हुआ ये कि शनिवार का दिन था. पुरुलिया के रहने वाले उल्लास चौधरी स्कूल जा रहे थे. मास्टर साब ने स्कूल जल्दी पहुंचने के लिए शॉर्टकट लिया था. उस रास्ते से उन्हें एक बच्ची की रोने की आवाज सुनाई दी. वो उसे फॉलो करते हुए उस जगह जा पहुंचे जहां बच्ची पड़ी थी. उन्होंने देखा कि चार कुत्ते किसी चीज के चारों तरफ घूम रहे हैं. थोड़ा और अंदर जा कर देखा तो उनके होश उड़ गए. गुलाबी रंग के चिथड़े में लिपटी एक बच्ची वहां पड़ी थी. मुश्किल से 7-8 दिन की रही होगी. कौवे उसपर मंडरा रहे थे. और वो कुत्ते घूम-घूम कर उन्हें हटा रहे थे ताकि बच्ची तक वो पहुंच न पाएं. मास्टर साब को देखकर कुत्ते पूंछ हिलाने लगे. सात में भौंकना भी शुरू कर दिया और बाद में फिर बच्ची को घेरकर बैठ गए.टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, उल्लास ने फौरन इसकी खबर गांव वालों को दी. लोग इकठ्ठे हुए. प्रवीण सेन, मास्टर साब के पड़ोसी हैं. उन्होंने उस बच्ची को उठाया और उसे दूध पिलाया. बच्ची ने रोना बंद कर दिया. शायद उसे भूख लगी थी. सबसे दिलचस्प ये था कि वो चारों कुत्ते गांव वालों के साथ पीछे-पीछे उनके घर तक गए. गांव वालों ने पुलिस को भी इस बात की जानकारी दी. पुलिस ने जानकारी चाइल्ड हेल्पलाइन को बढ़ा दी. फिलहाल बच्ची पुलिस की कस्टडी में है. वो उसे देबेन महतो सदर हॉस्पिटल में ले गए. जहां डॉक्टरों ने जांच कर बताया कि बच्ची कोई 7 से 10 दिन पहले ही पैदा हुई है. और ठीक-ठाक है. वो वहीं एडमिट है. मास्टर साब ने बच्ची को सानिया नाम दिया है. क्योंकि वो शनिवार को बचाई गई है. उल्लास कहते हैं, 'अगर कुत्ते नहीं होते तो शायद बच्ची मिल भी नहीं पाती.' चाइल्ड हेल्पलाइन के कॉर्डिनेटर दिपांकर सरकार ने कहा है कि हॉस्पिटल से छूटने के बाद बच्ची को एडॉप्शन होम में भेज दिया जाएगा.
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