"सच्चाई छुप नहीं सकती बनावट के उसूलों से, खुशबू आ नहीं सकती कभी काग़ज़ के फूलों से"
सब अफवाह है - जिसने मोदी जी का सूट खरीदा, उसने 6000 करोड़ नहीं जमा करवाए
नोटबंदी के दौरान एक और अफवाह.
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फोटो - thelallantop
नोट बंद हैं. लेकिन फ़ेसबुक और व्हाट्सैप खुला है. वहां कोई पाबन्दी नहीं है. कोई मनाही नहीं है. अफवाह जितनी फैलानी है, फैलाओ. वहां तो ये भी शर्त नहीं है कि एक अफवाह फ़ैलाने के बाद उंगली पर निशान छोड़ दिया जायेगा. जिससे आप दूसरी अफवाह न फैला पाएं. हुआ ये कि पिछले दो दिनों से हर जगह ये खबर चल रही थी कि वो हज़रात, जिन्होंने मोदी जी का सूट 4.3 करोड़ रुपये में खरीदा था, उन्होंने बैंक में 6000 करोड़ रुपये जमा करवाए हैं. लालजी पटेल फ्रॉम सूरत. हीरा कारोबारी. इन्होंने ही नरेंद्र मोदी का सूट 4.3 करोड़ रुपये में खरीदा था. और अपना नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज करवाया था. कहा जाने लगा कि किसी आदमी ने बैंक में 6000 करोड़ रुपये जमा करवाए हैं. किसी ने कह दिया कि ये वही आदमी है, जिसने मोदी का सूट खरीदा था. और बस, चल पड़ी हवा. अफवाह युक्त हवा. इससे पहले कि मामला संभल पाता, जनता को विश्वास हो चला था कि लालजी पटेल ने बैंक में 6000 करोड़ रुपये जमा करवाए हैं. ये भी कहा गया कि लालजी पटेल को टैक्स और जुर्माने के रूप में 5400 करोड़ रुपये चुकाने पड़ेंगे. जब लालजी पटेल से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं है. उन्होंने न सिर्फ़ इन सभी बातों को सिरे से नकार दिया बल्कि ऐसी अफवाह उड़ाने वालों के खिलाफ़ कार्रवाई की बात भी कही. गजब बात तो ये कि कई न्यूज़पेपर्स ने भी इस खबर को छाप दिया था. बिना ये जाने कि बात सच भी है या नहीं. भला हो 'आज तक' का जो उन्होंने लालजी पटेल को कॉल करके सच्चाई पता कर ली. और इन पंक्तियों में हमारे विश्वास को और भी गाढ़ा कर दिया -
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