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अमेरिका में हो रही ट्रंप को हटाने की तैयारी? क्या है 25वां संविधान संशोधन, जिससे वेंस की लॉटरी लग जाएगी

अमेरिका में राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के ईरान की सभ्यता नष्ट करने वाले बयान के बाद 25th Amendment की चर्चा तेज हो गई है. जानिए यह संशोधन क्या है, कैसे लागू होता है और भारत पर इसका क्या असर पड़ सकता है.

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अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ 25th Amendment की तैयारी? (फोटो- AP)

अमेरिका में राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप (Donald Trump) फिर से खबरों में हैं. लेकिन इस बार वजह कोई चुनावी रैली, कोई कोर्ट केस या कोई नया टैक्स प्लान नहीं है. वजह है एक बयान. ऐसा बयान, जिसने अमेरिका के भीतर ही यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या राष्ट्रपति मानसिक और राजनीतिक रूप से इतने स्थिर हैं कि दुनिया की सबसे ताकतवर सेना का बटन उनके हाथ में सुरक्षित रहे. 

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और जब अमेरिका में राष्ट्रपति की फिटनेस पर सवाल उठता है, तो वहां की राजनीति में एक बहुत भारी शब्द घूमने लगता है. 25th Amendment यानी अमेरिकी संविधान का 25वां संशोधन.

आपने शायद पहले भी सुना होगा. लेकिन इस बार चर्चा सिर्फ टीवी डिबेट तक सीमित नहीं है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डेमोक्रेट सांसद खुलकर कह रहे हैं कि ट्रंप को हटाने के लिए 25वें संशोधन का इस्तेमाल होना चाहिए. कुछ रिपब्लिकन खेमे के पुराने चेहरे भी चुप नहीं हैं. सोशल मीडिया पर बहस चल रही है कि ट्रंप का व्यवहार अनप्रिडिक्टेबल हो चुका है और ईरान को लेकर दी गई धमकियां अमेरिका को युद्ध के मुहाने पर ले जा सकती हैं.

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अब कहानी यहां से दिलचस्प हो जाती है. क्योंकि 25वां संशोधन कोई साधारण नियम नहीं है. ये राष्ट्रपति को हटाने का सबसे संवेदनशील और सबसे विवादास्पद संवैधानिक हथियार है. और यह हथियार विपक्ष के हाथ में नहीं, राष्ट्रपति के अपने ही लोगों के हाथ में होता है.

तो सवाल यही है. अमेरिका में 25th Amendment क्या है. इसे लागू करना कितना आसान या मुश्किल है. क्या ट्रंप सच में हट सकते हैं. और अगर अमेरिका में राष्ट्रपति हटाने की प्रक्रिया शुरू होती है तो उसका असर भारत समेत पूरी दुनिया पर क्या पड़ेगा.

इस आर्टिकल में आपको पूरी कहानी मिलेगी. शुरुआत से लेकर अभी तक, और आगे क्या-क्या हो सकता है वहां तक भी...

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25th Amendment आखिर है क्या? इसे बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?

अमेरिकी संविधान का 25वां संशोधन 1967 में लागू हुआ था. अमेरिका के संविधान में पहले यह साफ व्यवस्था नहीं थी कि अगर राष्ट्रपति अचानक गंभीर बीमारी में चले जाएं, कोमा में हों, मानसिक रूप से अस्थिर हों या किसी कारण से काम करने की स्थिति में न हों, तो सत्ता किसके पास जाएगी.

यह सवाल पहले भी उठ चुका था. अमेरिका के कई राष्ट्रपति गंभीर बीमारियों से जूझ चुके थे. लेकिन सबसे बड़ा ट्रिगर बना 1963 में राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी की हत्या.

कैनेडी की हत्या के बाद अमेरिका को लगा कि राष्ट्रपति पद सिर्फ एक कुर्सी नहीं है. यह एक परमाणु ताकत का कंट्रोल रूम है. अगर राष्ट्रपति अचानक हट जाएं या अक्षम हो जाएं और सत्ता के ट्रांसफर का रास्ता साफ न हो, तो देश संकट में फंस सकता है.

इसलिए 25th Amendment लाया गया. ताकि सत्ता का उत्तराधिकार और ट्रांसफर लिखित रूप में साफ रहे.

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अमेरिकी संविधान की प्रस्तावना (फोटो- यूएस आरकाइव)


25th Amendment के चार हिस्से: लेकिन चर्चा Section 4 की क्यों है?

25वें संशोधन में चार सेक्शन हैं. इसमें से तीन सेक्शन अपेक्षाकृत साधारण हैं. असली बवाल Section 4 को लेकर होता है.

  • Section 1: राष्ट्रपति की मौत या इस्तीफे पर क्या होगा: अगर राष्ट्रपति मर जाते हैं या इस्तीफा दे देते हैं, तो उपराष्ट्रपति सीधे राष्ट्रपति बन जाता है.
  • Section 2: उपराष्ट्रपति पद खाली हो जाए तो: अगर उपराष्ट्रपति का पद खाली हो जाए तो राष्ट्रपति एक नया उपराष्ट्रपति नामित कर सकता है, जिसे Congress की मंजूरी लेनी होगी.
  • Section 3: राष्ट्रपति खुद कहे कि मैं असमर्थ हूं: अगर राष्ट्रपति खुद यह घोषित करे कि वह कुछ समय के लिए काम नहीं कर सकते, तो उपराष्ट्रपति अस्थायी रूप से Acting President बन जाता है. यह आमतौर पर तब होता है जब राष्ट्रपति किसी मेडिकल प्रोसीजर में हों, जैसे सर्जरी.
  • Section 4: जब राष्ट्रपति खुद मानने को तैयार न हो: यही सबसे विवादित हिस्सा है. Section 4 कहता है कि अगर उपराष्ट्रपति और कैबिनेट के बहुमत को लगे कि राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों को निभाने में असमर्थ हैं, तो वे लिखित रूप में Congress को बता सकते हैं.

जैसे ही यह पत्र जाता है, राष्ट्रपति की शक्तियां तुरंत उपराष्ट्रपति के पास चली जाती हैं. यानी उपराष्ट्रपति, उसी वक्त से कार्यवाहक राष्ट्रपति (Acting President) बन जाता है. और यही कारण है कि Section 4 को लोग “संवैधानिक तख्तापलट” जैसा भी कहते हैं. क्योंकि इसमें राष्ट्रपति की मर्जी के बिना भी सत्ता छीनी जा सकती है.

Section 4 लागू हुआ तो असल में होगा क्या?

मान लीजिए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ट्रंप की कैबिनेट के आधे से ज्यादा मंत्री यह तय कर लें कि ट्रंप काम करने लायक नहीं हैं. तो वे एक लिखित घोषणा भेजते हैं अमेरिकी सीनेट (Senate), राष्ट्रपति (President) और हाउस स्पीकर (House Speaker) को.

Step 1: लेटर गया और सत्ता शिफ्ट: जैसे ही घोषणा भेजी जाती है, ट्रंप की शक्तियां तुरंत शिफ्ट होकर जेडी वेंस के पास चली जाती हैं. मतलब ट्रंप राष्ट्रपति रहेंगे, लेकिन अधिकार नहीं रहेंगे. वेंस Acting President बन जाएंगे.

Step 2: ट्रंप पलटवार करेंगे: अब लगभग तय है कि ट्रंप कहेंगे, मैं बिल्कुल ठीक हूं. यह साजिश है. ट्रंप Congress को लिखकर बताएंगे कि वह सक्षम हैं और उन्हें अधिकार वापस चाहिए.

Step 3: कैबिनेट और वेंस फिर जवाब देंगे: अगर उपराष्ट्रपति और कैबिनेट फिर से लिखकर कह दें कि नहीं, राष्ट्रपति असमर्थ हैं, तो मामला Congress के पास चला जाएगा.

Step 4: Congress में वोटिंग होगी: अब Congress को 21 दिनों के भीतर फैसला करना होगा. अगर House और Senate दोनों में दो तिहाई बहुमत से यह तय हो जाए कि राष्ट्रपति असमर्थ हैं, तो Acting President बने रहेंगे उपराष्ट्रपति. अगर दो तिहाई बहुमत नहीं मिलता, तो ट्रंप को अधिकार वापस मिल जाएंगे.

यानी राष्ट्रपति हटाने के लिए सिर्फ विपक्ष की आवाज काफी नहीं है. सिस्टम का सबसे बड़ा हिस्सा राष्ट्रपति की अपनी टीम है. 

अमेरिका में अभी 25th Amendment की मांग क्यों उठी है?

अब आते हैं मौजूदा विवाद पर. 6-7 अप्रैल 2026 के आसपास ट्रंप ने Truth Social पर ईरान को लेकर बेहद आक्रामक बयान दिए. खबरों के मुताबिक ट्रंप ने ऐसा दावा किया कि अगर जरूरत पड़ी तो वह ईरान को इस तरह तबाह कर देंगे कि “पूरी सभ्यता खत्म” हो जाएगी.

यह बयान सिर्फ एक धमकी नहीं थी. यह एक परमाणु शक्ति वाले देश के राष्ट्रपति का बयान था. और दुनिया ने इसे सामान्य नहीं माना. इसी के बाद डेमोक्रेट नेताओं ने कहना शुरू किया कि ट्रंप की मानसिक स्थिरता और निर्णय क्षमता पर सवाल उठते हैं. अगर ऐसा व्यक्ति युद्ध शुरू कर दे तो अमेरिका ही नहीं, दुनिया संकट में पड़ सकती है.

किन नेताओं ने मांग की और क्यों यह बात बड़ी हो गई

इस बार मांग सिर्फ एक नेता या एक टीवी एंकर तक सीमित नहीं रही. डेमोक्रेट सांसद राजा कृष्णमूर्ति, रशीदा तलैब और इल्हान ओमर जैसे नेताओं ने सार्वजनिक रूप से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से अपील की कि 25वें संशोधन का इस्तेमाल किया जाए.

मामला यहां तक पहुंचा कि दक्षिणपंथी रिपब्लिकन नेता और ट्रंप समर्थक मानी जाने वाली मार्जोरी टेलर ग्रीन ने भी ट्रंप के बयानों को “पागलपन” जैसी भाषा में वर्णित किया.
यह असामान्य है. क्योंकि अमेरिका में आम तौर पर ट्रंप के खिलाफ बयान डेमोक्रेट देते हैं, रिपब्लिकन नहीं.

इसका मतलब यह है कि ट्रंप के बयान ने उनके अपने खेमे में भी बेचैनी पैदा की है.

क्या यह सिर्फ राजनीति है या सच में मानसिक फिटनेस का मामला

यह सवाल सबसे जरूरी है. ट्रंप के आलोचक कह रहे हैं कि यह सिर्फ राजनीतिक मतभेद नहीं है. यह राष्ट्रपति के temperament और mental stability का मामला है. 

ट्रंप समर्थक कहते हैं कि यह सब विपक्ष का ड्रामा है. ट्रंप हमेशा से आक्रामक भाषा बोलते रहे हैं. और अमेरिका के राष्ट्रपति को कभी-कभी ऐसी भाषा बोलनी पड़ती है ताकि दुश्मन डरें.
यानी अमेरिका में यह बहस दो हिस्सों में बंटी है.

एक पक्ष कहता है ट्रंप युद्ध के लिए खतरनाक हैं. दूसरा पक्ष कहता है ट्रंप deterrence यानी डर पैदा करने की रणनीति पर चल रहे हैं. और इसी के बीच 25th Amendment का नाम उछाला जा रहा है.

25th Amendment लागू करना इतना मुश्किल क्यों है

कागज पर Section 4 बहुत ताकतवर दिखता है. लेकिन राजनीतिक हकीकत में यह लगभग असंभव माना जाता है. कारण साफ है.

1. उपराष्ट्रपति की भूमिका सबसे अहम है: अगर जेडी वेंस साथ नहीं आए, तो कुछ नहीं हो सकता. और अभी तक वेंस ट्रंप के सबसे वफादार नेताओं में गिने जाते हैं.

2. कैबिनेट के बहुमत का साथ चाहिए: कैबिनेट के मंत्री राष्ट्रपति द्वारा चुने जाते हैं. वे राष्ट्रपति के प्रति वफादार होते हैं. अगर वे राष्ट्रपति के खिलाफ जाएं, तो उनका राजनीतिक करियर खत्म हो सकता है.

3. Congress में दो तिहाई बहुमत चाहिए: अगर मामला Congress तक जाता है, तो House और Senate दोनों में दो तिहाई वोट चाहिए. आज के अमेरिका में राजनीति इतनी ध्रुवीकृत है कि दो तिहाई बहुमत जुटाना लगभग सपना है.

मतलब 25th Amendment की मांग जितनी जोर से उठे, लागू होना उतना ही कठिन है.

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अमेरिकी सीनेट का दृश्य

अमेरिका में पहले कभी 25th Amendment का इस्तेमाल हुआ है?

Section 4 का इस्तेमाल आज तक कभी नहीं हुआ. हां, Section 3 का इस्तेमाल कई बार हुआ है. 

जब राष्ट्रपति जॉर्ज बुश जूनियर को मेडिकल प्रोसीजर के लिए anesthesia दिया गया था, तब उन्होंने अस्थायी रूप से शक्तियां उपराष्ट्रपति को ट्रांसफर की थीं. इसी तरह राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी कुछ मेडिकल प्रक्रियाओं के दौरान अस्थायी रूप से अधिकार ट्रांसफर किए थे.

लेकिन Section 4, जिसमें राष्ट्रपति की मर्जी के खिलाफ सत्ता छीनी जाए, वह आज तक सिर्फ किताबों में रहा है. यही वजह है कि ट्रंप के मामले में चर्चा होते ही दुनिया की नजरें टिक जाती हैं.

क्या यह महाभियोग (impeachment) जैसा है? दोनों में फर्क समझिए

बहुत से लोग 25th Amendment को महाभियोग समझ लेते हैं. लेकिन दोनों अलग चीजें हैं. 

महाभियोग क्या है?: महाभियोग एक राजनीतिक और कानूनी प्रक्रिया है जिसमें राष्ट्रपति पर आरोप लगते हैं कि उन्होंने संविधान तोड़ा या गंभीर अपराध किए. इसमें अमेरिकी कांग्रेस (Congress) की भूमिका मुख्य होती है. हाउस का कांग्रेस महाभियोग लगाता है. और अमेरिकी सीनेट उसका ट्रायल (trial) करती है.

25th Amendment क्या है: 25th Amendment महाभियोग नहीं है. यह राष्ट्रपति को अपराधी साबित करने की प्रक्रिया नहीं है. यह एक तरह का “फिटनेस टेस्ट” है. यानी राष्ट्रपति काम करने में सक्षम हैं या नहीं.

इसीलिए Section 4 ज्यादा संवेदनशील है. क्योंकि इसमें आरोप अपराध का नहीं, असमर्थता का होता है.

ट्रंप को हटाने की मांग का असली राजनीतिक मतलब क्या है

अब बात सिर्फ संविधान की नहीं है. राजनीति का गणित भी समझना जरूरी है. ट्रंप के खिलाफ 25th Amendment की मांग एक संदेश है. यह विपक्ष का तरीका है यह दिखाने का कि ट्रंप सिर्फ विवादित ही नहीं हैं, वे खतरनाक भी हैं.

इससे डेमोक्रेट वोटर्स में ऊर्जा आती है. उन्हें लगता है कि पार्टी ट्रंप के खिलाफ लड़ रही है. दूसरी तरफ ट्रंप इसे अपने पक्ष में इस्तेमाल कर सकते हैं. वे कह सकते हैं कि Establishment उन्हें हटाने की साजिश कर रहा है. ट्रंप की राजनीति हमेशा victim narrative पर चलती रही है. “मेरे खिलाफ सब मिले हुए हैं” वाला नैरेटिव.

इसलिए 25th Amendment की चर्चा ट्रंप के लिए नुकसान और फायदा दोनों बन सकती है.

ईरान का एंगल इतना बड़ा क्यों है: अमेरिका और मध्य पूर्व की पुरानी कहानी

ईरान और अमेरिका का रिश्ता दशकों से खराब रहा है. 1979 की Iranian Revolution के बाद से अमेरिका ने ईरान को दुश्मन की तरह देखा. ईरान ने अमेरिका को “Great Satan” कहा.
बीच में ‘न्यूक्लिर डील’ (Nuclear Deal) हुआ, जिसे ओबामा प्रशासन ने आगे बढ़ाया.

लेकिन ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में उस deal से अमेरिका को बाहर निकाल लिया था. इससे ईरान के साथ तनाव फिर बढ़ गया. 

अब 2026 में ट्रंप का ऐसा बयान आना कि ईरान की सभ्यता खत्म कर देंगे, यह सिर्फ भाषा नहीं है. यह उस पुराने तनाव को nuclear war जैसे डर तक ले जाता है.
और यही डर अमेरिकी नेताओं को परेशान कर रहा है.

अमेरिका में ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया कैसी रही

अमेरिकी मीडिया में यह बयान दिनभर की हेडलाइन बना. कुछ टीवी चैनलों ने इसे “reckless” कहा. कुछ ने इसे “स्ट्रॉन्ग लीडरशिप” कहा. लेकिन सोशल मीडिया पर जो बहस चली, उसमें एक शब्द बार-बार आया- अस्थिर (unstable).

ट्रंप के विरोधियों ने कहा कि यह आदमी impulsive है. यह बटन दबा सकता है. ट्रंप समर्थकों ने कहा कि यही तो ताकत है. दुश्मन को डराना जरूरी है. यानी अमेरिका के समाज में भी यह बहस moral और psychological दोनों स्तर पर चल रही है.

मानसिक फिटनेस पर सवाल उठाना इतना खतरनाक क्यों है

यहां एक बहुत बड़ा सवाल है. क्या किसी नेता के खिलाफ mental fitness का मुद्दा उठाना सही है. अमेरिका में यह बहस बेहद संवेदनशील है क्योंकि यह stigma पैदा कर सकती है. अगर आप किसी राष्ट्रपति को “दिमागी तौरपर असमर्थ” (mentally unfit) कह देते हैं, तो आप एक तरह से मानसिक स्वास्थ्य की बीमारी को राजनीतिक हथियार बना देते हैं.

यह उन लोगों के लिए भी नुकसानदेह है जो सच में डिप्रेशन, anxiety या बायोपोलर डिस्ऑर्डर जैसी स्थितियों से जूझते हैं. लेकिन दूसरी तरफ, राष्ट्रपति के पास परमाणु हथियारों का नियंत्रण है. अगर उनके व्यवहार में सच में instability दिख रही हो, तो सवाल उठना भी जरूरी है.

यही वजह है कि अमेरिका में 25th Amendment का नाम आते ही मामला राजनीति से आगे समाज और psychology तक चला जाता है.

ट्रंप समर्थक क्या तर्क दे रहे हैं

ट्रंप समर्थकों का मुख्य तर्क यह है कि यह सब विपक्ष का डर फैलाने वाला अभियान है. उनका कहना है कि ट्रंप हमेशा blunt बोलते हैं. यह उनकी brand politics है. वे कहते हैं कि ईरान को धमकी देना अमेरिका की सुरक्षा नीति का हिस्सा है. अगर अमेरिका कमजोर दिखेगा तो ईरान, रूस, चीन सब सिर उठा लेंगे.

उनका यह भी कहना है कि 25th Amendment का इस्तेमाल लोकतंत्र के खिलाफ होगा. क्योंकि ट्रंप चुने हुए राष्ट्रपति हैं. उन्हें हटाना चुनाव के जनादेश का अपमान होगा. यह तर्क अमेरिका के conservative voters के बीच मजबूत है.

ट्रंप विरोधी क्या कह रहे हैं

ट्रंप विरोधियों का तर्क ज्यादा सीधा है. उनका कहना है कि ट्रंप impulsive हैं, anger driven हैं और कई बार बिना सोच-समझे बयान देते हैं. अगर राष्ट्रपति एक ट्वीट या पोस्ट के जरिए युद्ध की धमकी दे सकता है, तो यह पूरी दुनिया के लिए खतरा है.

वे यह भी कहते हैं कि ट्रंप के फैसलों में personal ego बहुत हावी रहता है. और यही चीज अमेरिका को गलत दिशा में ले जा सकती है. उनका सबसे बड़ा तर्क यह है कि राष्ट्रपति का काम सिर्फ ताकत दिखाना नहीं, दुनिया को स्थिर रखना भी है.

अमेरिका की राजनीति में असल खेल क्या चल रहा है

अब जरा बिटविन द लाइन खबर को समझिए. 25th Amendment की चर्चा का एक hidden मतलब यह भी है कि डेमोक्रेटिक पार्टी ट्रंप को “normal opponent” नहीं मान रही. वे ट्रंप को authoritarian threat की तरह पेश कर रहे हैं.

इससे उनका फायदा यह है कि वे moderate रिपब्लिकन वोटर्स को भी अपने पक्ष में खींच सकते हैं. वे कह सकते हैं कि यह पार्टी बनाम पार्टी का मामला नहीं, यह देश बचाने का मामला है.
दूसरी तरफ रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी power struggle है.

ट्रंप अब भी सबसे बड़ा चेहरा हैं, लेकिन पार्टी के कई लोग भविष्य के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं. जेडी वेंस जैसे नेताओं के लिए यह एक परीक्षा भी है कि वे ट्रंप के साथ आखिरी सांस तक खड़े रहेंगे या पार्टी के अगले चरण की तैयारी करेंगे.

यानी यह बहस सिर्फ ट्रंप को हटाने की नहीं, रिपब्लिकन पार्टी के भविष्य की भी है.

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ट्रंप के साथ रिपब्लिकन पार्टी का भविष्य भी दांव पर (फोटो- AP)

अगर सच में 25th Amendment लागू हुआ तो अमेरिका में क्या होगा

मान लीजिए असंभव होते हुए भी 25th Amendment की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. 

Short term असर: 

  • अमेरिका में राजनीतिक भूचाल आएगा.
  • Stock market गिर सकता है क्योंकि uncertainty बढ़ जाएगी.
  • Dollar में उतार-चढ़ाव होगा.
  • अमेरिकी सेना और विदेश नीति में confusion आएगा कि आदेश कौन दे रहा है.

Long term असर:

अगर राष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया सफल होती है, तो अमेरिका में एक मिसाल (precedent) बन जाएगा. फिर भविष्य में हर विवादित राष्ट्रपति पर Section 4 का डर लटकता रहेगा. यह लोकतंत्र को स्थिर भी कर सकता है और अस्थिर भी. क्योंकि राष्ट्रपति की कुर्सी कमजोर हो सकती है.

दुनिया पर क्या असर होगा: खासकर युद्ध और तेल की कीमतों पर

ईरान से जुड़ा मामला सीधे तेल से जुड़ता है. मध्य पूर्व में तनाव बढ़ते ही क्रूड ऑयल की कीमतें ऊपर जाती हैं. अगर अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनती है, तो Strait of Hormuz (हॉर्मूज जल डमरूमध्य) जैसी जगहों पर खतरा बढ़ेगा. वहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है.

तेल महंगा होगा तो inflation बढ़ेगा. यानी अमेरिका में ट्रंप की एक धमकी भारत के पेट्रोल पंप तक असर डाल सकती है.

भारत के लिए इसका मतलब क्या है 

भारत के लिए अमेरिका की राजनीति कोई दूर की चीज नहीं है. अगर अमेरिका और ईरान में तनाव बढ़ता है, तो भारत पर सीधा असर पड़ेगा.

1. पेट्रोल और डीजल: भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा crude oil import करता है. तेल महंगा हुआ तो भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होगा. महंगा पेट्रोल मतलब ट्रांसपोर्ट महंगा. ट्रांसपोर्ट महंगा मतलब सब्जी, दूध, दाल, किराया सब महंगा.

2. डॉलर मजबूत हुआ तो रुपये पर दबाव: अमेरिका में संकट बढ़ेगा तो निवेशक safe assets की तरफ भागेंगे. Dollar मजबूत होगा. Rupee कमजोर होगा. Rupee कमजोर मतलब इम्पोर्ट महंगा. और इम्पोर्ट महंगा मतलब इलेक्ट्रॉनिक, मोबाइल, लैपटॉप, दवाओं के रॉ मैटेरियल तक महंगे.

3. भारत का IT सेक्टर और नौकरी: अगर अमेरिका में political instability बढ़ी, तो कंपनियां खर्च कम कर सकती हैं. नई नियुक्तियों में कमी हो सकती है. H1B visa जैसे मुद्दे फिर गरमा सकते हैं. भारत के मिडिल क्लास आईटी प्रोफेशनल्स पर असर पड़ सकता है.

4. भारतीय छात्रों पर असर: अमेरिका में अनिश्चितता बढ़ती है तो immigration rules सख्त हो सकते हैं. भारतीय छात्रों के लिए वीजा में देरी और नियमों का दबाव बढ़ सकता है.

भारत सरकार के लिए क्या रणनीतिक चुनौती है

भारत की विदेश नीति हमेशा संतुलन पर चलती है. भारत अमेरिका के साथ रणनीतिक पार्टनरशिप भी रखता है और ईरान के साथ ऊर्जा और क्षेत्रीय सहयोग का रिश्ता भी. अगर अमेरिका और ईरान में तनाव बढ़ा तो भारत को फिर एक बार tightrope walk करनी पड़ेगी. 

भारत को अमेरिका के साथ खड़े रहना भी होगा क्योंकि रक्षा और टेक्नॉलजी पार्टनरशिप है. और ईरान को पूरी तरह छोड़ भी नहीं सकता क्योंकि चाबहार पोर्ट जैसी परियोजनाएं भारत के लिए सेंट्रल एशिया तक पहुंच का रास्ता हैं. यानी अमेरिका में ट्रंप की धमकी भारत की कूटनीति को भी टेस्ट करेगी.

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चाबहार पोर्ट और भारत की साझेदारी

किन सेक्टर्स पर असर होगा

अगर वाकई ऐसा हुआ तो भारत के इन सेक्टर पर इसका असर दिखेगा.

  • एविएशन और लॉजिस्टिक
  • फ्यूल कॉस्ट बढ़ते ही एयरलाइन्स के टिकट महंगे होंगे.
  • परिवहन महंगा होगा.
  • FMCG और रिटेल
  • ट्रांसपोर्ट और पैकेजिंग महंगा होगा तो कंपनियां कीमत बढ़ाएंगी.
  • महंगाई बढ़ेगी.

स्टॉक मार्केट पर असर

शेयर बाजार पर भी इस संकट का असर देखने को मिलेगा. विदेशी निवेशक जोखिम के समय भारत जैसे emerging markets से पैसा निकालते हैं. Sensex और Nifty में गिरावट का खतरा रहता है.

जबकि सोने में मजबूती देखने को मिलेगी. ऐसे समय में लोग सोना खरीदते हैं. भारत में सोने की डिमांड बढ़ती है तो कीमतें और ऊपर जाती हैं.

अमेरिका में लोग इतना डर क्यों रहे हैं

अमेरिका की जनता पहले ही polarized है. ट्रंप एक ऐसा चेहरा हैं जो या तो बहुत पसंद किए जाते हैं या बहुत नफरत किए जाते हैं. जब ऐसे नेता युद्ध की धमकी देते हैं तो समाज में डर और anxiety बढ़ती है. 

लोगों को लगता है कि एक व्यक्ति का मूड पूरे देश की दिशा बदल सकता है. और यही वह मनोवैज्ञानिक दबाव है जो 25th Amendment जैसी बहस को हवा देता है. क्योंकि जनता को लगता है कि संविधान में कोई इमरजेंसी ब्रेक होना चाहिए.

क्या जेडी वेंस सच में ट्रंप के खिलाफ जा सकते हैं

ईमानदारी से कहें तो अभी की स्थिति में यह बेहद मुश्किल दिखता है. जेडी वेंस का राजनीतिक भविष्य ट्रंप की छाया में बना है. अगर वे ट्रंप के खिलाफ जाते हैं, तो MAGA वोटर उन्हें traitor कह सकते हैं.

और अगर वे ट्रंप के साथ जाते हैं और ट्रंप भविष्य में कमजोर पड़ते हैं, तो वे भी उसी के साथ डूब सकते हैं. यानी वेंस की राजनीति इस समय एक बड़ी दुविधा में है.

आगे क्या हो सकता है? तीन संभावित परिस्थितियां

अब क्या होगा? इस सवाल के तीन जवाब या परिस्थिती हो सकती है.

Scenario 1: शोर होगा, लेकिन कुछ नहीं होगा: सबसे ज्यादा संभावना इसी की है. डेमोक्रेट बयान देंगे. मीडिया चर्चा करेगा. ट्रंप जवाब देंगे. और मामला धीरे-धीरे ठंडा हो जाएगा.

Scenario 2: कांग्रेस में सुनवाई और जांच: दूसरा रास्ता यह हो सकता है कि अमेरिकी कांग्रेस में सुनवाई शुरू हो. ट्रंप के बयान और उनकी निर्णय लेने की क्षमता पर सवाल उठें. यह 25th Amendment लागू नहीं करेगा, लेकिन दबाव जरूर बढ़ाएगा.

Scenario 3: रिपब्लिकन पार्टी के भीतर विद्रोह: अगर ट्रंप लगातार ऐसे बयान देते रहे और उनकी popularity में गिरावट आई, तो पार्टी के भीतर कुछ लोग दूरी बना सकते हैं. लेकिन यह भी धीरे-धीरे होगा, अचानक नहीं.

क्या 25th Amendment लोकतंत्र के लिए सही है या खतरनाक

यह सवाल अमेरिका की आत्मा से जुड़ा है. कुछ लोग कहते हैं कि यह संविधान का safety valve है. एक emergency tool. कुछ लोग कहते हैं कि यह elected leader को हटाने का backdoor है.

सच शायद बीच में है. अगर राष्ट्रपति सच में अक्षम हो, तो यह जरूरी है. लेकिन अगर इसे राजनीतिक हथियार बना दिया गया, तो यह लोकतंत्र को कमजोर कर देगा. और यही वजह है कि अमेरिका में Section 4 का इस्तेमाल आज तक नहीं हुआ. लोग डरते हैं कि यह precedent बन गया तो हर राष्ट्रपति असुरक्षित हो जाएगा.

ये भी पढ़ें: अर्जेंटीना को ईरान से क्या खुन्नस है? जो IRGC को आतंकी संगठन घोषित कर दिया

आम भारतीय के लिए practical takeaway. आपको क्या समझना चाहिए और क्या करना चाहिए

भारत में बैठकर आप ट्रंप या वेंस की राजनीति नहीं बदल सकते. लेकिन आप अपने financial decisions में सतर्क रह सकते हैं. अगर मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता दिखे तो कुछ बातें ध्यान रखें.

  • पहली बात, फ्यूल की कीमत और महंगाई बढ़ने की संभावना रहती है, तो घरेलू बजट में cushion रखें.
  • दूसरी बात, शेयर बाजार में panic selling से बचें. Geopolitical मुसीबत में volatility आती है लेकिन हर गिरावट स्थाई नहीं होती.
  • तीसरी बात, अगर आप विदेश यात्रा या US education plan कर रहे हैं, तो visa rules और embassy updates पर नजर रखें.
  • चौथी बात, सोना और डॉलर जैसी चीजों में rush में पैसा लगाने से बचें. मिडिल क्लास अक्सर मुसीबत में गलत फैसले कर बैठता है. मतलब पैनिक नहीं, तैयारी.
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भारतीय शेयर बाजार पर अमेरिकी संकट का असर संभव

ट्रंप हटेंगे या नहीं, लेकिन अमेरिका हिल चुका है

अब आते हैं सबसे जरूरी हिस्से पर. क्या ट्रंप को 25th Amendment से हटाया जा सकता है. कानूनी तौर पर जवाब है, हां. राजनीतिक तौर पर जवाब है, लगभग नहीं. क्योंकि इसके लिए जेडी वेंस और ट्रंप की कैबिनेट को उनके खिलाफ जाना होगा. और यह तभी होगा जब ट्रंप खुद अपने खेमे में बोझ बन जाएं.

लेकिन इस बहस का सबसे बड़ा मतलब यह है कि अमेरिका में राष्ट्रपति पद की स्थिरता पर सवाल उठ चुके हैं. ट्रंप के ईरान वाले बयान ने सिर्फ डेमोक्रेट्स को नहीं, दुनिया को भी यह सोचने पर मजबूर किया है कि क्या अमेरिका की विदेश नीति किसी रणनीति से चल रही है या किसी व्यक्ति के गुस्से से.

और यही बात इस मुद्दे को इतना बड़ा बनाती है. आज अमेरिका में 25th Amendment की चर्चा सिर्फ ट्रंप को हटाने की बहस नहीं है. यह बहस इस बात की है कि दुनिया की सबसे ताकतवर कुर्सी पर बैठा आदमी कितना predictable होना चाहिए.

क्योंकि जब अमेरिका का राष्ट्रपति अप्रत्याशित (unpredictable) होता है, तो उसकी लहरें दिल्ली से लेकर तेहरान, मॉस्को से लेकर बीजिंग तक महसूस होती हैं.

वीडियो: ट्रंप की ईरान को नई धमकी, मचने वाली है बड़ी तबाही?

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