The Lallantop

केरल में ईसाइयों के धर्मगुरु ने कहा, BJP को सपोर्ट करेंगे, लेकिन ये काम करना होगा...

इस पर खूब बवाल हो रहा है!

Advertisement
post-main-image
थालास्सेरी आर्कबिशप जोसेफ पामप्लानी (फोटो-आजतक)

केरल के एक आर्कबिशप के बयान पर बवाल हो रहा है (Kerala Archbishop on BJP Controversy). जोसेफ पामप्लानी उत्तरी केरल के थालास्सेरी में रोमन कैथोलिक चर्च के आर्कबिशप हैं. बीजेपी को ऑफर देते हुए जोसेफ बोले कि अगर आप किसानों से 300 रुपये के रेट पर रबर खरीदेंगे तो हम आपको चुनावों में जीत दिलाएंगे. मामले पर चर्च के एक पादरी ने असहमति जताई है. राजनीति भी शुरू हो गई.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

बात दें, चर्च में पादरियों के अलग अलग पद होते हैं. इसमें जूनियर से सीनियर की ओर पहले प्रीस्ट, बिशप, आर्कबिशप, कार्डिनल और फिर पोप आते हैं. 

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार, 19 मार्च को कन्नूर जिले के अलाकोडे में एक किसान रैली थी. ये रैली कैथोलिक कांग्रेस थालास्सेरी आर्चडीओसीज ने आयोजित की थी. इस दौरान आर्क बिशप जोसेफ पामप्लानी बोले,

Advertisement

“मैं इस मंच पर खड़े होकर राजनीति पर बात नहीं करना चाहता. लेकिन हम प्रवासियों के अस्तित्व के लिए हमें राजनीतिक रूप से जवाब देने की जरूरत है. रबर की कीमत अभी 130 से 150 रुपये है. हम केंद्र सरकार से कह सकते हैं कि अगर आप किसानों से 300 रुपये के रेट पर खरीदते हैं तो हम आपको वोट देंगे और आपको जीत दिलाएंगे. आपके यहां से कोई सांसद नहीं हैं, हम इस स्थिति को भी बदल देंगे.”

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, कांग्रेस पार्टी के महासचिव के सी वेणुगोपाल ने आर्क बिशप के बयान की आलोचना करते हुए कहा,

“आशा है कि बिशप उत्तर भारतीय राज्यों में चर्च और प्रीस्ट पर हुए हमलों के बारे में भूल गए होंगे. हमें नहीं पता कि उन्होंने किस संदर्भ में ऐसा बयान दिया.”

Advertisement

वहीं, बीजेपी ने आर्क बिशप के बयान की तारीफ की है. प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने कहा,

“हम उनके बयान का स्वागत करते हैं. पार्टी ने ईसाई बहुल उत्तर-पूर्वी राज्यों में बड़ी जीत दर्ज की है और हमें उम्मीद है कि ये केरल में भी दिखाई देगा. पार्टी केंद्र सरकार के साथ रबर किसानों की दुर्दशा को उठाएगी.”

मामले पर कैप्युचिन चर्च के प्रीस्ट फादर सुरेश मैथ्यू ने कहा,

"आर्कबिशप के बयान को केरल में ईसाइयों के रुख के रूप में नहीं लिया जा सकता है. केरल में कई ईसाई धार्मिक नेताओं को बीजेपी की विचारधारा के बारे में कोई जानकारी नहीं है. जो लोग रबर किसानों के लिए बोल रहे हैं उन्हें पंजाब और उत्तर प्रदेश के किसानों से सीखना चाहिए. उन्होंने कभी नहीं कहा कि कानूनों को रद्द कर दिया गया तो वे किसी पार्टी को वोट देंगे. उन्होंने एक साल तक अपने हक की लड़ाई लड़ी.

बता दें, केरल में रबर के बागान मुख्य रूप से कैथोलिक किसानों के अंडर ही आते हैं और चर्च का उनके बीच एक मजबूत प्रभाव है.

वीडियो: केरल हाई कोर्ट ने नाबालिग से रेप के आरोपी पादरी की सजा घटा दी!

Advertisement