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हमले में ज़ख़्मी RSS वाले की मौत, मुस्लिम ने पहुंचाया था हॉस्पिटल, अंतिम संस्कार में हुई पत्थरबाज़ी

इलाके में तनाव है. क्योंकि एक मुस्लिम छात्र को भी मार दिया गया है.

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पश्चिम बंगाल की हिंसा अभी ठंडी नहीं हुई थी कि अब कर्नाटक में हिंसा की चिंगारी उठ रही है. सांप्रदायिक हिंसा में लोग एक दूसरे को नुकसान पहुंचा रहे हैं. जबकि इन्हीं लोगों से अगर पूछा जाए कि इससे क्या फायदा है तो बगले झांक जाएंगे. और कोई फायदा न गिना पाएंगे. खबर है कि कर्नाटक में एक हमले में घायल हुए आरएसएस कार्यकर्ता शरद मादीवाला की शुक्रवार 7 जुलाई की रात को मौत हो गई. जब उनपर हमला हुआ था तो एक मुसलमान उन्हें मंगलुरु के हॉस्पिटल लेकर पहुंचा था. हमला किसने किया था, नहीं पता. लेकिन जब दक्षिण कन्नड़ इलाके के बंतवाल जिले में शरद के शव का अंतिम संस्कार करने के लिए ले जाया गया तो उस वक़्त हिंसा भड़क गई. अंतिम संस्कार में शामिल लोगों में से कुछ लोग कथित तौर पर पुलिस से उलझ गए और उन्होंने पत्थरबाजी कर दी. पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा. इसके अलावा एक मुस्लिम छात्र की तीन लोगों ने हत्या कर दी है, इस वजह से भी इलाके का माहौल तनाव वाला है.
आरएसएस कार्यकर्ता पर हुए हमले को लेकर हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया था. बताया जा रहा है कि इस प्रोटेस्ट को लेकर आरएसएस नेता कलादकर प्रभाकर भट्ट को फेसबुक पर धमकी मिली थी. इससे माहौल और खराब हो गया. शरद पर हुए हमले को लेकर जब विरोध प्रदर्शन हुआ तो पुलिस ने तकरीबन 30 लोगों को हिरासत में लिया था. इनमें बीजेपी सांसद शोभा करनडलाजे और नलिन कुमार कतिल भी शामिल थे. इन लोगों पर हिंसा के लिए भड़काने का आरोप था.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक आरएसएस कार्यकर्ता शरद मादीवाला संघ की शाखा में फिजिकल ट्रेनिंग दिया करते थे. 4 जुलाई की रात को उनपर उस वक़्त हमला हुआ था, जब वह बीसी रोड पर अपनी लाउंड्री शॉप से घर लौट रहे थे. ज़ख़्मी होने पर पास में फल बेचने वाले अब्दुल रऊफ, शरद मादीवाला को हॉस्पिटल लेकर पहुंचे. इसके बाद हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए. शुक्रवार की रात मादीवाला की मौत हो गई. पुलिस का कहना है कि तीन लोगों ने हमला किया था और वे बाइक पर आए थे.
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए मादीवाला के पिता ने कहा कि उनको पुलिस पर भरोसा नहीं है. उन्हें नहीं लगता कि पुलिस उनके बेटे के कातिल को ढूंढ पाएगी. जब पुलिस पहले के मामलों को ही नहीं सुलझा पाई तो उनके बेटे को न्याय कहां से दिलाएगी?
घटना को लेकर बीजेपी के नेताओं ने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया सरकार ऐसा माहौल बना रही है. इसमें एनआईए को जांच करनी चाहिए. इलाके में काफी दिनों से सांप्रदायिक तनाव है. पुलिस को शक है कि यह घटना भी सांप्रदायिक तनाव से ही जुड़ी हो सकती है. पिछले दो महीनों में चाकूबाजी की काफी घटनाएं सामने आई हैं. यह सब झेलने वालों में बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक दोनों ही तरफ के लोग शामिल हैं. वहां सांप्रदायिक हिंसा होती रहती है, जिसके एक तरफ बजरंग दल, हिंदू जागरण और वीएचपी है तो दूसरी तरफ एसडीपीआई और पीएफआई जैसे मुस्लिम ग्रुप. आरएसएस कार्यकर्ता पर हुए हमले के बाद केरल के रहने वाले एक मुस्लिम छात्र पर भी हमला हुआ. 23 साल का साजिद अपने दोस्‍त नौफल के साथ बाइक पर कहीं जा रहा था, तभी तीन लोगों ने पेट्रोल मांगने की बात कहते हुए उन्हें रस्ते में रोका. जब साजिद और नौफल ने पेट्रोल देने के लिए बाइक रोकी, तभी उनपर धारदार हथियार से हमला कर दिया गया. दोनों को हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया, जहां साजिद की मौत हो गई. इन हमलों के बाद डीसीपी हनुमंत आर्य का कहना था कि दोनों घटनाओं का आपस में कोई संबंध नहीं है. दूसरे हमले के पीछे ड्रग का कारण हो सकता है. मुख्‍यमंत्री सिद्धरमैया कांग्रेस के संबोधन के लिए मंगलुरु में थे. उन्‍होंने सांप्रदयिक सौहार्द को तोड़ने वालों के खिलाफ गंभीर कार्रवाई की चेतावनी दी है. सिद्धारमैया का कहना है कि आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़कर एक्शन लिया जाएगा.
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