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IAF महिला अफसरों को मिली 12 बरस बाद जीत, अब मिलेगी ये सुविधा

पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा बहाली तो नहीं होगी.

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सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के पक्ष में सुनाया फैसला (फोटो- आज तक)

भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) की 32 महिला अफसरों को सुप्रीम कोर्ट ने बहुत बड़ी राहत दी है. वायुसेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) पर काम कर चुकी इन महिलाओं को अब 20 साल की सर्विस के बराबर पेंशन मिलेगी. ये महिलाएं अपनी सर्विस को पांच साल बढ़ाए जाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही थीं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इनको बहाल तो नहीं किया जा सकता है लेकिन उन्हें पेंशन का लाभ दिया जा सकता है.

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भारतीय वायुसेना की ये महिला अधिकारी पिछले 12 साल से कानूनी लड़ाई लड़ रही थी. चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली व जेबी पारदीवाला की बेंच ने केंद्र सरकार से कहा है कि अगर शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) की ये महिला अधिकारी स्थायी कमीशन के लिए योग्य पाई जाती हैं तो उन्हें पेंशन लाभ दिए जाने पर विचार किया जाना चाहिए. बेंच ने कहा कि ये महिलाएँ 2006 से 2009 के बीच रिटायर हो चुकी हैं इसलिए इन्हें नौकरी में बहाल नहीं किया जा सकता है. अदालत ने कहा है कि सेना में नौकरी करने के पैमाने जैसे फिटनेस आदि को देखते हुए बहाली करना ठीक नहीं होगा. 

कोर्ट ने कहा कि भारतीय वायु सेना इन महिला अधिकारियों की उपयुक्तता की जांच करेगी. अगर इन महिलाओं को इसके लिए योग्य माना जाएगा तो एचआर पॉलिसी, 2010 के आधार पर इन्हें पेंशन लाभ दिया जाएगा. लेकिन कोर्ट ने कहा कि इन अधिकारियों को सैलरी पर एरियर का लाभ नहीं दिया जाएगा. कोर्ट ने इसके लिए सरकार को तीन महीने का समय दिया है. कोर्ट ने कहा,

“पेंशन लाभ उस तारीख तक दिया जाएगा जिस तारीख को ये अधिकारी 20 साल की सर्विस पूरी कर चुकी होंगी.”

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सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला 2020 के बबिता पूनिया केस के आधार पर सुनाया है. बबिता पूनिया केस में कहा गया था कि भारतीय सेनाओं की भर्ती प्रक्रिया महिलाओं के लिए भेदभावपूर्ण है. महिलाओं को सेना में कई पदों से बाहर रखा जाता है. इस फैसले ने भारत की सेना में महिला अधिकारियों की भर्ती को बढ़ावा दिया. अब महिला अधिकारी सेना में पूरे समय तक नौकरी कर सकती हैं. पहले उन्हें सिर्फ 10 से 14 साल के लिए ही भर्ती किया जाता था.

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