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तीन साल की बच्ची को ऑपरेशन के बाद टांका लगाए बिना छोड़ दिया, अस्पताल के गेट पर मौत हो गई!

परिजन बोले-पैसे जमा नहीं करने पर अस्पताल ने ऐसा किया, आरोपों से अस्पताल ने इंकार किया.

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प्रयागराज में अस्पताल पर पैसों के अभाव में इलाज नहीं करने का आरोप. 3 साल की बच्ची की मौत.
उत्तर प्रदेश का प्रयागराज. यहां एक तीन साल की बच्ची की मौत का मामला सामने आया है. बच्ची ने एक निजी अस्पताल के गेट पर दम तोड़ दिया. परिजन अस्पताल पर पैसे के चक्कर में इलाज नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं. वहीं अस्पताल प्रशासन परिजनों के आरोप को ख़ारिज कर रहा है. इस मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने प्रयागराज के DM से मामले में कार्रवाई की मांग करते हुए 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट मांगी है. क्या है पूरा मामला? इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार शिव नंदन साहु के मुताबिक, प्रयागराज के करेली थाना निवासी मुकेश मिश्रा ने 20 दिन पहले अपनी तीन साल की बेटी खुशी मिश्रा को प्रयागराज के यूनाइटेड मेडिसिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया था. खुशी ने पेट दर्द की शिकायत की थी. आंत में इंफेक्शन बताकर डॉक्टरों ने खुशी का ऑपरेशन किया. कुछ दिनों तक खुशी ठीक रही. लेकिन एक हफ़्ते तक उसके घाव की ड्रेसिंग नहीं की गई. फिर ऑपरेशन वाली जगह पस की समस्या हो गई. इसके बाद डॉक्टरों ने खुशी का दोबारा ऑपरेशन किया. परिवार का आरोप है कि डॉक्टरों ने खुशी को दूसरी बार ऑपरेशन वाली जगह बिना टांका लगाए ही बाहर कर दिया था. परिजन बच्ची को लेकर अलग-अलग अस्पतालों में भटकते रहे. कहीं भर्ती नहीं होने पर वो फिर बच्ची को लेकर इसी हॉस्पिटल आए. लेकिन हॉस्पिटल ने बच्ची को भर्ती करने से मना कर दिया. बच्ची की मौत अस्पताल के गेट पर हो गई. न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, ऑपरेशन के पूरे पैसे यानी करीब पांच लाख नहीं देने की वजह से अस्पताल ने टांके नहीं लगाए. प्रयागराज के जिलाधिकारी भानु चंद्र गोस्वामी ने मामले में अपर जिला अधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी की कमिटी बनाकर जांच के निर्देश दिए हैं. अपर पुलिस अधीक्षक समर बहादुर ने कहा है कि मामले में कानूनी कार्रवाई की जा रही है. वहीं इस पूरे मामले को लेकर NCPCR ने भी प्रयागराज DM को तलब किया है. NCPCR ने मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग करते हुए DM से 24 घंटे के भीतर जवाब भी मांगा है. वहीं इस पूरे प्रकरण पर यूनाइटेड मेडिसिटी हॉस्पिटल के वाइस चेयरमैन सतपाल गुलाटी का भी बयान आया है. न्यूज़ एजेंसी ANI के मुताबिक़, गुलाटी ने कहा है-
"टांका लगाया गया था. मुझे लगता है कि जब वो बच्ची को लेकर किसी दूसरे हॉस्पिटल गए होंगे तब टांका खुल गया होगा या चेक करने के लिए टांका खोला गया होगा. वो बच्ची यहां 15 दिनों तक भर्ती थी. उसका ऑपरेशन हुआ और उसे ऑब्जर्वेशन में रखा गया. उनसे पैसा नहीं लिया गया, क्योंकि वो ग़रीब थे. लेकिन जब उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ तो उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया. उसके परिजन अगले दिन ही उसे यहां से लेकर चले गए."
इसके साथ ही हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. प्रमोद कुमार ने 6 फरवरी को मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया-
"अस्पताल में बच्ची को भर्ती कराए जाने के बाद सही तरीके से इलाज व ऑपरेशन किया गया. दोबारा ऑपरेशन के बाद जब बच्ची की हालत बिगड़ी तब उसे दूसरे अस्पताल के लिए रेफर किया गया. बच्ची के परिजनों ने अस्पताल में लगभग 11 हज़ार रुपये जमा किए थे. रेफर करते समय उन्हें  5 हज़ार रुपये वापस कर दिए गए थे. 5 फरवरी को बच्ची के परिजन जब उसे लेकर अस्पताल गेट पर पहुंचे थे जब उसकी मौत हो चुकी थी. अस्पताल गेट के बाहर बच्ची के पेट में पुलिसकर्मियों के अनुरोध पर अस्पताल के कंपाउंडर ने टांका लगाया था. जिससे शव को पोस्टमॉर्टम के लिए आसानी से भेजा गया."

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