ऐसे देश की कहानी, जिसने सप्ताह भर के भीतर तीन राष्ट्रपतियों का मुंह देख लिया
जहां के आधे सांसद पर रिश्वतखोरी और आधे पर मनी लाउंड्रिंग के आरोप हैं.
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पहले वाले को जनता तो पसंद करती थी, मगर विपक्ष पसंद नहीं करता था. सो संसद ने महाभियोग लगाकर उन्हें हटा दिया. दूसरे वाले राष्ट्रपति ने अपनी ही जनता पर लाठियां चलवाईं. इससे इतनी नाराज़गी पैदा हुई कि राष्ट्रपति की अपनी ही कैबिनेट बाग़ी हो गई. दबाव में आकर नए राष्ट्रपति को इस्तीफ़ा देना पड़ा. संसद ने फिर से एक नया राष्ट्रपति चुना. फिलहाल इस नए राष्ट्रपति का क्रेडेंशियल ये है कि उन्होंने सबसे पहले वाले राष्ट्रपति को हटाने के खिलाफ वोट किया था. संसद को लगता है कि शायद इस वजह से जनता नए प्रेज़िडेंट पर भरोसा करेगी.
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