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सनी देओल के बेटे ने बचपन में जो झेला, किसी बच्चे को न झेलना पड़े

28 साल के हैं करण देओल.

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करण देओल, अपने पिता एक्टर सनी देओल के साथ.

सनी देओल के बेटे हैं करण देओल. 28 साल के हैं. जल्द ही बॉलीवुड में डेब्यू करने वाले हैं. 'पल-पल दिल के पास' फिल्म रिलीज़ होने वाली है. इन दिनों खबरों में हैं. फिल्म को लेकर नहीं, बल्कि स्कूल लाइफ के एक्सपीरियंस को लेकर.

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करण के बचपन की तस्वीर. फोटो- ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे का इंस्टाग्राम पोस्ट.
करण के बचपन की तस्वीर. फोटो- ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे का इंस्टाग्राम पोस्ट.

दरअसल, करण देओल ने अपने बचपन के एक्सपीरियंस को शेयर किया है. उन्होंने बताया कि किस तरह स्कूल में परेशान किया जाता था. सनी देओल का बेटा होने की वजह से लोग उन्हें तंग करते थे. ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे ने करण का एक पोस्ट सोशल मीडिया पर डाला है. इसमें करण ने बताया,

'स्कूल की मेरी पहली याद तब की है, जब मैं फर्स्ट ग्रेड में था. स्पोर्ट्स कॉम्पिटिशन चल रहा था और मैंने रेस में हिस्सा लिया था. मैं वहां खड़ा था कि तभी कुछ बड़े लड़के वहां आ गए. मुझे घेर लिया. उनमें से एक ने मुझे उठाया और हर किसी के सामने मुझे पटक दिया. फिर मुझसे पूछा 'क्या तुम्हें यकीन है कि तुम सनी देओल के बेटे हो? तुम तो पलटकर लड़ भी नहीं सकते'. मैं बहुत शर्मिंदा हुआ.

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वहां से मेरी राह और भी मुश्किल हो गई. ज़्यादातर बच्चे या तो मुझे जज करते या फिर मेरा मज़ाक बनाते. और यहां तक की टीचर्स भी ऐसे ही थे. एक बार जब मैंने असाइनमेंट में ठीक से काम नहीं किया, तब भरी क्लास से बीच में एक टीचर मेरे पास आए और कहा, 'तुम केवल अपने पिता के चेक लिखने के लायक हो, और कुछ भी करने के लायक नहीं हो.' इन सबके बीच केवल मेरी मां मेरा सपोर्ट रहीं. वो मुझसे कहती रहीं, 'वो लोग ऐसी बातें इसलिए कह रहे हैं क्योंकि वो लोग असल में ऐसे ही हैं. ये तुम्हारे बारे में कुछ नहीं कहता.' और मां की यही बात मुझे हौसला देती रही. मुश्किल था, लेकिन मुझे मेरे लिए खड़ा होना था. मुझे हार मानने की जगह जवाब देना था. मुझे ये समझना था कि मेरे अलावा कोई और ये फैसला नहीं कर सकता कि मेरी कीमत क्या है.

मुझे लगता है कि मेरी लाइफ का टर्निंग पॉइंट वो था जब स्कूल में टैलेंट कॉम्पिटिशन हुआ. और मैंने उसमें पार्ट लेने का फैसला किया. मैंने महसूस किया कि ये खुद को साबित करने का मौका है. रैप तैयार करने के लिए मैंने कई रात मेहनत की. क्योंकि मैं जानता था कि केवल इसमें ही मैं अच्छा कर सकता हूं. मुझे याद है कि उस दिन जब मैं स्टेज पर पहुंचा, तब लोगों की आंखों का समुद्र मेरी तरफ देख रहा था.

मैंने गहरी सांस ली. और दिल से परफॉर्म किया. इतने साल तक लोग मुझे तंग करते रहे, मेरी केवल एक ही पहचान थी कि मैं सनी देओल का बेटा हूं, ये सब कुछ उस वक्त बाहर आ गया जब मैं स्टेज पर था. ऑडियंस मेरे लिए चियर कर रही थी. मैंने खुद को आज़ाद महसूस किया. मैं आखिरकार बेड़ियों से आज़ाद हो गया था.

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वक्त लगा, लेकिन उस पल ने मेरी ज़िंदगी बदल दी. मैंने महसूस किया कि कई बार खुद की लाइफ बेहतर बनाने के लिए आपको लोगों की नहीं, हालातों की नहीं, बल्कि खुद पर विश्वास की ज़रूरत होती है. खुद को खुद की नज़र से देखने की ज़रूरत होती है, न कि दूसरों की नज़रों से. तुम किसी ढांचे में ढलने के लिए नहीं बने हो. तुम खुद की पहचान बनाने के लिए बने हो. ऐसी पहचान जो दूसरों से अलग है.'


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ये सारा एक्सपीरियंस करण देओल का है. स्कूल में उन्हें 'सनी देओल के बेटे' होने की वजह से बहुत कुछ झेलना पड़ा.



वीडियो देखें:

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