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यूरोप नहीं, रूस, चीन और भारत होंगे पार्टनर! क्या है ट्रंप का 'C5' प्लान, जिसने मचाई दुनिया में खलबली?

कुछ अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि US, खासकर Trump Administration, एक New World Order बनाने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए C5 नाम के एक नए ग्रुप का भी जिक्र किया जा रहा है. जानिए क्या है यह ग्रुप और क्यों हो रही है इस पर चर्चा.

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अमेरिका कथित तौर पर C5 नाम का नया ग्रुप बनाने की प्लानिंग कर रहा है. (Photo: ITG/File)

'न्यू वर्ल्ड ऑर्डर', यह शब्द आपने गाहे-बगाहे अखबार, टीवी, सोशल मीडिया या मैगजीन में सुना या पढ़ा होगा. खासकर जियोपॉलिटिक्स यानी भू-राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोग अक्सर इससे जुड़ी चर्चा सुनते रहते हैं. इसका आसान सा मतलब है नई वैश्विक व्यवस्था, जिसमें मौजूदा समय से इतर दूसरे देशों की विश्व में अहमियत बढ़ जाएगी, वहीं जिनका आज प्रभाव ज्यादा है, वह कम हो जाएगा. अब यह नया वर्ल्ड ऑर्डर कैसा होगा, कब बनेगा, यह तो समय ही बताएगा. वैसे भी जियोपॉलिक्स रोज बदलने वाली चीज है. लेकिन मौजूदा समय में विश्व का सबसे ताकतवर देश अमेरिका कैसा वर्ल्ड ऑर्डर बनाना चाहता है, इसकी चर्चा इन दिनों काफी तेज है.

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क्या है C-5?

इसकी वजह है कुछ अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स, जिनमें दावा किया जा रहा है कि अमेरिका, खासकर ट्रंप प्रशासन एक नया वर्ल्ड ऑर्डर बनाने की तैयारी कर रहा है. रिपोर्ट्स में बताया गया है कि अमेरिका की नई नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी में 'C5' या 'Core 5' नाम का नया ग्लोबल अलायंस बनाने का प्रस्ताव है. अब यह C5 क्या है, क्यों इतनी चर्चा हो रही है, आइए जानते हैं.

दरअसल, अमेरिका ने हाल ही में अपनी नई नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी रिपोर्ट जारी की थी. इसमें अलग-अलग देशों को लेकर अमेरिका का क्या रूख होना चाहिए, इस पर बातें कही गईं. लेकिन इससे इतर एक अमेरिकी आउटलेट डिफेंस वन ने दावा किया कि यह रिपोर्ट पूरी नहीं है, बल्कि अधूरी है. डिफेंस वन ने कहा कि उसके पास पूरी रिपोर्ट का एक्सेस है. दावा किया गया कि नई स्ट्रैटेजी रिपोर्ट में अमेरिकी ट्रंप प्रशासन ने C5 नाम के नए ग्लोबल अलायंस का प्रस्ताव दिया है. इस C5 में अमेरिका, चीन, रूस, भारत और जापान शामिल हैं. बताया गया कि यह ग्रुप भी हर साल G7 की तर्ज पर समिट करेगा. मालूम हो कि G7 पश्चिमी देशों का एक समूह है, जिसमें अमेरिका, कनाडा समेत यूरोप के सभी बड़े देश शामिल हैं.

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क्यों हो रही है इतनी चर्चा?

अब इस कथित C5 ग्रुप पर इतनी चर्चा इसलिए है, क्योंकि इसमें यूरोप शामिल नहीं है, बल्कि रूस और चीन जैसे देश हैं, जिनकी अमेरिका से खींचतान जग-जाहिर है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका यूरोप के बिना रूस, चीन, भारत और जापान को मिलाकर कोई नया वर्ल्ड ऑर्डर बनाना चाहता है. हालांकि अभी तक इस कथित क्लासीफाइड रिपोर्ट और उसमें C5 के जिक्र के दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

एक अन्य अमेरिकी आउटलेट पॉलिटिको ने भी रिपोर्ट में बताया कि वॉशिंगटन (अमेरिका की राजधानी) में इस हफ्ते एक अजीब सा आइडिया चल रहा है. जिसके मुताबिक अमेरिका देशों का एक नया “Core 5” ग्रुप खड़ा करे, जिसमें चीन और रूस भी शामिल हों. यह पुराने दुश्मनों को करीब लाएगा और मौजूदा G7 से एकदम अलग होगा. रिपोर्ट में जानकारों के हवाले से कहा गया है कि इस आईडिया में ट्रंप की झलक दिखती है. उदाहरण दिया गया कि कैसे ट्रंप ने Nvidia को चीन को चिप बेचने की मंजूरी दे दी और अपने विशेष दूतों को यूक्रेन युद्ध पर बातचीत के लिए रूस भेजा.

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'ट्रंप से मेल खाता है आइडिया'

नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल से जुड़े एक शख्स ने पॉलिटिको से कहा कि यह आइडिया इस बात से मेल खाता है कि प्रेसिडेंट ट्रंप दुनिया को कैसे देखते हैं. उन्हें बिना सोचे-समझे, ताकतवर लोगों के लिए लगाव और दूसरी बड़ी ताकतों के साथ काम करने की आदत है. कुछ अन्य रिपोर्ट्स में भी बताया गया है कि ट्रंप की बदलती प्राथमिकताओं के संकेत पहले ही मिलने लगे थे. जब उन्होंने चीन के साथ अपनी बातचीत को 'G2' करार दिया था. इसके अलावा नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि यूरोप 'सभ्यता के खत्म होने' का सामना कर रहा है. इससे संकेत मिलते हैं कि अमेरिका नई वैश्विक व्यवस्था या न्यू वर्ल्ड ऑर्डर, जिसमें यूरोप का कद कम हो रहा है, के लिए खुद को तैयार कर रहा है.

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