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13 किलो वज़न घटाने के बाद 'बालिका वधू' की आनंदी ने बड़े काम की बात बताई है

बढ़ते वज़न से परेशान हैं, तो एक सांस में पढ़ लीजिए.

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अविका गौर ने ये भी बताया कि किस तरह उन्होंने मुश्किलों का सामना किया, गलतियाँ भी कीं, लेकिन पीछे नहीं हटीं. (तस्वीर: instagram)
अविका गौड़. एक्ट्रेस हैं. ज्यादातर लोग उन्हें 'बालिका वधू' की आनंदी के नाम से जानते हैं. बाद में उन्होंने 'ससुराल सिमर का' में भी काम किया. अब उन्होंने अपनी वेट लॉस जर्नी शेयर की है. अविका ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में बताया कि वो कैसे अपनी सेहत को नज़रअंदाज़ करती रहीं और बहुत ज्यादा वेट गेन कर लिया.
पोस्ट में उन्होंने ये भी बताया कि वेट बढ़ने के बाद उनके अंदर काफी ज्यादा नेगेटिविटी आ गई थी.  वो हर वक्त कॉन्शियस रहती थीं कि वो कैसी दिख रही हैं. इसके चलते वो डांस करना भी एन्जॉय नहीं कर पा रही थीं.
अविका ने लिखा,
अगर ये किसी बीमारी की वजह से होता (थायरॉयड, PCOD) तो फिर भी ठीक होता क्योंकि ये चीज़ मेरे कंट्रोल से बाहर होती. लेकिन ये इसलिए हुआ था क्योंकि मैं कुछ भी खा लेती थी और बिल्कुल भी वर्कआउट नहीं करती थी. हमारा शरीर अच्छे से ट्रीट किया जाना डिजर्व करता है, लेकिन मैंने इसकी इज्जत नहीं की.
अविका हर वक्त खुद को जज कर रही होती थीं. अपने लिए बुरा महसूस कर रही होती थीं. अपने करीबियों पर फट पड़ती थीं. वो आगे लिखती हैं,
एक दिन मैंने डिसाइड किया कि बस बहुत हुआ, अब मुझे बेहतर होना है. कुछ भी रातोंरात नहीं बदला. मैंने बस सही चीजों पर फोकस करना शुरू किया. उन चीजों पर जिनपर मुझे गर्व करना चाहिए (जैसे डांसिंग). मैंने बेहतर खाने और वर्क आउट करने की कोशिश जारी रखी. इसमें मुझे कई दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा. लेकिन जरूरी ये था कि मैं रुकी नहीं. और मेरे करीबी लोग मुझे गाइड करने के लिए लगातार मौजूद थे.
 
पोस्ट के आखिर में अविका ने लिका कि अब वो पहले से फिट हैं. सुंदर महसूस कर रही हैं. उन्होंने लिखा कि बहुत सी चीज़ें हमारे कंट्रोल में नहीं होतीं, लेकिन कई चीज़ों पर हम कंट्रोल कर सकते हैं. और वो हमें ज़रूर करना चाहिए.  इसके बाद एक और पोस्ट में अविका ने लिखा,
मैंने सोचा कि अच्छी तो मैं वैसे ही नहीं लगती, कुछ और फ्रेंच फ्राईज खा लूंगी तो क्या होगा. बदले में मुझे मिले किलोग्राम. मैंने हमेशा गिलास खाली ही देखा. लेकिन इसे बदलना ही था. क्योंकि ये सभी चॉइसेज मुझे भीतर से खोखला कर रही थीं. ये बहुत मुश्किल था. लगातार याद दिलाने, खुद को जबरन असलियत देखने पर मजबूर करने और स्ट्रांग सपोर्ट सिस्टम के मौजूद होने की वजह से मैं गलत चॉइसेज से बाहर निकल पाई.  

 


आज भी गलत चॉइसेज होती हैं मेरी , लेकिन कम. और जब  मुझसे ऐसा होता है तो मैं बेहतर करने की कोशिश करती हूं.

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