ये फोटो टाइम्स ऑफ़ इंडिया से लिया गया है.
पइसा... हाय पइसा... बैंकों में, डाकखानों में, कतारों में. शादियों की बहारों में. खेतों खलिहानों में. लोगों की खाली जेबों में. मजदूर और मरीजों की आहों में. रुपये की घट रही कीमत में. नए नोट के छप रहे नकली नोटों में. ब्लैक से व्हाइट किए जा रहे तरीके में. एक तस्वीर पैसे की ये है और दूसरी तस्वीर है. सरकार के एप में. 93 परसेंट के सर्वे में. लोगों के साथ होने के दावे में. नोटबंदी के बदल रहे सिलेबस में. RBI और सरकार की राहत में. काला धन ख़त्म करने के वादे में. रंग छूटे तो असली होने में. और अब 500 के नए नोट के अलग अलग डिज़ाइन में. अरे बाबा. बड्डा ही कंफ्यूजन है रे. क्या नकली है क्या असली है. सच क्या है झूठ किया है. नहीं पता. लेकिन फैसला कितन भी अच्छा हो नोटबंदी से लोगों को परेशानी तो है इतना तो सच है. अब खबर है कि जो 500 के नोट हैं उनके अंदाज जुदा दिख रहे हैं. अभी 500 के नोट का सर्कुलेशन ठीक तरह से भी हुआ नहीं है कि उसमें कई तरह की विभिन्नताएं देखने को मिल रही हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे लोगों के दिमाग में कन्फ्यूजन पैदा होने के अलावा इसकी नकल हो सकती है. और लोगों को असली नकली की पहचान नहीं हो पाएगी. नोटबंदी कर नए नोट मार्केट में लाने का फैसला हुआ तो इसलिए था कि नकली नोटों पर लगाम लगाई जा सके. लेकिन जिस तरह कि ख़बरें आ रही हैं उससे लगता है कि नकली नोटों पर लगाम लगाना वाकई मुश्किल काम है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने 500 के नए नोट में पाए जा रहे डिफ़रेंस पर रिपोर्ट पब्लिश की है. उनके मुताबिक उनके सामने तीन ऐसे मामले आए हैं, जिनमें 500 रुपये के नए नोट्स एक दूसरे से अलग पाए गए हैं. एक मामले में दिल्ली के रहने वाले आबशार ने बताया, 'इस नोट में गांधी जी के चेहरे का एक से ज्यादा शैडो नजर आता है. इसके अलावा नेशनल सिंबल के अलाइनमेंट और सीरियल नंबरों में भी गड़बड़ी है.'
गुरुग्राम के रहने वाले रेहान शाह ने बताया कि नोटों की किनारी का डिज़ाइन अलग-अलग था मुंबई के एक निवासी ने 2,000 रुपये के अलग-अलग कलर के नोट्स दिखाए. एक नोट में शेड हल्का था तो दूसरे में ज्यादा. आरबीआई की प्रवक्ता अल्पना किलावाला ने बताया, 'ऐसा लगता है कि जल्दबाजी की वजह से वे नोट भी जारी हो गए हैं, जिनमें प्रिंटिंग की कुछ कमियां रह गई थीं. लेकिन लोग आराम से इन नोटों का लेन-देन कर सकते हैं या अगर उनको गड़बड़ी लगती है तो आरबीआई को लौटा भी सकते हैं.' एक्सपर्ट्स का कहना है कि नोटों में विभिन्नता होने से मार्केट में नकली नोटों को आसानी से चलाया जा सकता है. क्योंकि लोगों को पहचानना मुश्किल हो जाएगा कि असली नोट कौन सा है और नकली कौन सा. यानी 500 के नोट का अंदाज अपना-अपना है. पहले खबर आई कि 1000 का नोट रंग छोड़ रहा है. तो वित्त सचिव ने कहा कि ये उसकी पहचान है अगर रंग न छोड़े तो नकली है. यानी अब अगर आपका कपड़ा रंग न छोड़े तो वो भी नकली है, या फिर कोई और चीज रंग न छोड़े तो भी नकली है. व्हाट एन आईडिया सर जी. हम तो बचपन से सुनते आए हैं जो रंग छोड़े वो नकली है. नोट के रंग छोड़ने से कहावत भी चेंज हो जाएंगी, क्योंकि देश बदल रहा है.
पहले कहा जाता था कि गिरगिट की तरह रंग बदलना. और अब कहा जाएगा नोट की तरह रंग बदलना.
अब 500 के नोट का अंदाज एक दूसरे से जुदा है. इस खबर को जानके मुझे 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' का वो गीत याद आ रहा है. 'रिश्तों के भी रूप बदलते हैं.' यानी नोट के भी रूप बदलते हैं.
कई सालों तक आपराधिक मामलों को संभालने वाले एक आईपीएस ऑफिसर ने बताया, 'लोगों को नोट पर सारे फीचर को समझने में दिक्कत होती है और नोट लेने से पहल एक-एक चीज चेक नहीं कर पाते हैं. ऐसे में अगर अलग-अलग नोट मार्केट में होंगे तो लोगों को असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाएगा.'
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