बस इनकी अनलोडिंग और कस्टम क्लियरेंस में एक हफ्ते लगेंगे. कस्टम क्लियरेंस हो जाए फिर बरेली जंक्शन के पास इज्जतनगर वर्कशॉप पर डिब्बे भेजे जाएंगे. यहां पर टाल्गो कंपनी के इंजीनियर डिब्बों पर औजार-वौजार, मशीनें-वशीनें लगाएंगे. फिट-फाट करेंगे. इसके बाद बरेली और मुरादाबाद के बीच टाल्गो कंपनी की सेमी-हाईस्पीड ट्रेन का ट्रॉयल शुरू हो जाएगा.
जो बातें आपको जाननी ही चाहिए
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टाल्गो कंपनी 70 साल से रेलगाड़ी बना रही है .
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कंपनी की सेमी हाई स्पीड ट्रेन 160-250 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से चलती हैं. ये वाली सेमी हाई स्पीड ट्रेन ही हैं.

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इनकी हाई स्पीड ट्रेन 350 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से दौडती हैं.
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कंपनी ने डिब्बे अपने खर्चे पर भेजे हैं, क्योंकि उसे अपनी टेक्नीक हम लोगों को दिखानी थी.

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9 डिब्बों को यहां पहुंचाने में टाल्गो के 35 करोड़ खर्च हुए हैं.
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टाल्गो के डिब्बों में ख़ास ये है कि तीखे मोड़ों पर भी ट्रेन स्पीड में चल सकती है, बिना पलटे.

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इंडियन ट्रेनों के मुकाबले इसमें आधे पहिए होते हैं. अगर यहां डिब्बे का वजन 68 टन होता है तो टाल्गो वाले का 16 ही होगा.
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20 मई से ट्रेन बरेली-मुरादाबाद दौड़ेगी. बरेली ट्रॉयल पूरा होने के बाद जून के पहले हफ्ते में मथुरा और पलवल के बीच 93 किलोमीटर के ट्रैक पर टाल्गो का ट्रॉयल शुरू होगा.

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शताब्दी ट्रेनों की एवरेज स्पीड 80 किलोमीटर प्रति घंटा रहती है. टाल्गो वाली ट्रेन में 130 किलोमीटर प्रति घंटा रहा करेगी.
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इस हिसाब से अगर आपको मुंबई से नई दिल्ली ट्रेन से 1380 आना है तो आप लगभग साढ़े दस घंटे में पहुंच जाओगे.

















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