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बांग्लादेश में 10 सेक्युलर मार दिए गए, 74 बाकी हैं

बांग्लादेश में इस्लाम के खिलाफ लिखिए और मारे जाइए.

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नजीमुद्दीन समाद.
बांग्लादेश में धर्म के खिलाफ लिखिए और मारे जाइए.
लॉ स्टूडेंट नजीमुद्दीन समाद की उनके एक फेसबुक पोस्ट की वजह से हत्या कर दी गई. उसकी उम्र थी 28 साल.  पिछले तीन साल में यह अपनी तरह की 10वीं घटना है.
नजीमुद्दीन ढाका की जगन्नाथ यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे. यूनिवर्सिटी के पास एक भीड़-भाड़ वाली सड़क पर बुधवार को कुछ लोगों ने उन पर हमला कर दिया.
ढाका पुलिस के मुताबिक, बुधवार रात कम से कम चार हमलावरों ने नजीमुद्दीन के सिर पर छुरे से वार किए. जब वह गिर गया तो उनमें से एक ने उसे एकदम करीब से गोली मार दी. उसकी मौके पर ही मौत हो गई. बांग्लादेशी अखबार 'द ढाका ट्रिब्यून' के मुताबिक, हमलावरों ने 'अल्लाह-हू-अकबर' के नारे लगाए.
पुलिस का कहना है कि यह निशाना बनाकर की गई हत्या है, लेकिन किसी ग्रुप ने अब तक इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है. पुलिस इसकी जांच कर रही है कि क्या नजीम का लेखन उसकी हत्या की वजह बना.
नजीमुद्दीन.
नजीमुद्दीन.
2014 में 'डिफेंडर्स ऑफ इस्लाम' नाम के एक संगठन ने 84 बांग्लादेशियों की हिट लिस्ट बनाई थी. इनमें से ज्यादातर सेक्युलरिस्ट थे. इसमें नजीमुद्दीन समाद का भी नाम था. नजीम समेत इस लिस्ट के 10 लोगों की हत्या की जा चुकी है और कई पर हमले हुए हैं. यह लिस्ट बांग्लादेश के गृह मंत्रालय के पास भी है.
नजीमुद्दीन फेसबुक पर स्टेट रिलीजन (इस्लाम) और बांग्लादेशी संविधान की आलोचना करते थे. फेसबुक पर अपने रिलिजियस व्यूज में उन्होंने लिखा है, 'मेरा कोई धर्म नहीं है.' वह लिखते हैं, 'इवॉल्यूशन एक वैज्ञानिक सच है. धर्म और नस्ल हिंसक और असभ्य लोगों के अविष्कार हैं.'
बांग्लादेश का स्टेट रिलीजन इस्लाम है. देश के सेक्युलर एक्टिविस्टों ने हाल ही में हाई कोर्ट में अर्जी देकर देश के औपचारिक धर्म के स्टेटस को चैलेंज किया था. पर कोर्ट ने इस अर्जी को खारिज कर दिया. मुस्लिम बहुल बांग्लादेश में इस अर्जी से पॉलिटिकल तनाव बढ़ने की आशंका थी.
बांग्लादेश के खराब माहौल का अंदाजा नजीम की फैमिली को था. इसलिए महीने भर पहले ही उन्होंने नजीमुद्दीन से कहकर उसका फेसबुक अकाउंट डिएक्टिवेट कर लिया था.
नजीम सिर्फ दो महीने से ढाका में रह रहा था. वह सिलहट में ज्यादा रहा था और उसके परिवार के ज्यादातर लोग लंदन में रहते हैं. बताया जाता है कि नजीमुद्दीन एक सेक्युलर कैम्पेनिंग ग्रुप 'गंगा जागरण मंच' का ऑर्गनाइजर भी थे.

84 की हिटलिस्ट में से इनकी हो चुकी है हत्या

1. आसिफ मोहियुद्दीन: 15 जनवरी 2013. ढाका की मोतीझील के पास चाकू से गोदकर.
2. रजीब हैदर: 15 फरवरी 2013. ढाका के मीरपुर में छुरे से वार करके.
3. सुन्नयूर रहमान: 7 मार्च 2013 की रात. छुरे से कई वार करके.
4. शफीउल इस्लाम: 15 नवंबर 2014. धारदार हथियारों से हमला किया गया. 'अंसार अल-इस्लाम बांग्लादेश-2' ने जिम्मेदारी ली.
5. अविजित रॉय: 26 फरवरी 2015. मशहूर पाकिस्तानी ब्लॉगर अपनी बीवी के साथ बुक फेयर से साइकल-रिक्शा से लौट रहे थे. धारदार हथियार से दोनों पर हमला किया गया. अविजित की मौत हो गई, लेकिन उनकी बीवी बच गईं.
6. ओयासिकुर रहमान: 30 मार्च 2015. हमले से थोड़ी दूर पर दो संदिग्धों को पकड़ा गया. उनके पास मांस काटने वाले छुरा बरामद हुआ. उन्होंने कहा कि रहमान को इसलिए मारा क्योंकि वह इस्लाम विरोधी बातें लिखते थे. वे दोनों अंसारउल्लाह बांग्ला टीम के मेंबर थे. इस घटना को अंजाम देने से पहले उन्हें 15 दिन की ट्रेनिंग दी गई थी.
7. अनंता बिजॉय दास: 12 मई 2015. नास्तिक थे अनंता. सिलहट में मार डाले गए.
8. निलॉय नील: पूरा नाम, नीलाद्रि चट्टोपाध्याय निलॉय. 7 अगस्त 2015 को कत्ल कर दिए गया. ढाका के गोरान इलाके में छुराधारी 6 लोगों ने हमला किया था.
9. फैजल दिपान: 43 साल के फैजल जागृति प्रकाशनी चलाते थे. उन्होंने अविजित रॉय का लिखा छापा था. 31 अक्टूबर 2015 को ढाका में मार डाले गए.
10. नजीमुद्दीन समाद: 7 अप्रैल 2016.
बांग्लादेश का पहला संविधान 1971 में बना था. इसमें सेक्युलरिज्म और सोशलिज्म को एक अहम सिद्धांत माना गया था. लेकिन 1988 में संविधान को संशोधित करके इस्लाम को राज्य का ऑफिशियल धर्म बना दिया गया.
बांग्लादेश में इस वक्त खालिदा जिया की सरकार नहीं है, जो कट्टरपंथी इस्लामी ताकतों से समर्थन लेती हैं.  बल्कि मुल्क की प्रधानमंत्री शेख हसीना हैं, जिनके पिता बांग्लादेश के (सेक्युलर) फादर कहे जाते हैं. हिंसक इस्लामिस्ट जबड़ों से बांग्लादेश को बचाने का बड़ा चैलेंज उन्हीं के जिम्मे है. मूर्ख हत्यारों को लगता है अल्लाह-ताला जन्नत में उन्हें हूरें देंगे. और इसके लिए वे इस देखी-दिखाई दुनिया में लानतें पा रहे हैं.

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