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'तीन घंटे तक लगातार तड़पने के बाद' अचानक सैकड़ों लोगों की मां के मरने के पीछे क्या खेल है?

ऐसे मुश्किल समय में भी प्रोपागैंडा चलाने से बाज़ नहीं आ रहे लोग.

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मृत महिला की तस्वीर, जिसे सोशल मीडिया पर कई हैंडल्स से अपनी मां कहकर शेयर किया जा रहा है. दूसरी तरफ वो ट्वीट्स जिसमें ये बताया गया कि उनकी मां की तड़पने के बाद डेथ हो गई.
सोशल मीडिया खोलते ही इन दिनों Covid-19 से जुड़ी खबरों से सामना होता है. इस बीमारी से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए पोस्ट, अस्पतालों के हालात से जुड़े पोस्ट्स या फिर कोविड की वजह से जान गंवाने वालों से जुड़ी पोस्ट्स. मौत से जुड़ी हर पोस्ट आपको परेशान करती है, लाचार महसूस कराती है कि काश आप कुछ कर पाते. पर सोशल मीडिया पर कुछ लोग ऐसे हैं जिनके लिए ये आपदा भी प्रोपागैंडा चलाने का अवसर है. पिछले दो दिन में कई लोगों ने अपनी-अपनी कथित मां की मौत की खबर शेयर की. लेकिन मां की मौत की उस जानकारी में बड़ी दिक्कत थी. सारे लोग एक ही बात लिख रहे थे- 'तीन घंटे लगातार तड़पने के बाद' मेरी मां (या कोई संबंधी) गुज़र गई.
तीन घंटे लगातार तड़पने के बाद वाली लाइन ट्विटर पर इतनी बार लिखी गई कि ये ऑल्मोस्ट एक कीवर्ड बन गया था. कोई अपनी मां के गुज़रने की खबर बता रहा है, तो इसमें गलत क्या है? फेसबुक-ट्विटर जैसे प्लैटफॉर्म्स पर बहुत सारे ऐसे लोग हैं, जो मदद की गुहार लगा रहे हैं. उस मदद से कितना फायदा पहुंचा, वो बता रहे हैं. कुछ लोग अपनी फैमिली या दोस्तों के गुज़र जाने की खबरें भी बता रहे हैं. मगर फिर आते हैं वो लोग, जो तीन घंटे तड़पने के बाद अपनी मां की मौत की खबर बताते हुए सरकार को कोस रहे हैं. मगर दिक्कत ये है कि कई  लोग एक साथ हूबहू एक ही बात कैसे लिख रहे हैं? '3 घंटे तक लगातार तड़पने के बाद'- अगर आप ये वाक्य ट्विटर पर डालकर देखेंगे, तो इससे जुड़े कई पोस्ट्स आपके सामने आ जाएंगे. इन पोस्ट्स में सिर्फ टेक्स्ट ही नहीं, तस्वीरें भी सेम हैं. इसलिए ये बात संदेह जगाती है. आप इससे जुड़े पोस्ट नीचे देख सकते हैं-
Covid Death Propaganda Post सोशल मीडिया पर कई लोग एक ही पोस्ट लिख रहे हैं. मैसेज के साथ-साथ वो तस्वीर भी एक ही लगा रहे हैं.
किस बात का संदेह? जितने लोग अपनी मां के तड़पकर मरने की खबरें लिख रहे हैं, उनमें से एकाध केस जेन्युइन हो सकते हैं. मगर बिना एक शब्द इधर-उधर किए, ढेर सारे लोग यही बात लिख रहे हैं. इसलिए ये गड़बड़ मामला लगता है. जो लोग सत्ता से नाराज़ हैं. जिन्हें सरकार से शिकायतें हैं. वो सरकार की निंदा करने के लिए ऐसी चीज़ें लिख रहे हैं. 'मां' एक ऐसा टर्म है, जो आपको फौरी तौर पर इमोशनल कर देता है. आप नहीं चाहेंगे कि किसी की मां 3 घंटे तक लगातार तड़पने के बाद गुज़र जाए. मगर यहां मां शब्द का इस्तेमाल पब्लिक को सरकार के खिलाफ भड़काने के लिए हो रहा है.

ऐसा करने के पीछे दूसरी वजह सहानुभूति हासिल करना हो सकती है. सोशल मीडिया पर लोग फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए भी इस तरह के हथकंडे आज़माते हैं. जो कि इस मुश्किल समय में बड़ी असंवेदनशील हरकत है. लोगों का डर बढ़ा रहे हैं ये पोस्ट! बहुत सारे लोग इस वक्त वाकई अपने गुज़र चुके घरवालों के गम में हैं. ऐसे में सोशल मीडिया पर मां के मरने की फर्जी खबरों से लोगों में डर बढ़ रहा है. पैनिक का माहौल बन रहा है. ये नैतिक रूप से भी गलत है. मगर ऐसे पोस्ट करने वालों को सोशल मीडिया पर कानभर सुनाया भी जा रहा है. कुछ लोग वाकई इन फेक पोस्ट्स से परेशान हैं, तो कुछ लोग सत्ताधारी पार्टी के बचाव में उन्हें डांट लगा रहे हैं. वैसे कुछ पोस्ट्स आप नीचे देख सकते हैं-






भारत में कोरोना के आंकड़े डराने वाले हैं. बीते 24 घंटे में 3 लाख 14 हज़ार 835 (3,14,835) नए केसेज़ सामने आए हैं. 2104 लोगों की डेथ हुई है. और इस बीमारी से उबरने के बाद 1 लाख 78 हज़ार 841 (1,78,841) लोग अस्पतालों से डिस्चार्ज हुए हैं. अब इंडिया में एक्टिव कुल कोविड केसेज़ की संख्या 1 करोड़ 59 लाख 30 हज़ार 965 (1,59,30,965) पहुंच गई है.

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