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मां बच्ची के कपड़े बदल रही थी, तो पाया वेजाइना में गहरा जख्म

शर्मनाक: दो महिला टीचर, जो अपनी स्टूडेंट की वेजाइना में नुकीली चीजें डाल देती थीं.

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फोटो - thelallantop
6 साल की एक बच्ची स्कूल जाने के नाम पर घबरा जाती थी. उसकी मम्मी को बड़ा अजीब लगता क्योंकि पहले वही बच्ची ख़ुशी-ख़ुशी स्कूल जाती थी. ऐसे में हम अक्सर ये सोचते हैं कि ये तो बच्चों का नॉर्मल बर्ताव है. स्कूल न जाना, होमवर्क न करना, पढ़ने से कतराना, वगैरह. पर बात इतनी छोटी नहीं थी. हफ्ते भर पहले ये बच्ची एक दिन अचानक ही लड़खड़ा कर गिर गई. तब मां को आभास हुआ कि बच्ची बीमार है. मां ने कपड़े बदलने के लिए यूं ही बच्ची की कमर पर हाथ लगाया तो बच्ची चीख पड़ी. जोर जोर से रोने लगी. जब बच्ची के पूरे कपड़े उतारे तो मां के तो होश ही फाख्ता हो गए. बच्ची की वेजाइना में जख्म था. जब बच्ची से बात की गई तो मालूम पड़ा कि स्कूल में 'छोटी मैम' और 'बड़ी मैम' मिलकर उसे एक अकेले कमरे में ले जातीं. और वहां उसका सेक्शुअल हैरेसमेंट करतीं. जब वो कराहती तो मुंह में कपड़ा ठूंसकर उसकी आवाज को दबा देती थीं. वो उसकी वेजाइना में नुकीली चीजें चुभोतीं. नन्ही बच्ची इतना डर गई थी कि बिना किसी से कुछ भी कहे सब चुपचाप बर्दाश्त करती रही. बच्ची से पूरी कहानी जानकार जब मां-पापा स्कूल गए, तो मैनेजमेंट ने उनकी शिकायत सुनने से मना कर दिया. कहा कोई प्रॉब्लम हो तो पुलिस के पास जाओ. बीते गुरुवार की रात मां-पापा पुलिसके पास पहुंचे और दोनों महिला टीचरों के खिलाफ शिकायत लिखवाई. ये मामला है पटना के सेंट ज़ेवियर हाई स्कूल का जो गांधी मैदान के पास है. पुलिस ने बताया कि आरोपी औरतों का नाम नूतन और इंदु है. ये दोनों क्लास के बाद आराम करवाने के बहाने बच्ची को लेकर जातीं. और पोर्टेबल बेड पर लिटाकर उसका रेप करतीं. मेडिकल जांच में बच्ची की वेजाइना के अंदरूनी हिस्से में इतने ज़ख्म हैं, कि जानकार लगता है कि ऐसे गुनाहगारों के लिए तो कोई भी सजा कम है. बच्चों का सेक्शुअल हैरेसमेंट एक आम समस्या है. इसलिए जिन बच्चों से आप प्रेम करते हों, वो आपके अपने बायोलॉजिकल बच्चे हों या किसी और के, उनका खयाल रखिए. वो उदास या बुझे से दिखें तो उनसे वजह पूछिए. उनके अभिभावक नहीं, दोस्त बनिए. क्योंकि सेक्शुअल हैरेसमेंट केवल कोई बाहरी ही नहीं, खुद बच्चों के रिश्तेदार, यहां तक खुद उनके मां-बाप भी कर देते हैं. जरूरी नहीं कि हर बार मसला सेक्शुअल हैरेसमेंट का ही हो. हो सकता है उन्हें एंग्जायटी या कोई और दिमागी समस्या हो, जिसको वो चाहकर भी न बता पा रहे हों. यूं न हो कि एक दिन आपका प्यारा बच्चा लड़खड़ाकर गिर जाए. और आप उसके ज़ख्मों के बारे में तब जानें जब बहुत देर हो चुकी हो.

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