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कोर्ट का वक्त बरबाद करने पर 25 लाख का जुर्माना

दो कंपनियां केस को च्युइंग गम की तरह बढ़ा कर 18 साल घसीट ले गईं. सुप्रीम कोर्ट ने 25-25 लाख का जुर्माना ठोक दिया.

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फोटो - thelallantop
सुप्रीम कोर्ट ने उन रईसों की कर्री फटकार लगाई है जो फिजूल में कोर्ट का समय बर्बाद करने पहुंच जाते हैं. कोर्ट ने दो कम्पनियों, Griesham Gmbh और Goyal Gas Ltd. पर इसी चक्कर में 25-25 लाख का जुर्माना ठोक दिया है. शेयर ट्रांसफर के एक केस को इन दोनों कम्पनियों ने 18 साल तक खींच दिया. जबकि इसमें काफी समय बचाया जा सकता था.  इनका केस 1998 से चल रहा था. पहले केस को इन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में लड़ा, फिर दिल्ली हाई कोर्ट और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में घसीट लिया. कॉरपोरेट्स के पास लीगल एडवाइजर्स की फौज रहती है. वो अपनी हर एडवाइस मालिक के कान में फूंकने की कोशिश करते हैं. कोई नोटिस मिला नहीं कि झट से उसको चैलेंज कर आते हैं कोर्ट में. लोअर कोर्ट में बात नहीं बनी तो हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच जाते हैं. इनका तो काम ही यही है. इनके चक्कर में कोर्ट के सीरियस मामले पेंडिंग रह जाते हैं. अभी अपने देश में 2 करोड़ केस पेंडिंग हैं वो भी सिर्फ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में. हर दस में से एक केस दस साल तक पेंडिंग रह जाता है. ऐसा नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड ने एक रिपोर्ट में बताया है और हमने फर्स्ट पोस्ट पर पढ़ा है. इसी रिपोर्ट में जज-केस रेशियो के बारे में और भी बाते हैं –
इंडिया में 73,000 लोगों के लिए एक जज हैं. एक जज एक महीने में करीब 43 केस निबटा पाते हैं और हर जज पर अभी 1350 केस का भार है. अभी जिस रेट से इन केसों का निबटारा होता है, उसके हिसाब से सारे सिविल केस कभी खत्म नहीं हो पाएंगे. सारे क्रिमिनल केस को निबटाने में 30 साल लग जाएंगे.
जब हमारे ज्यूडिशियल सिस्टम पर इतना लोड है, तो कॉरपोरेट को थोड़ा कॉपरेट करना चाहिए. वर्ना सुप्रीम कोर्ट तो भड़केगा ही. और ऐसे ही लाखों की चुंगी लगेगी.
स्टोरी दी लल्लनटॉप के साथ इंटर्नशिप कर रही आकांक्षा ने एडिट की है.  

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