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बेंगलुरु के इंजीनियर को डिजिटल अरेस्ट कर ऐंठ लिए 12 करोड़ रुपये, 18 दिनों तक चला टॉर्चर

पुलिस का कहना है कि इस मामले में जितने रुपये दिए गए हैं, वो इस तरह की धोखाधड़ी में होने वाली आम राशि से कहीं ज़्यादा हैं. पुलिस ने बताया कि पीड़ित इंजीनियर के साथ ये पूरा खेल 11 नवंबर को शुरू हुआ. डिजिटल लुटेरों ने पीड़ित को 18 दिनों तक अपने जाल में फंसाकर रखा.

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सांकेतिक तस्वीर.

बेंगलुरू में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को डिजिटल अरेस्ट करके उससे 18 दिनों में कथित तौर पर 11.8 करोड़ रुपये लूट लिए गए. 39 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने 12 दिसंबर को उत्तर-पूर्व CEN पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने दावा किया कि धोखाधड़ी 25 नवंबर से 12 दिसंबर के बीच हुई. इस केस में उगाही के खेल को कैसे रचा गया, पुलिस ने इसकी पूरी कहानी बताई है.

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस का कहना है कि इस मामले में जितने रुपये दिए गए हैं, वो इस तरह की धोखाधड़ी में होने वाली आम राशि से कहीं ज़्यादा हैं. पुलिस ने बताया कि पीड़ित इंजीनियर के साथ ये पूरा खेल 11 नवंबर को शुरू हुआ. उसे एक व्यक्ति का फ़ोन आया जिसने खुद को भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) का अधिकारी बताया. उसने फोन करके कहा कि पीड़ित के आधार से जुड़े सिम कार्ड का इस्तेमाल अवैध विज्ञापनों और अन्य गतिविधियों के लिए किया गया था. फिर उसने कहा कि इस संबंध में मुंबई के कोलाबा साइबर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है.

कुछ समय बाद ही एक दूसरे शख्स ने पीड़ित इंजीनियर को फोन किया और खुद को पुलिस अधिकारी बताया. उसने आरोप लगाया कि पीड़ित के आधार का दुरुपयोग मनी लॉन्ड्रिंग के लिए बैंक खाते खोलने के लिए किया जा रहा है. कॉल करने वाले ने उसे मामले को गोपनीय रखने की चेतावनी दी. और कहा कि इसी तरह के अपराधों के लिए पहले भी कई बड़े लोगों को गिरफ्तार किया गया है. फिर कॉल करने वाले 'नकली पुलिस अधिकारी' ने धमकी दी कि अगर पीड़ित इंजीनियर ने 'वर्चुअल इन्वेस्टीगेशन' में सहयोग नहीं किया तो उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

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कुछ ही देर में एक और कॉलर ने पीड़ित को स्काइप ऐप डाउनलोड करने को कहा. वर्दी पहने एक फर्जी मुंबई पुलिसकर्मी ने पीड़ित को वीडियो कॉल किया और आरोप लगाया कि व्यवसायी नरेश गोयल ने पीड़ित के आधार का उपयोग करके 6 करोड़ रुपये के लेन-देन के लिए केनरा बैंक में खाता खोला है.

इसके बाद 25 नवंबर को एक 'वरिष्ठ पुलिस अधिकारी' ने पीड़ित इंजीयर से स्काइप पर संपर्क किया और दावा किया कि मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हो रही है. इसके बाद कथित तौर पर जालसाजों ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के फर्जी दिशा-निर्देशों का हवाला दिया और वेरिफिकेशन के लिए अपने बताए खाते में रुपये ट्रांसफर करने के लिए राजी कर लिया. उसने धमकी दी कि अगर वह ऐसा नहीं करता है तो वह उसके परिवार को गिरफ्तार कर लेगा.

गिरफ्तारी और अन्य धमकियों के डर से पीड़ित ने पहले एक खाते में 75 लाख रुपये ट्रांसफर किए. उसके बाद दूसरे खाते में 3.41 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए. 12 दिसंबर तक, उसने कथित तौर पर जालसाजों के अलग-अलग खातों में कुल 11.8 करोड़ रुपये भेजे. जब लुटेरों की मांग इतने पर भी खत्म नहीं हुई, तो पीड़ित को एहसास हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है. और तब उन्होंने पुलिस से संपर्क किया.

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पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिसमें धारा 318 (धोखाधड़ी) और 319 (नकली पहचान के जरिये धोखा देना) शामिल है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल 30 नवंबर तक बेंगलुरु में ही साइबर अपराधियों ने 1,806 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया है. हालांकि, 2023 की तुलना में मामलों की संख्या में कमी आई है, लेकिन पीड़ितों ने पिछले साल की तुलना में 168 प्रतिशत अधिक राशि गंवा दी है. हर दिन साइबर अपराधों में 5.40 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आई है. पुलिस के अनुसार, कुल 1,806 करोड़ रुपये के नुकसान में से 611 करोड़ रुपये वाले खाते फ्रीज कर दिए गए हैं और 122 करोड़ रुपये बरामद किए गए हैं. साइबर अपराध के सिलसिले में बेंगलुरु शहर पुलिस द्वारा की गई यह सबसे बड़ी वसूली है.

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