग करने लगा. अब इसी मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है.

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दिल्ली हाईकोर्ट ने लड़की को बाल गृह से रिहा करने का आदेश दिया. और कहा कि लड़की बालिग है और उसने अपनी मर्जी से शादी की है. उसके वहां रहने का कोई वाजिब कारण समझ नहीं आता. इसलिए उसे वहां से छोड़ दिया जाए. वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के जरिए हुई सुनवाई के पहले महिला को जज के सामने पेश किया गया था. वहां उसने बताया कि वो बालिग है. उसकी डेट ऑफ बर्थ 17 जून, 2020 है. उसने अपनी मर्जी से शादी की है. जस्टिस अनूर जयराम भंभानी और मनोज कुमार ओहरी की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर महिला की इच्छा है तो उसे अपने पति के साथ भेजा जाए. उसे जबरन न रखा जाए.

न्यूज़18 की खबर के मुताबिक, लड़की के पिता ने शिकायत में दावा किया था उनकी बेटी फरवरी 2004 की जन्मी है. इस हिसाब से वो नाबालिग है. कोर्ट में वकील कामना वोहरा ने ये पूरी बता बताई. कहा कि लड़की की शादी के बाद उसके ही पिता ने उसके लापता होने की शिकायत दर्ज करवाई थी और कहा था कि उनकी बेटी नाबालिग है. पिता के बयान के तहत वजीराबाद पुलिस स्टेशन में अपहरण का केस दर्ज किया गया था. पुलिस ने भी छानबीन करके 25 दिसंबर को लड़की का पता लगा लिया था और फिर उसे बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया था. यहां से उसे बाल गृह भेज दिया गया था.

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उधर, दूसरी तरफ उसके पति ने भी कोर्ट में बंदी प्रत्यीक्षकरण की याचिका दायर कर दी थी. और 18 वर्षीय पत्नी को बाल गृह से रिहा करने की मांग की थी. कोर्ट में लड़की का बर्थ सर्टिफिकेट और मैरिज सर्टिफिकेट पेश किया गया. जांच अधिकारी के द्वारा सभी डॉक्यमेंट्स वैरिफाई हुआ. आर्य समाज में शादी करने की फोटो भी दिखाई गई. फिर कोर्ट ने कहा कि जिस समय लड़की की शादी हुई, वो बालिग थी. कोर्ट ने कहा है कि लड़की नाबालिग नहीं है, तो कोई कारण नहीं बनता कि उसे बाल गृह में रखा जाए. उसे रिहा कर दिया जाए.

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