The Lallantop

PFI का वो एक संगठन जो बैन नहीं हुआ, उसका सच क्या है?

केंद्र सरकार ने PFI पर तो बैन लगाया है, लेकिन इसके राजनीतिक संगठन SDPI पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

Advertisement
post-main-image
SDPI के कार्यकर्ता. (फोटो: सोशल मीडिया)

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और इससे जुड़े कई संगठनों को पांच सालों के लिए बैन कर दिया है. हालांकि, PFI के राजनीतिक संगठन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है. इसे सवाल उठ रहा है कि अगर PFI से जुड़े तमाम संगठनों पर प्रतिबंध लगाया गया है, तो SDPI को किस आधार पर छोड़ा गया है? दरअसल SDPI एक राजनीतिक पार्टी है और चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड है. अगर इसपर कोई कार्रवाई करनी है, तो इसके लिए आयोग से मंजूरी लेनी अनिवार्य है.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

SDPI पर कार्रवाई को लेकर पूछे जाने पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी ने कहा, ‘जिसके खिलाफ सबूत मिलते जाएंगे, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी.’

Advertisement

मालूम हो कि SDPI का गठन साल 2009 में हुआ था. वैसे तो हर राज्य में ही पार्टी के लोग मौजूद हैं, लेकिन इसका प्रमुख गढ़ केरल है, जहां पिछले कुछ सालों में SDPI काफी मजबूत हुई है. ये पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) को कड़ी टक्कर दे रही है, जो कांग्रेस की सहयोगी पार्टी है.

साल 2020 में हुए पिछले नगर निकाय चुनाव में SDPI ने केरल में 100 सीटों पर जीत हासिल की थी. कुछ नगर निकाय सीटों पर SDPI ने CPM की अगुवाई वाले लेफ्ट डेमोक्रेडिट फ्रंट (LDF) को समर्थन दिया था.

वैसे तो PFI में मुख्य तौर पर सिर्फ मुस्लिम कार्यकर्ता ही हैं, लेकिन पार्टी में गैर-मुस्लिम लोग जैसे कि दलित और दूसरे कार्यकर्ता भी शामिल हैं. SDPI में तुलसीधरन पल्लीकल और रॉय अराकल दो बड़े गैर-मुस्लिम चेहरे हैं.

Advertisement

PFI को बैन करने पर SDPI ने गहरी नाराजगी जाहिर की है. पार्टी की तरफ से कहा गया है कि बीजेपी शासन में अघोषित आपातकाल लागू है और ये कार्रवाई इसी का हिस्सा है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एमके फैज़ी ने कहा,

'केंद्र की बीजेपी सरकार द्वारा PFI और इससे जुड़े संगठनों को बैन करना लोकतंत्र और संविधान में दिए गए लोगों के अधिकारों पर हमला है. जिस किसी ने भी बीजेपी की गलत नीतियों के खिलाफ बोला है, उन्हें गिरफ्तारी और छापेमारी का सामना करना पड़ा है. इस शासन में बोलने की आजादी, विरोध प्रदर्शन और संगठनों का लगातार दमन किया जा रहा है.'

फैज़ी ने आगे कहा, 

'विपक्ष को चुप कराने के लिए सरकार जांच एजेंसियों और कानूनों का दुरुपयोग कर रही है. भारतीय संविधान के मूलभूत सिद्धांतों को दरकिनार करते हुए विरोध प्रदर्शन और संगठनों का बर्बर तरीके से दमन किया जा रहा है. देश में स्पष्ट रूप से अघोषित आपातकाल चल रहा है.'

मालूम हो कि सरकार ने PFI के अलावा द रिहैब इंडिया फाउंडेशन (RIF), कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI), ऑल इंडिया इमाम्स काउंसिल (AIIC), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (NCHRO), नेशनल वूमेन्स फ्रंट, जूनियर फ्रंट, इम्पॉवर इंडिया फाउंडेशन और केरल के रिहैब फाउंडेशन को बैन किया है.

वीडियो: कार्बन डेटिंग से ज्ञानवापी मामले में क्या राज खुलेगा?

Advertisement