इस बातचीत में यूनिवर्सिटी एनटीयू के प्रेसिडेंट प्रोफेसर एस. सुरेश पीएम मोदी से एक सवाल पूछते हैं. मोदी इस सवाल का जवाब भी दे देते हैं. लेकिन इसके बाद ट्रांसलेटर ने इसका जो अनुवाद किया उसको देखकर लोग इस पूरे प्रोग्राम पर सवाल उठा रहे हैं. कहा जा रहा है कि ये सवाल-जवाब पहले से फिक्स थे.
पहले ये वीडियो देखिए जिसे सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है-
Watch this video in which Modi answer to a question raised by someone also listen to what the Translator translates to. Did Modi miss out a sentence or two which he was supposed to say? Which was later covered by the Translator? Or was his Answer already handed to the translator even before the interview started?
Posted by Unofficial: Subramanian Swamy
on Saturday, June 2, 2018
प्रोफेसर सुरेश ने सवाल पूछा कि आज की थीम 'ट्रासंफोर्मिंग एशिया थ्रू इनोवेशन' है. आपके हिसाब से उज्ज्वल भविष्य के लिए क्या-क्या चुनौतियां हैं? और इन चुनौतियों का कैसे सामने करना चाहिए?
इस पर पीएम मोदी ने जो जवाब दिया वो ऐसे था.
"सुरेश ने मेरे सामने प्रश्न रखा है कि एशिया के उज्ज्वल भविष्य के बीच में कौन सी चुनौतियां हैं. एक बात निश्चित है कि पूरा विश्व इस बात से सहमत है कि इक्कीसवीं सदी एशिया की है. सबसे बड़ी चुनौती ये है कि हम एशिया के लोग इसे फील करते हैं या नहीं करते. सिर्फ कान से सुनकर हमें खुशी हो रही है या हमारे भीतर भी वह भाव जाग रहा है कि यस, इक्कीसवीं सदी को एशिया की सदी बनाकर रहना है. आज भी हम दुनिया के और भू-भाग से इतने प्रभावित हैं. क्योंकि हमने सदियों से इस प्रकार की जिंदगी गुजारी है. इसलिए हमें भी नहीं लगता है कि हां अब हमारी बारी है, हम कुछ कर सकते हैं और हमें करना है."

सिंगापुर की एनटीयू में सवालों का जवाब देते मोदी.
इसके बाद ट्रांसलेटर ने इस बात का अंग्रेजी में जो अनुवाद किया, उसे हम हिंदी में आपको बता रहे हैं.
"सुरेश ने जो मेरे से सवाल पूछा वो एशिया के सामने की चुनौतियां, मुख्य चुनौतियां क्या हैं और हम इन्हें कैसे हल कर सकते हैं. मुझे लगता है कि 21वीं सदी एशिया की है. लेकिन क्या हम इस बात को महसूस करते हैं, क्या हमारे अंदर यह भावना है ये एक चुनौती है. क्योंकि संसार के इस हिस्से में हम दूसरे हिस्से से इतने प्रभावित हैं कि हम महसूस नहीं करते कि अब हमारी बारी है. एशिया ने दुनिया में समृद्धि के अवसरों में अधिकतम वृद्धि और स्वतंत्रता देखी है. जापान ने यह शुरू किया, एशिया ने फॉलो किया. चीन एक बड़ी अर्थव्यवस्था बना और अब भारत की बारी है. फिर भी एशिया के सामने बहुत सारी कॉमन चुनौतियां हैं. दक्षिणी एशिया, मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्वी एशिया के पास एक जैसी ताकत है, मौके हैं, चुनौतियां हैं और कमजोरियां हैं. ये कुछ मुख्य कॉमन चुनौतियां हैं जैसे डिजीटल एज की स्किल्स, डिजीटल रिसेप्शन के समय में पर्याप्त नौकरियां, कृषि उत्पादकता, पानी, प्रदूषण, तेजी से बढ़ता शहरीकरण, सतत और सस्ते आवास, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता की सुरक्षा, सतत इंफ्रास्ट्रक्चर, सस्ता इलाज, समुदी अर्थव्यवस्था की सुरक्षा. इन सभी चुनौतियों के लिए सरकारों, विश्वविद्यालयों और प्रयोगशालाओं के बीच सामंजस्य की जरूरत है. नीतियों में परिवर्तन जरूरी है. इसके लिए बहुत पैसे की जरूरत होगी लेकिन इनोवेशन और टेक्नॉलोजी का इस्तेमाल बढ़ाने से इन चुनौतियों का सामना कर सकते हैं. यह हमारी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए."जिस हिसाब से ट्रांसलेटर ने यह सब बोला है उससे यह तो कतई नहीं लगता है कि ये ट्रांसलेटर से कोई गलती हुई है. सोशल मीडिया पर शेयर करने वाले लोग बोल रहे हैं कि ये सवाल-जवाब पहले से तय थे. मोदी थोड़ा जवाब भूल गए लेकिन ट्रांसलेटर ने तय हिसाब से अनुवाद किया. मोदी ने भी अनुवादक को टोका तक नहीं और बातचीत को आगे बढ़ा दिया.
एक बात ये भी है अगर भारत के प्रधानमंत्री के भाषण को विदेश में इतने अलग तरीके से ट्रांसलेट किया तो इस पर भारत सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए.

लंदन में मोदी का भारत की बात, सबके साथ कार्यक्रम.
इससे पहले मोदी के लंदन में हुए भारत की बात सबके साथ कार्यक्रम पर भी फिक्स होने के आरोप लगे थे. वहां पर मोदी से 20 घंटे काम करने का सवाल पूछने वाला युवक झारखंड बीजेपी नेता अमरप्रीत सिंह काले का बेटा था. इस सवाल का मोदी ने दिलचस्प जवाब दिया था जो बहुत वायरल हुआ था. मोदी ने कहा था कि वो सालों से विरोधियों से गाली खा रहे हैं लेकिन यह उन्हें काम करने की ऊर्जा देता है.
खैर, ट्रांसलेशन की गलतियों को पकड़ने के मामले में अमित शाह पीएम मोदी से आगे हैं. कैसे?
ये वीडियो देखिए और खुद जान लीजिए-
ज़रूरत है अनुवादक की. सम्पर्क करें बीजेपी कार्यालय. :D
ज़रूरत है अनुवादक की. सम्पर्क करें बीजेपी कार्यालय. :D Amit Shah
Posted by The Lallantop
on Thursday, May 10, 2018
ये भी पढ़ें- उपचुनाव के नतीजे नरेंद्र मोदी के लिए ये एक मोटा सबक लेकर आए हैं
जोशी और मोदी के खिलाफ 26 साल पुरानी ISI की साजिश
इंडोनेशिया में हिंदू राज कब-कब रहा है, जो वहां इतने हिंदू नाम दिखते हैं
ब्रिटेन की शाही शादी में पीएम मोदी के न शामिल होने की वजह इस आदमी ने बताई!
मोदीजी ने नीरव मोदी और विजय माल्या को याद किया है
वीडियो-जब 'टेक्निकल वजह' से पीएम मोदी का धनुष नहीं चल पाया























