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फिल्म 'परासक्ति' में ऐसा क्या है कि कांग्रेस इसे बैन करने की मांग करने लगी?

कांग्रेस का आरोप है कि ‘परासक्ति’ में इंदिरा गांधी से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रमों को तोड़-मरोड़ कर दिखाया गया है.

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फिल्म 10 जनवरी को रिलीज़ हुई है.

तमिलनाडु यूथ कांग्रेस ने एक्टर शिवकार्तिकेयन की हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म ‘परासक्ति’ पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है. संगठन का आरोप है कि इस फिल्म में कांग्रेस से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रमों को ‘तोड़-मरोड़ कर’ दिखाया गया है.

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‘परासक्ति’ 1960 के दशक के छात्र आंदोलन और हिंदी विरोधी प्रदर्शनों पर आधारित है. यह फिल्म 10 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी. सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म में 25 कट लगाए हैं और कुछ दृश्यों को काल्पनिक बताया गया है.

यूथ कांग्रेस के नेता अरुण भास्कर ने आरोप लगाया कि फिल्म में यह झूठा संदेश दिया गया है कि उस समय डाकघर के फॉर्म केवल हिंदी में ही भरे जा सकते थे. उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से मनगढ़ंत बात है और इसका मकसद कांग्रेस की छवि खराब करना है.

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भास्कर ने खास तौर पर 1965 के भाषा विवाद से जुड़े एक दृश्य पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि 1965 में कांग्रेस सरकार ने कभी यह आधिकारिक घोषणा नहीं की थी कि सभी राज्यों में डाकघर के फॉर्म केवल हिंदी में ही भरे जाएंगे. उनके मुताबिक, यह दृश्य जानबूझकर पार्टी को बदनाम करने के लिए गढ़ा गया है.

उन्होंने फिल्म के एक अन्य दृश्य पर भी सवाल उठाए, जिसमें शिवकार्तिकेयन को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मिलते हुए दिखाया गया है, जहां वह हिंदी थोपे जाने का विरोध करते हैं. भास्कर के मुताबिक इसके बाद इंदिरा गांधी के कैरेक्टर को नकारात्मक तौर पर पेश किया जाता है. भास्कर ने कहा कि इंदिरा गांधी 12 फरवरी, 1965 को ना तो कोयंबटूर गई थीं और और ना ही उस दिन ऐसी कोई मुलाकात हुई थी. उन्होंने इस दृश्य को पूरी तरह काल्पनिक बताया.

भास्कर ने एक और दृश्य पर आपत्ति जताते हुए कहा कि फिल्म में इंदिरा गांधी के सामने एक जलती हुई ट्रेन गिरती हुई दिखाई गई है, जो पूरी तरह निराधार और वास्तविकता से परे है. उनके अनुसार, इसका इतिहास से कोई संबंध नहीं है.

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उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म में गलत तरीके से दिखाया गया है कि 12 फरवरी, 1965 को इंदिरा गांधी कोयंबटूर आई थीं, उनकी मौजूदगी में ट्रेन जलाने की घटना हुई और वह हिंदी विरोध के खिलाफ हस्ताक्षर स्वीकार करती हैं. भास्कर के मुताबिक, इतिहास में ऐसी कोई भी घटना कभी नहीं हुई.

फिल्म के क्लाइमैक्स पर भी उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई. भास्कर ने कहा कि अंत में इंदिरा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री और के. कामराज की असली तस्वीरें दिखाई जाती हैं और कांग्रेस पर पोलाची में 200 से ज्यादा तमिल लोगों की गोली मारकर हत्या करने का आरोप लगाया जाता है. उन्होंने कहा कि इतने गंभीर आरोप के समर्थन में कोई भी सबूत मौजूद नहीं है.

भास्कर ने फिल्म की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ‘परासक्ति’ इतिहास को जानबूझकर बिगाड़ने की कोशिश है और इस पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए. उन्होंने मांग की कि ऐसे सभी दृश्यों को हटाया जाए और फिल्म की निर्माण टीम सार्वजनिक रूप से माफी मांगे. भास्कर ने चेतावनी दी कि अगर फिल्म नहीं हटाई गई और माफी नहीं मांगी गई, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

अपने बयान के अंत में उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से इस मुद्दे के खिलाफ आवाज़ उठाने और विरोध प्रदर्शन करने की अपील की.

‘परासक्ति’ का निर्देशन सुधा कोंगारा प्रसाद ने किया है. इस फिल्म में शिवकार्तिकेयन, रवि मोहन, अथर्वा और श्रीलीला मुख्य भूमिकाओं में हैं. 

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