इस बीच खबर ये भी है कि अमेरिकी वैक्सीन निर्माता फाइजर की वैक्सीन भी भारत आ सकती है. कई एक्सपर्ट ने इस टीके को कोरोना संक्रमण के खिलाफ सबसे कारगर माना है. इस टीके ने अपने सभी ट्रायलों में कोरोना संक्रमण के खिलाफ 92 प्रतिशत से 95 प्रतिशत तक की क्षमता दिखाई थी. वैक्सीन का नाम BNT162b2 है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी असरदार और सुरक्षित कोरोना वैक्सीन की सूची मे शामिल किया है. लेकिन भारत में इसके आने से पहले ही फाइजर कंपनी ने एक शर्त रख दी है. सरकार को ही वैक्सीन देगी अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' में छपी खबर के मुताबिक, फाइजर ने कहा है कि वो अपनी कोविड-19 वैक्सीन केवल सरकारी कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से ही देगी. इसका मतलब है कि शायद ये वैक्सीन देश के प्राइवेट अस्पतालों में ना मिले, जब तक कि सरकार इन प्राइवेट संस्थानों को ये वैक्सीन ना दे.
फाइजर ने ये फैसला ऐसे वक्त में किया है जब भारत ने अपनी कोविड टीकाकरण रणनीति में एक के बाद एक बदलाव किए हैं. उसने कंपनियों को ये ऑप्शन दिया है कि वे थोड़े अधिक दामों में राज्यों या फिर प्राइवेट अस्पतालों को भी अपनी वैक्सीन बेच सकती हैं. इस बारे में फाइजर के एक प्रवक्ता ने अखबार से कहा कि कंपनी भारत में वैक्सीन जरूर उपलब्ध कराएगी. लेकिन महामारी के इस दौर में वो सरकारी टीकाकरण कार्यक्रमों को प्राथमिकता देगी.
कंपनी के प्रवक्ता ने कहा,
'कंपनी अपनी वैक्सीन की सप्लाई केवल सरकारी अनुबंधों के माध्यम से ही करेगी. हम सरकार के टीकाकरण कार्यक्रम में वैक्सीन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं.'भारत में नहीं हुआ ट्रायल फाइजर कंपनी का मुख्यालय न्यूयॉर्क में है. उसने वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल के लिए सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) से अनुमति मांगी थी. ये संस्थान ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया का ही हिस्सा है. फाइजर ने अपनी ऐप्लिकेशन 4 दिसंबर को दाखिल की थी. इस वक्त उसे अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय संघ से आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी मिल चुकी थी.
यहां ये बात महत्वपूर्ण है कि भारत में वैक्सीन के इस्तेमाल की इजाजत मांगने वाली फाइजर ने यहां अब तक इसका कोई ट्रायल नहीं किया है. कंपनी अमेरिका और अन्य देशों में हुए परीक्षणों में मिले परिणामों के आधार पर ही भारत सरकार से इमरजेंसी अप्रूवल मांग रही है.
फाइजर की वैक्सीन अब जल्द ही भारत में आ सकती है. फोटो- PTIहालांकि कंपनी ने 5 फरवरी को अपना आवेदन वापस लेने का फैसला किया था. उस समय CDSCO के एक एक्सपर्ट पैनल ने इस वैक्सीन को लेकर सवाल खड़े किए था और कहा था कि इस वैक्सीन के लोकल ट्रायल होने चाहिए ताकि पता चल सके कि ये वैक्सीन भारतीयों पर क्या असर कर रही है. तब कंपनी ने अपने स्टेटमेंट में कहा था,
'वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल के अप्रूवल के लिए हम ड्रग रेग्युलेटरी अथॉरिटी की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी के सामने 3 फरवरी को गए. मीटिंग में हुई बातचीत में हमें पता चला कि कुछ अतिरिक्त जानकारी भी मांगी जा रही है. इसे देखते हुए हम इस बार अपनी ऐप्लिकेशन वापस ले रहे हैं. फाइजर मांगी गई अतिरिक्त जानकारी के साथ अथॉरिटी के सामने भविष्य में फिर से उपस्थित होगी.'हालांकि अब भारत में कोरोना संक्रमण की रफ्तार को देखते हुए सरकार ने अप्रैल की शुरुआत में ये फैसला किया कि जिन वैक्सीन्स को यूएस, यूके, यूरोप और जापान में इमरजेंसी अप्रूवल मिला है और जो वैक्सीन्स WHO की इमरजेंसी इस्तेमाल वाली लिस्ट में शामिल हैं, उनको भारत में बिना लोकल ट्रायल के इस्तेमाल की इजाजत दी जाए.















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