''अहिल्याबाई ने बाबा का पुनरोद्धार करवाया. इसके बाद पिछले करीब 250 सालों में किसी ने भोले बाबा की चिंता की, नहीं की. सबने अपनी-अपनी की. मैं तो हैरान हूं. जब इतनी सारी इमारतों को तोड़ना शुरू किया तो पता नहीं था, कि 40 से ज्यादा इतने मूल्यवान मंदिरों को लोगों ने अपने घरों में दबा-दबा कर के, अतिक्रमण कर के रखा था. किसी ने उस पर किचन बना दिया था, पता नहीं क्या क्या कर रखा था. ये तो अच्छा हुआ कि भोले बाबा ने हमारे भीतर एक चेतना जगाई और ये सपना सज गया. और इसका कारण सिर्फ भोले बाबा नहीं 40 के करीब ऐतिहासिक और पुरातत्विक मंदिर मंदिर भी हैं जो यहां से मिले हैं. इस धाम में जब देश दुनिया के लोग आएंगे तो उन्हें अजूबा होगा. आज उन 40 मंदिरों की मुक्ति का अवसर आ गया. मुझे बताया गया कि शायद बहुत दशकों के बाद ऐसी शिवरात्रि यहां मनी है, जैसा इस बार मनी है. एक सपना था जो सच हुआ है. आप मॉडल में देख सकते हैं. अब मां गंगा का सीधा संबंध भोले बाबा से जोड़ दिया है.''
''पुरातत्विक और ऐतिहासिक चीजों को बचाए रखते हुए, उसकी आत्मा को बरकरार रखते हुए आधुनिकता कैसे लाई जा सकती है, इसका एक बहुत ही अच्छा उदाहरण काशी विश्वनाथ मंदिर है. सवा 200-250 साल बाद शायद परमात्मा ने ये मेरे ही नसीब में लिखा था. ये जो 40 मंदिर प्राप्त हुए हैं. उन्हें भी उसी तरह संभालेंगे. उसका भी महात्म्य बढ़े. इसकी व्यवस्था करेंगे. बीएचयू के लोग इसका पुरातत्विक इतिहास पता करें. कितने दशक, कितने सदियों पुराना है. कब बना कैसे बना. मैं बाबा के चरणों में सिर झुकाकर काशीवासियों के आशीर्वाद के साथ इस पवित्र काम का आरंभ कर रहा हूं. आप मेरे साथ बोलिए हर हर महादेव''प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ये बतौर सांसद 19 वां वाराणसी दौरा है, वहीं इसे लोकसभा चुनाव के ऐलान से पहले आखिरी दौरा भी कहा जा रहा है. काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के नींव रखने के अलावा प्रधानमंत्री यहां महिला लाभार्थियों से बात भी करेंगे.
वीडियो देखें: पटना रैली में इंदिरा गांधी की नक़ल करते दिखे मोदी
























