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बच्चों के अश्लील वीडियो डाउनलोड करके बांटने वाले आदमी के खिलाफ मामला दर्ज

पॉर्न देखना भले कानूनी हो भारत में, चाइल्ड पॉर्नोग्राफी अपराध है.

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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश के सभी साइबर क्राइम थानों को चाइल्ड पोर्नोग्राफी का कोई भी मामला सामने आने पर इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है. (सांकेतिक तस्वीरें: Pixabay)
अल्मोड़ा, उत्तराखंड. यहां की पुलिस ने चाइल्ड पोर्नोग्राफी के अपराध में पहला मामला दर्ज किया है. जिस व्यक्ति पर मामला दर्ज हुआ है, वो अल्मोड़ा का ही रहने वाला है, और उसका नाम किशन सिंह बताया जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक़ वो इंटरनेट से चाइल्ड पॉर्नोग्राफी डाउनलोड करता था, और अपने दोस्तों में बांटता था. मामला उत्तराखंड स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ है.
क्या है चाइल्ड पॉर्नोग्राफी?
ऐसी अश्लील तस्वीरें, वीडियो जिनमें बच्चों को सेक्सुअल एक्टिविटी करते हुए या उनके साथ ऐसा कुछ होता हुआ दिखाया गया हो. चाइल्ड हर उस व्यक्ति को कहा जाएगा जिसकी उम्र 18 साल से कम है.
Children 330581 1920 बच्चों के यौन शोषण के खिलाफ आईपीसी में भी प्रावधान हैं. सेक्शन 292 में अश्लील तस्वीरें या चीज़ें नाबालिगों को दिखाने या उन तक पहुंचाने का काम अपराध है और इसमें तीन साल तक की सज़ा हो सकती है. लेकिन पोर्नोग्राफी अब अधिकतर डिजिटल हो गई है. इसलिए साइबर क्राइम सेल इस पर निगरानी रखता है. (सांकेतिक तस्वीर: ट्विटर)

क्या पॉर्नोग्राफी भारत में गैर-कानूनी है?
एडल्ट पॉर्नोग्राफी यानी वयस्कों का पॉर्न देखना भारत में गैरकानूनी नहीं है. जब तक ये वीडियो/तस्वीरें सहमति से ली गई हों (चाहे वेबसाइट पर ही क्यों न हों), और अपनी निजी इस्तेमाल के लिए देखी जा रही हों, तब तक सब ठीक है. उसके लिए सज़ा नहीं होगी. चाइल्ड पॉर्नोग्राफी पूरी तरह गैर-कानूनी है. 18 साल से कम उम्र के बच्चे किसी भी चीज के लिए अपना कंसेंट नहीं दे सकते. इसलिए उनसे जुड़ी कोई भी पॉर्नोग्राफी गैरकानूनी ही होगी.
सजा क्या है?
एडल्ट पॉर्न देखने के लिए सजा नहीं है. लेकिन ऐसा वीडियो बनाना, लोगों को बांटना, दिखाना, या छापना गैर-कानूनी है. यानी अगर किसी वेबसाइट पर पहले से पॉर्न है, तो आप उसे अपनी प्राइवेट स्पेस में देख सकते हैं. लेकिन पॉर्न वीडियो बनाकर उसे डाल नहीं सकते कहीं.
आईटी एक्ट, 2000 का सेक्शन 67 इससे जुड़ी सजा और जुर्माने की डीटेल देता है. इसमें नाबालिगों की पॉर्नोग्राफी से जुड़े किसी भी काम से जुड़े होने पर पहली बार पांच साल तक की सजा और दस लाख तक का जुर्माना हो सकता है. वहीं दूसरी बार ऐसे ही अपराध में पकड़े जाने पर सात साल तक की सजा और दस लाख का जुर्माना हो सकता है.
चाइल्ड पॉर्नोग्राफी के लिए केंद्र सरकार ने एक एजेंसी को जिम्मा दे रखा है कि वो इंटरनेट पर ऐसी किसी भी एक्टिविटी को ट्रैक करे जो चाइल्ड पॉर्नोग्राफी से जुड़ी हो. यह एजेंसी अपनी रिपोर्ट सीधे गृह मंत्रालय को भेजती है, जहां से संबंधित राज्य को कार्रवाई के निर्देश दिए जाते हैं. इसका नाम नेशनल क्राइम फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लोइटिड चिल्ड्रेन (NCMC) है.
Girl 2330491 1920 18 साल के कम उम्र का कोई भी व्यक्ति नाबालिग ही माना जाएगा. उन्हें पोर्नोग्राफी में इन्वोल्व करना या उन्हें इससे जुड़ी चीज़ें देखने के लिए मजबूर करना, या फिर नाबालिगों की पोर्नोग्राफी वयस्कों को बांटना भी अपराध है. (सांकेतिक तस्वीर: पिक्साबे)

POCSO क्या कहता है?
THE PROTECTION OF CHILDREN FROM SEXUAL OFFENCES (AMENDMENT) ACT, 2019  के 14वें और 15वें अनुच्छेद चाइल्ड पॉर्नोग्राफी पर रोकथाम के लिए बने कानून हैं.
इसके अनुसार जो भी व्यक्ति नाबालिगों का इस्तेमाल पॉर्नोग्राफी से जुड़े कामों के लिए करेगा, उसे पहली बार पकड़े जाने पर कम से कम पांच साल की सज़ा होगी. दूसरी बार पकड़े जाने पर कम से कम सात साल की.
जो भी व्यक्ति चाइल्ड पॉर्नोग्राफी से जुड़ा कोई भी सामान रखेगा (तस्वीरें/वीडियो), लेकिन उसे बर्बाद नहीं करेगा या अथॉरिटी को रिपोर्ट नहीं करेगा तो पहली बार उस पर पांच हजार का जुर्माना लगेगा. दूसरी बार पकड़े जाने पर दस हजार का. वहीं अगर कोई इस पॉर्नोग्राफिक मटीरियल को बांटता, फैलाता, दिखाता है, उसे तीन साल तक की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं. वहीं अगर कोई व्यक्ति चाइल्ड पॉर्नोग्राफी को कमर्शियल पर्पस (बेचने/खरीदने) के लिए रखता है, तो उसे कम से कम तीन साल की सज़ा (जो पांच साल तक की जा सकती है) या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं. अगर वो इंसान दूसरी बार ये करते हुए पाया जाता है तो उसे कम से कम पांच साल की सज़ा होगी और साथ ही जुर्माना भी होगा. इस मामले में सज़ा सात साल तक बढ़ाई जा सकती है.


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