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कौन हैं ये लोग, जो कोरोना भगाने के लिए मशाल जलाकर गांवों में दौड़ रहे हैं?

गांववालों में अफवाह है कि जब से मशालें जली हैं, तब से उनके गांव में कोरोना का कोई मरीज नहीं निकला.

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मध्य प्रदेश के गणेशपुरा गांव के वायरल वीडियो का स्क्रीनग्रैब.
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो में हमें हाथ में मशाल लिए ढेर सारे लोग एक साथ दौड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं. साथ ही ये लोग एक स्वर में 'भाग कोरोना भाग' की आवाज़ लगाते भी सुने जा सकते हैं. हालांकि इस वायरल वीडियो के पीछे 'गो कोरोना गो' फेम राज्यसभा सांसद रामदास अठावले का हाथ नहीं है. तो कौन हैं ये लोग और मशाल जलाकर क्या करने की कोशिश कर रहे हैं? Covid के दौर में मशाल जलाकर एक साथ क्यों दौड़ रहे हैं लोग? जो वीडियो वायरल हो रहा है, ये मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले के गणेशपुरा गांव का है. आपको देश में कोरोना वायरस की वजह से फैली महामारी का पता है. ये लोग किसी भी तरह से इस महामारी से पीछा छुड़ाने की कोशिश कर रहे हैं. क्योंकि कारण अंधविश्वास है. क्योंकि पिछले दिनों गांव में कई लोग बुखार से जूझते पाए गए. क्योंकि कुछ लोगों की मौत भी हो गई. ये सब काफी था, ऐसी मशाल दौड़ करा देने के लिए. हमने इस मामले की तह तक जाने के लिए उस इलाके स्ट्रिंगर प्रमोद कारपेंटर से बात की. प्रमोद जी ने इस मसले पर बात करते हुए बताया कि गणेशपुरा गांव के लोग टोटके की मदद से कोरोना से मुक्ति पाना चाहते हैं. मगर इन गांववालों को ऐसा क्यों लगता है, इसके पीछे की कहानी बड़ी दिलचस्प है. पहले सोशल मीडिया पर शेयर हो रहा, वो वीडियो देखिए- टोटके से कोरोना भगाने के पीछे की वजह क्या है? प्रमोद जी से बात करते हुए गणेशपुरा के जिला पंचायत प्रतिनिधि कालु सिंह सिसोदिया बताते हैं-
''हमारे गांव में दहशत का माहौल बन रहा था. लोग बीमार पड़ रहे थे. मर रहे थे. हमारे बुजुर्गों ने बताया कि जब उनके दौर में जानवरों में महामारी फैलती थी, तो वो एक टोटका करते थे. रविवार और बुधवार की रात वो गांव के हर घर से एक मशाल निकालते थे. मशाल जलाकर वो उस महामारी को भागने के लिए कहते और फिर गांव के बाहर पहुंचकर, उन मशालों को फेंक देते.''
बुजुर्गों को लगता है कि इस टोटके से उनके गांव पर महामारी का प्रभाव खत्म हो जाएगा. अपने बुजुर्गों की बात मानते हुए गणेशपुरा निवासियों ने रविवार की रात 11 बजे मशाल जलाया और 'भाग कोरोना भाग' के नारे लगाकर दौड़ने लगे. भागते-भागते ये लोग गांव के बाहर पहुंचे और अपनी मशालें फेंक दी. गांव के लोगों का ये भी मानना है कि उनके इस टोटके का असर दिखना शुरू हो चुका है. क्योंकि मशाल गांव के बाहर फेंकने के बाद से गांव में किसी के भी बीमार होने की खबर नहीं आई है. हालांकि ये सिर्फ गांववालों का मानना है कि उनके यहां बीमारी खत्म हो गई. वाकई में ऐसा होना बिल्कुल संभव नहीं है. टोटकों से कोई बीमारी या महामारी ठीक नहीं होती. इस तरह के फर्जीवाड़ों से बचें और दूसरों को भी बचाएं. भारत में कोरोना के आंकड़े डराने वाले हैं. बीते 24 घंटे में 3 लाख 14 हज़ार 835 (3,14,835) नए केसेज़ सामने आए हैं. 2104 लोगों की डेथ हुई है. और इस बीमारी से उबरने के बाद 1 लाख 78 हज़ार 841 (1,78,841) लोग अस्पतालों से डिस्चार्ज हुए हैं. अब इंडिया में एक्टिव कुल कोविड केसेज़ की संख्या 1 करोड़ 59 लाख 30 हज़ार 965 (1,59,30,965) पहुंच गई है. बीते साल भी ऐसे अफवाहें खूब फ़ैली थीं. भांति-भांति के टोटके चले कि हर घर से आंचल पसार कर 5-5 रुपये मांगें.  उन पैसों से चूड़ीवाले से 12 चूड़ियां खरीद लें. छ:-छ: चूड़ियां दोनों हाथों में पहनें. इससे कोरोना वायरस नहीं होगा. हालांकि इस पूरे क्रियाकलाप का कोई फायदा न होना था न हुआ. यूपी में तो बीते साल इतना डर फैलाया गया कि लोग रात भर डरकर जागते रहे कि सो गए तो कोरोना का प्रकोप होगा या वो पत्थर बन जाएंगे. पूर्वांचल में आटे के दिये जलाकर कोरोना से बचाने का टोटका चला था. ये सब तो कुछ नहीं, कानपुर में अफवाह फ़ैली थी कि रामचरित मानस के बाल कांड से बाल निकल रहे हैं. कहीं कोई नीम का पत्ता छत में रख रहा था. कोई सात नलों का पानी इकट्ठा कर रहा था. किसी ने टोटका किया था कि कुएं में उल्टा पानी डालने से कोरोना नहीं होगा और कोई-कोई तो कोरोना वायरस को कोरोना माई का नाम देकर उसकी पूजा करने पर उतारू हो गया था. लेकिन किसी एक शख्स को इन तमाम चीजों से एक पैसे का फायदा नहीं हुआ था. कुल जमा इन बातों में मत आइए. ऐसा करके आप कोरोना वायरस से बचेंगे नहीं उल्टा बाहर जाकर और खतरे में पड़ जाएंगे.

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