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दोषियों की रिहाई पर बिलकिस बानो बोलीं, 'मुझे मेरी ज़िंदगी वापस करो'

बिलकिस बानो ने सवाल किया- किसी औरत की इंसाफ की लड़ाई ऐसे कैसे खत्म हो सकती है?

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ख़बर ये भी आई कि जेल से छूटने के बाद कुछ दोषी VHP के दफ़्तर गए (फोटो - सोशल मीडिया)

बिलकिस बानो गैंगरेप केस (Bilkis Bano Gangrape Case) के 11 दोषियों को गुजरात सरकार ने रिहा कर दिया है. सरकार ने रिमिशन पॉलिसी (माफी नीति) का हवाला देते हुए सभी दोषियों को 15 अगस्त को गोधरा सब जेल से रिहा किया. 2002 में गुजरात में हुए दंगों के दौरान बिलकिस बानो का गैंगरेप हुआ था. उनकी आंखों के सामने उनकी बेटी समेत परिवार के 14 लोगों की हत्या की गई थी. 17 अगस्त को बिलकिस बानो ने सरकार से अपना फैसला वापस लेने की अपील की है.

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बिलकिस बानो की तरफ से एक बयान जारी किया गया है. इसमें उन्होंने लिखा,

"दो दिन पहले, 15 अगस्त के दिन जब मैंने सुना कि मेरे परिवार और मेरे जीवन को बर्बाद करने वाले, मुझसे मेरी तीन साल की बेटी को छीनने वाले 11 लोग जेल से रिहा हो गए तब मैं 20 साल पहले हुई घटना के सदमे से मैं एक बार फिर गुजरी हूं. मैं अब भी सदमे में हूं. मेरे पास शब्द नहीं हैं.

आज में केवल पूछ सकती हूं कि किसी औरत के इंसाफ की लड़ाई ऐसे कैसे खत्म हो सकती है? मैंने अपने देश की सबसे ऊंची अदालतों पर भरोसा किया. मैंने सिस्टम पर भरोसा किया और मैं धीरे-धीरे अपने ट्रॉमा के साथ जीना सीख रही थी. इन दोषियों की रिहाई ने मुझसे मेरी शांति छीन ली है और न्याय पर मेरे भरोसे को हिला दिया है. मेरा दुख और मेरा डगमगाता विश्वास केवल मेरे लिए नहीं है, पर हर उस महिला के लिए है जो इंसाफ के लिए अदालतों के चक्कर लगा रही है.

इतना बड़ा और अन्यायपूर्ण फैसला लेने से पहले किसी ने मेरी सुरक्षा की सुध नहीं ली.

मेरी गुजरात सरकार से गुज़ारिश है कि इस फैसले को पलट दें. मुझे डर के बिना और शांति के साथ जीने का अधिकार वापस दें. ये सुनिश्चित करें कि मेरा परिवार और मैं सुरक्षित रहें."

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इससे पहले बिलकिस बानो के पति याकूब रसूल पटेल ने कहा था कि उनका परिवार एक सामान्य जीवन जीने की कोशिश कर रहा था, लेकिन दोषियों की रिहाई के बाद उनका डर बढ़ गया है. 

बिलकिस बानो केस में कब क्या हुआ?

- उस साल 27 फरवरी को गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस में लगाई गई आग के बाद पूरे गुजरात में दंगे हुए थे.इसी दंगे के दौरान 3 मार्च, 2002 को बिलकिस बानो गैंगरेप का शिकार हुईं. 
- घटना के बाद बिलकिस पुलिस के पास गईं, लेकिन पुलिस ने बयान में असंगति होने की बात कही और मजिस्ट्रेट ने केस बंद कर दिया.
- 25 मार्च, 2003 को बिलकिस ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission) में अपील दायर की. सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली. दिसंबर, 2003 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए.
- 2004 में बिलकिस एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं. कहा कि उन्हें गुजरात की अदालतों में न्याय मिलने की कोई उम्मीद नहीं है. गुजरात पुलिस के अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे हैं. अगस्त, 2004 में मामले को मुंबई की अदालत में शिफ्ट कर दिया. 
- 2008 में निचली अदालत ने फैसला सुनाया. 18 आरोपियों में से 11 को हत्या और बलात्कार के जुर्म में दोषी पाया गया और उम्रकैद की सजा सुनाई गई. छह आरोपी पुलिस वालों में से एक को सबूतों के साथ छेड़छाड़ का दोषी माना गया. 
- CBI फैसले से संतुष्ट नहीं थी. वो हाईकोर्ट पहुंची. 4 मई, 2017 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया. 11 दोषियों की उम्रकैद को बरकरार रखा.
- 23 अप्रैल, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को आदेश दिया कि बिलकिस बानो को मुआवजे के तौर पर 50 लाख रुपये दिए जाएं. साथ ही कोर्ट ने गुजरात सरकार को ये भी आदेश दिया कि बिल्किस बानो को सरकारी नौकरी और नियमों के मुताबिक घर मुहैया कराया जाए.
- 15 अगस्त, 2022 को गुजरात सरकार की माफी नीति के तहत बिलकिस बानो केस के 11 दोषियों को जेल से रिहा कर दिया गया.

गोधरा दंगों में बिलकिस बानो का गैंगरेप करने वाले 11 दोषी बाहर कैसे आए?

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