झम्मन को भूकन की पत्नी के गुप्तांग में डंडा घुसाकर क्या हासिल हुआ? क्या उसे जमीन मिल गई? क्या उसे पैसे मिल गए? उसे मिली है तो बस संतुष्टि, कि चलो, भूकन का कुछ तो बिगाड़ दिया. और करोड़ों बार की तरह इस बार भी औरत का शरीर मात्र किसी की 'मर्दानगी' साबित करने के काम आया.औरतों के साथ इस तरह की हिंसा होना शायद गांवों में आम बात न हो. पर ऐसा भी नहीं कि सुनने में न आती हो. औरत के गुप्तांग में कुछ घुसा देना मानों किसी भी हिंसक मर्द के लिए पूर्णविराम जैसी चीज होती है. मर्द, मर्द से लड़ते हैं. लेकिन जब अपनी मर्दानगी का प्रमाण देना होता है तो औरत को चुनते हैं. या यूं कहिए, उसके गुप्तांग को. जब मर्द, मर्द को पीटता है, तो सर फोड़ता है, हाथ पांव तोड़ता है. मगर बात गुप्तांगों तक नहीं आती. क्योंकि मर्द, मर्द को लिंग की तरह नहीं देखते. जबकि औरत को एक वेजाइना की तरह देखते हैं. फिर चाहे गाली-गलौज हो या शारीरिक हिंसा, ख़त्म औरत की वेजाइना पर होती है.
भाभी को सड़क पर गिरा पीटा, वेजाइना में डंडा डाला
क्या कोई विवाद इतना भी बड़ा हो सकता है कि लोग इस हद तक गिर जाएं?
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फोटो - thelallantop
झम्मन और भूकन नाम के दो भाइयों में कई दिनों से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था. जो इतना आगे बढ़ गया कि बात मार-पीट तक आ गई. लेकिन जो मार-पीट में हुआ वो एक समाज के तौर पर हमारे सर शर्म से झुका देने वाला है. बरेली के आलमपुर की बात है. झम्मन और भूकन को मिला कर कुल पांच भाई थे. भूकन ने अपने हिस्से की जमीन अपने तीसरे भाई को बेच दी. झम्मन ये बात बर्दाश्त नहीं कर सका. भूकन से जमीन वापस लेने को कहता रहा. लेकिन भूकन नहीं माना. झम्मन ने दिल्ली में काम कर रहे अपने दो बेटों को बुलाया. और दोबारा बंटवारा करने भूकन के घर पहुंच गया. इस दौरान दोनों के बीच बहस हुई. जो मार-पीट में बदली. झम्मन की तरफ से लाठियां चलने लगीं. लाठीबाजी में भूकन भाग गया. लेकिन हमलावरों ने उसकी पत्नी शारदा को पकड़ लिया. उसे सड़क पर गिरा लाठियों से पीटा. और फिर उसकी वेजाइना में डंडा दाल दिया. शारदा को गंभीर हालत में पास के हेल्थ सेंटर में ले जाया गया. जहां उसे बरेली रेफर कर दिया गया. अब उसका इलाज चल रहा है.
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