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क्या चीन का डिप्लोमा रखने वाले तजिंदर पाल सिंह बग्गा 12वीं पास नहीं हैं?

ट्रोलिंग से लेकर BJP उम्मीदवारी तक का सफर तय करने वाले बग्गा.

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तजिंदर पाल सिंह बग्गा के ट्विटर पर 6 लाख से ज़्यादा फॉलोवर हैं. तरह-तरह के कैंपेन चलाते रहते हैं. 2014 में नरेंद्र मोदी की उम्मीदवारी को लेकर भी उन्होंने कई कैंपेन चलाए थे. फोटो: Twitter
दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों ने अपना पर्चा दाखिल कर दिया है. बीजेपी ने पहले 57 उम्मीदवारों की लिस्ट ज़ारी की. इसके बाद 10 लोगों की दूसरी लिस्ट आई. इसमें एक नाम फ्लैश हुआ. तजिंदर पाल सिंह बग्गा.
हरि नगर से BJP उम्मीदवार बग्गा 2011 में लाइमलाइट में आए थे. उन्होंने कश्मीर पर बयान को लेकर प्रशांत भूषण पर हमला किया था और कैमरे बग्गा की तरफ घूम गए. इसके बाद भी उनके 'एडवेंचर' ज़ारी रहे. अरुंधति रॉय की बुक लॉन्चिंग में इंडिया हैबिटेट सेंटर में हंगामा किया. फिर कैमरे घूमे.
बग्गा को फल और फूल (कमल) दोनों मिले.
2017 में उन्हें दिल्ली प्रदेश बीजेपी का प्रवक्ता बना दिया गया. ट्विटर पर भयंकर रूप से सक्रिय बग्गा तरह-तरह के कैंपेन चलाते रहते हैं. ट्रोलिंग से लेकर टीशर्ट सेलिंग तक.
फिलहाल, बग्गा का नाम लिस्ट में आने के बाद उनकी डिग्री पर 'भी' विवाद हो गया. उनकी पार्टी के टॉप लीडर की डिग्री पर 'भी' विवाद हुआ था, जिनके साथ बग्गा ने ट्विटर पर डीपी लगा रखी है.
बग्गा की डिग्री को लेकर ट्विटर पर कपिल नाम के शख्स ने ट्वीट किया. कपिल AAP की सोशल मीडिया टीम से जुड़े हैं. उन्होंने लिखा,
BJP उम्मीदवार तजिंदर बग्गा स्कूल ड्रॉप आउट हैं. उन्होंने 12वीं पास नहीं किया है. बग्गा ने अपनी क्वालिफिकेशन में बताया कि वो IGNOU से Bachelor Preparatory Programme कर रहे हैं. ये उन लोगों के लिए है, जिन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी नहीं की है.
इसके लिए उन्होंने बग्गा का एफिडेविट और इग्नू के इस कोर्स का स्क्रीनशॉट लगाया. इसके अलावा कपिल ने बग्गा के एक और कोर्स पर ट्वीट किया. इसमें उन्होंने लिखा,
ये तजिंदर बग्गा की दूसरी सबसे ऊंची शिक्षा है. नेशनल डेवलपमेंट कोर्स. चीन की नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी से. ये तीन हफ्तों का स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम है, जिसे सरकार स्पॉन्सर करती है. इसमें लोगों को चीन के अलग-अलग स्मारकों में घूमना होता है.
एफिडेविट में दो कोर्स का ज़िक्र है
हमने भी बग्गा का एफिडेविट देखा. 16 पेज के इस एफिडेविट में उन्होंने 15वें पेज पर अपनी शिक्षा का ज़िक किया है. पहले नंबर पर उन्होंने इग्नू के इस कोर्स के बारे में बताया है, जिसका ज़िक्र कपिल ने किया. उन्होंने लिखा है, Persuing Bachelor Preparatory Programme from Indira Gandhi National Open University.
इसके अलावा दूसरे नंबर पर नेशनल डेवलपमेंट कोर्स और चीन की मिलिट्री एकेडमी का नाम दिया गया है. उन्होंने Diploma in National Development Course at National Defence University, Republic of China Taiwan in 2017 का ज़िक्र किया है.
बग्गा के एफिडेविट के 15वें पेज पर इस कोर्स का ज़िक्र है.
बग्गा के एफिडेविट के 15वें पेज पर इस कोर्स का ज़िक्र है.

इस कोर्स पर IGNOU क्या कहती है
इग्नू के जिस कोर्स के बारे में कपिल ने ऊपर लिखा है, इग्नू की वेबसाइट
 
पर इसके बारे में पता चलता है. ये एक प्रोग्राम के तहत दो साल का कोर्स है. कोर्स की मिनिमम अवधि 6 महीने है. ये उन स्टूडेंट्स के लिए है, जो इग्नू से ग्रैजुएशन करना चाहते हैं, लेकिन बारहवीं पास नहीं हैं. इग्नू की वेबसाइट पर लिखा है कि ग्रैजुएशन के लिए बारहवीं का सर्टिफिकेट न होने के कारण बहुत से छात्र हायर एजुकेशन से वंचित रह जाते हैं, इसलिए इग्नू Preparatory Programme डिजाइन किया है. ये यूनिवर्सिटी का Enabling Programme है, लेकिन 10+2 (बारहवीं) के बराबर नहीं है. यानी ये कोर्स उन लोगों के लिए है, जिनके पास बारहवीं का सर्टिफिकेट नहीं है.
मतलब बग्गा के जिस कोर्स के बारे में 'आप' की तरफ से कहा गया है, वो बारहवीं के बराबर नहीं है.
IGNOU की वेबसाइट पर इस कोर्स के बारे में जानकारी मिलती है कि ये उन लोगों के लिए जिनके पास 12वीं का सर्टिफिकेट नहीं है. फोटो: IGNOU वेबसाइट
IGNOU की वेबसाइट पर इस कोर्स के बारे में जानकारी मिलती है कि ये उन लोगों के लिए जिनके पास 12वीं का सर्टिफिकेट नहीं है. फोटो: IGNOU वेबसाइट

इसके अलावा कपिल ने तजिंदर पाल सिंह बग्गा के कई ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट्स लगाए हैं, जिसमें वो पढ़ने-लिखने वालों का मज़ाक उड़ाते दिख रहे हैं.     लेकिन...
बग्गा की विवादित हरकतों और राजनीतिक चीज़ों पर उनकी आलोचना हो सकती है. पार्टियों का ये काम भी है, लेकिन उनकी शिक्षा को लेकर मज़ाक नहीं उड़ाया जाना चाहिए, क्योंकि हमारा संविधान किसी भी भारतीय नागरिक को चुनाव लड़ने की ताकत देता है. चुनाव लड़ने के लिए उम्र क्राइटेरिया होती है, आपकी पढ़ाई-लिखाई नहीं. ये संविधान की ताकत है. कई लोगों को ये कमज़ोरी भी लग सकती है. इस विषय पर बहस भी काफी है कि जन प्रतिनिधि को पढ़ा-लिखा होना चाहिए या नहीं.


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