साल 1933 में हिटलर जर्मनी का चांसलर बन गया. दो साल बाद उसने एक फ़िल्म बनवाई. Triumph of the Will. यानी ‘संकल्प की जीत’. बाद में ये जर्मन लोगों के संकल्प का ‘वशीकरण-मंत्र’ साबित हुई. इसने हिटलर के दूसरे स्याह पक्ष पर से लोगों का ध्यान हमेशा के लिए हटा दिया. इस फ़िल्म को प्रोपेगैंडा का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है. इसमें हिटलर ने उन सभी सिद्धांतों को धरातल पर उतारा, जिसे उसने ‘मीन काम्फ़’ में कलमबद्ध किया था.‘ट्रायम्फ़ ऑफ़ द विल’ की पूरी कहानी क्या है? 86 बरस बाद भी इस फ़िल्म का प्रभाव खत्म क्यों नहीं हुआ है? दुनियाभर में प्रोपेगैंडा के इस्तेमाल का पैटर्न क्या रहा है? और, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI किस तरह से भारत के ख़िलाफ़ प्रोपेगैंडा कैंपेन चलाती है?
दुनियादारी: पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी किस तरह से भारत के ख़िलाफ़ प्रोपेगैंडा कैंपेन चलाती है?
हिटलर ने जर्मनी पर राज करने के लिए क्या तिकड़म भिड़ाए थे?
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