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सुप्रीम कोर्ट ने मुख़्तार अंसारी की सज़ा पर रोक लगा दी, जेलर पर बंदूक़ तानने का मामला था!

कोर्ट ने कहा, "आपको मालूम होना चाहिए कि रुकना कब है."

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तस्वीर - पूर्व विधायक मुख़्तार अंसारी

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने 21 सितंबर, 2022 को जेलर पर पिस्तौल तानने के मामले में मुख़्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) को 7 साल की सज़ा सुनाई थी. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस फ़ैसले पर रोक लगा दी है.

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क्या है केस?

आजतक से जुड़े कुमार अभिषेक की रिपोर्ट के मुताबिक़, जून 2003 में जेलर एसके अवस्थी ने लखनऊ के आलमबाग थाने में मुख़्तार के ख़िलाफ़ एक FIR दर्ज कराई थी. आरोप लगाए थे कि जेल में मुख़्तार अंसारी ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी. दरअसल, मुख़्तार जेल में बंद थे और चूंकि वो विधायक थे, तो लोग उनसे मिलने के लिए आते रहते थे. तब जेलर एस के अवस्थी ने आने वाले लोगों की तलाशी लेने के आदेश दिए. इसी आदेश को लेकर एस के अवस्थी ने आरोप लगाए थे कि मुख़्तार ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी. उनके साथ गाली-गलौज की और उन पर पिस्तौल तक तान दी थी.

इसके बाद, एस के अवस्थी ने FIR दर्ज कराई. IPC की धारा 353 (पब्लिक सर्वेंट के काम में बाधा डालना), 504 (इरादतन किसी को अपमानित करना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया था. मामले का फ़ैसला आया 2020 में. लखनऊ की एक ट्रायल कोर्ट ने मुख़्तार को बरी कर दिया.

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इसके तुरंत बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर दी. लखनऊ बेंच के जस्टिस दिनेश कुमार सिंह ने राज्य सरकार की अपील मान ली और सुनवाई के बाद कोर्ट ने मुख़्तार अंसारी को इस मामले में दोषी क़रार दिया है. हाई कोर्ट ने कहा कि सबूतों का मूल्यांकन करने में निचली अदालत का दृष्टिकोण साफ़ तौर पर ग़लत था.

इसके बाद मुख़्तार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील डाल दी.

'आपको पता होना चाहिए रुकना कब है'

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आई ऑडिटर जनलर गरिमा प्रसाद ने बेंच को बताया कि हाई कोर्ट ने फ़ैसले को पलटने के बारे में विस्तार से जानकारी दी है. इस पर अंसारी की के वक़ील कपिल सिब्बल ने कहा कि उच्च न्यायालय का आदेश क़ानून की नज़र से ख़राब है और कहा कि अपील की सुनवाई होने तक सज़ा पर रोक लगाई जानी चाहिए. सिब्बल के तर्क के ख़िलाफ़ गरिमा प्रसाद ने कहा,

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"सज़ा पर रोक लगाना न्याय का माखौल उड़ाना होगा क्योंकि बहुत सारे मामले कोर्ट में लंबित हैं."

हालांकि, बेंच ने गरिमा प्रसाद से कहा कि वे नोटिस जारी कर रहे हैं और सज़ा पर रोक लगा रहे हैं. और कहा, "आपको मालूम होना चाहिए कि रुकना कब है."

पूर्व बसपा विधायक मुख़्तार अंसारी अभी बांदा जेल में बंद हैं. 
 

वीडियो: मुख्तार अंसारी, जो सिस्टम से 'खेलते-खेलते' खत्म हो गया!

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