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अमेरिका-ईरान की मीटिंग कराने के लिए बेकरार पाकिस्तान, ग्राउंड ऑपरेशन का डर भी है

US-Iran Meeting in Islamabad: ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Baqer Qalibaf ने ईरान के खिलाफ अमेरिका की संभावित जमीनी कार्रवाई पर कड़ी चेतावनी दी है. अगर ग्राउंड ऑपरेशन हुआ, तो अमेरिका-ईरान की बैठक कराने की पाकिस्तान की दिली इच्छा चकनाचूर हो सकती है.

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इस्लामाबाद में मिस्र, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के विदेश मंत्रियों की मीटिंग हुई. (X @ForeignOfficePk)

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी घातक जंग का दायरा पूरे वेस्ट एशिया में फैल चुका है. कच्चे तेल और नेचुरल गैस की बढ़ती कीमतों ने पूरी दुनिया की इकोनॉमी का मिजाज बिगाड़ दिया है. युद्ध रोकने के लिए तमाम कोशिशें की जा रही हैं. इस कवायद में पाकिस्तान खुलकर सामने आ रहा है. पाकिस्तान ने कहा कि वो अमेरिका-ईरान के बीच सीधी बातचीत कराने की तैयारी कर रहा है.

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रविवार, 29 मार्च को इस्लामाबाद में सऊदी अरब, तुर्किए और मिस्र के विदेश मंत्रियों के साथ पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार की बैठक हुई. बैठक खत्म होने के बाद इशाक डार ने कहा कि हमारी बातचीत का फोकस झगड़े को जल्दी और हमेशा के लिए खत्म करने था. उन्होंने आगे कहा कि हमें वॉशिंगटन और तेहरान के बीच सीधी बातचीत की भी उम्मीद है.

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा,

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"पाकिस्तान को आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत की मेजबानी करने और उसे आसान बनाने में गर्व महसूस होगा, ताकि चल रहे झगड़े का पूरी तरह और हमेशा के लिए हल निकाला जा सके."

फिलहाल, यह साफ नहीं है कि अमेरिका और ईरान ऐसी मीटिंग में शामिल होने के लिए राजी हुए या नहीं. अमेरिका के विदेश मंत्रालय और वाइट हाउस ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली संभावित मीटिंग के बारे में पूछ जाने पर कोई जवाब नहीं दिया.

अमेरिका ने कुछ कहा या नहीं, लेकिन ईरान की तरफ से तीखा रिएक्शन आया है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने आरोप लगाया था कि एक तरफ अमेरिका संभावित बातचीत के बारे में मैसेज भिजवा रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान के खिलाफ ग्राउंड ऑपरेशन की भी तैयारी कर रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी सैनिक तैनात किए जाते हैं, तो तेहरान जवाब देने के लिए तैयार है.

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शनिवार, 28 मार्च को अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि USS त्रिपोली पर सवार लगभग 3,500 नौसैनिक और मरीन ऑपरेशनल जोन में पहुंच चुके हैं. USS त्रिपोली एक मॉडर्न ‘एम्फीबियस असॉल्ट शिप’ है, जो F-35 स्टील्थ फाइटर जेट और ऑस्प्रे जैसे एडवांस्ड एयरक्राफ्ट ऑपरेट करने के काबिल है. ऐसे में ईरान के खिलाफ अमेरिकी ग्राउंड ऑपरेशन की आशंका बढ़ गई है.

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अमेरिकी सेंट्रल कमांड का पोस्ट. (X @CENTCOM)

इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत कराने की पाकिस्तान की बेचैनी की एक बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बना संकट भी है. इस अहम समुद्री रास्ते के बंद होने से कच्चे तेल और नेचुरल गैस की सप्लाई पर सीधा असर पड़ रहा है. 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमले के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी थी. अब मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि हालात सामान्य होने पर ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूल सकता है.

अपनी भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति के चलते पाकिस्तान के लिए यह संभावित बैठक फायदेमंद साबित हो सकती है. वह खुद को ग्लोबल साउथ की आवाज के तौर पर पेश कर सकता है और अपने हित साधने का मौका भी पा सकता है. लेकिन इस पहल के साथ जोखिम भी जुड़े हैं.

अगर पाकिस्तान इस बातचीत की मेजबानी करता है, तो उसे ऐसा संतुलित नतीजा निकालने की कोशिश करनी होगी, जो अरब देशों, खासकर सऊदी अरब, को भी कबूल हो. सऊदी अरब के साथ उसका डिफेंस पैक्ट इसे और संवेदनशील बनाता है. किसी भी तरह की चूक पाकिस्तान के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है. उसकी दक्षिण-पश्चिम सीमा ईरान से लगती है, जबकि पश्चिम में तालिबान शासित अफगानिस्तान के साथ तनाव पहले से जारी है.

वीडियो: ईरान के साथ जंग में ट्रंप ने कितना नुकसान करा दिया?

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