उमेश यादव बन गए RBI के डिप्टी मैनेजर
क्यूं इंडियन प्लेयर होने के बावजूद उमेश यादव RBI के डिप्टी मैनेजर बनना चाहते थे?
Advertisement

फोटो - thelallantop
जब फ़रहान पैदा हुआ था तो उसके बाप ने कहा, "मेरा बेटा इंजीनियर बनेगा." लड़के को कैमरे से इश्क़ हो गया. वो वाइल्डलाइफ़ फ़ोटोग्राफर बनने के सपने देखने लगा. इंडियन फ़ास्ट बॉलर उमेश यादव को आरबीआई की नागपुर ब्रांच में डिप्टी मैनेजर बना दिया गया है. सोमवार को उन्होंने फाइनल पेपरवर्क्स ख़तम किया और डिप्टी मैनेजर का पद संभाला. उमेश के डिप्टी मैनेजर बनने की कहानी मज़ेदार है. उतर प्रदेश में पैदा हुए. पिता की चाहत थी कि बेटा सरकारी नौकरी करे. बेटे ने तैयारी भी की. पुलिस में लगभग भर्ती भी हो गए. कॉन्स्टेबल के पद पर. 10 साल बाद उन्हें उससे भी बड़ा ऑफर मिला, जिससे उन्होंने इनकार नहीं किया. पहले वो कॉन्स्टेबल बनते, अब वो उस बिल्डिंग के डिप्टी मैनेजर होंगे जिसकी सुरक्षा के लिए कॉन्स्टेबल मुस्तैद होते हैं. वैसे तो उमेश यादव उस वक़्त भी सरकारी नौकर बन सकते थे, जब वो एयर इंडिया के लिए खेला करते थे. वहां अच्छा खेलने पर उन्हें परमानेंट नौकरी मिल सकती थी. उन्होंने अच्छा खेला भी लेकिन एयर इंडिया को उन्हें परमानेंट नौकरी पर रख लेने का आइडिया रास नहीं आया. उमेश को वहां भी नौकरी नहीं मिली. ये सब कुछ फायदेमंद ही साबित हुआ. क्यूंकि अब वो और भी बड़े पद पर आ बैठे हैं. उमेश की आरबीआई से बात तब से चल रही थी जब वो चैंपियंस ट्रॉफी के लिए जाने वाले थे. तब से सभी औपचारिकताएं पूरी की जा रही थीं. अभी श्री लंका टूर के लिए निकलने से ठीक एक दिन पहले उन्होंने ये फाइनल किया और काग़ज़ों पर साइन किये और दुनिया की सबसे बड़ी टीम के लिए खेलने के बावजूद पापा का सरकारी नौकरी का सपना पूरा किया.
Add Lallantop as a Trusted Source

Advertisement
Advertisement
Advertisement






















