पश्चिम बंगाल (West Bengal) में BJP के 'नबन्ना' मार्च के दौरान कई जगह जमकर बवाल हुआ है. कोलकाता और हावड़ा में पुलिस और BJP कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की खबर है. पुलिस ने बीजेपी कार्यकर्ताओं को हटाने के लिए लाठी चार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े. मार्च में शामिल होने जा रहे BJP विधायक सुवेंदु अधिकारी, सांसद लोकेट चटर्जी और राहुल सिन्हा समेत पार्टी के कई नेताओं को हिरासत में ले लिया गया.
कोलकाता में BJP कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पीटा, लाठी मारी, आंसू गैस छोड़ दिया
कोलकाता से आ रही इन तस्वीरों ने बवाल काट दिया


आजतक से जुड़ीं सूर्याग्नि रॉय के मुताबिक बीजेपी के बड़े नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद इन्हें कोलकाता के लाल बाजार स्थित पुलिस हेडक्वार्टर ले जाया गया है. कोलकाता में कई जगहों पर बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच भी भिड़ंत देखने को मिली है.
दरअसल, बीजेपी ने मंगलवार, 13 सितंबर को कोलकाता से हावड़ा स्थित नबन्ना सचिवालय तक मार्च बुलाया था. पूरे राज्य से बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता कोलकाता और हावड़ा पहुंचे. ये मार्च ममता बनर्जी की सरकार के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर बुलाया गया.
Bengal Police ने रोका तो BJP वाले भिड़ गएमंगलवार को बीजेपी का मार्च का शुरू होने के बाद पुलिस ने हावड़ा से सचिवालय की ओर जाने वाली सभी सड़कों पर बैरिकेड लगा दिए. इसे लेकर पुलिस और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई.
ईस्ट मिदनापुर में बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ता एक-दूसरे से भिड़ गए. वहीं, तामलुक में भी भाजपा कार्यकर्ताओं की टीएमसी कार्यकर्ताओं से झड़प हो गई. मार्च में शामिल होने के लिए बीजेपी कार्यकर्ताओं को लेकर कोलकाता जा रही बसों को उत्तर 24 परगना में पुलिस ने रोक लिया. जिसके बाद यहां भी बीजेपी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच नोकझोंक शुरू हो गई.
Suvendu Adhikari बोले- बंगाल में उत्तर कोरिया की तरह तानाशाहीहिरासत में लिए जाने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी सरकार पर जमकर निशाना साधा. अधिकारी ने कहा,
ममता बनर्जी के पास अपने ही लोगों का समर्थन नहीं है. इसलिए वे बंगाल में उत्तर कोरिया की तरह तानाशाही लागू कर रही हैं.
आजतक की सूर्याग्नि रॉय के मुताबिक पार्टी के बड़े नेताओं की गिरफ्तारी के बाद भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा,
'मुझे आश्चर्य है कि पश्चिम बंगाल में इतने पुलिसकर्मी कहां से आ गए. जब कोयले और मवेशियों की तस्करी हो रही थी, तो ये पुलिस कहां थी. जब अशांति होती है, जब बम विस्फोट होता है, और तब आप पुलिस को बुलाते हैं, तो जवाब मिलता है कि पुलिस बल नहीं है. जब कोई एफआईआर दर्ज कराने पहुंचता है तो भी पुलिस बल नहीं होता है.'
दिलीप घोष ने दावा किया कि भाजपा के मार्च को रोकने के लिए बंगाल सरकार ने झारखंड और बिहार से भी पुलिस के जवान बुलाए हैं.
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