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ओसामा बिन लादेन की चिट्ठी वायरल, फिलिस्तीन पर जो लिखा कइयों को 'सही' लगा

ओसामा बिन लादेन की ये चिट्ठी 21 बरस पहले छपी थी और कई लोगों ने चिट्ठी में लिखी गई बातों से सहमति ज़ाहिर की है.

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ओसामा बिन लादेन (फ़ाइल फ़ोटो)

इज़रायल-हमास की जंग (Israel-Hamas War) को 6 हफ़्ते हो चुके हैं. हमास के शुरूआती हमले में 1,400 इज़रायली नागरिक मारे गए थे. इसके जवाब में इज़रायली सेना की कार्रवाई में 12,000 हज़ार से ज़्यादा फ़िलिस्तीनी मारे गए. जंग शुरू होने से लेकर अब तक कई नई-पुरानी कहानियां सामने आई हैं. किसी की जुगत, किसी का नफ़ा-नुक़सान, किसी की साझेदारियां. कुछ तो सरकारी एजेंडा होता है, कुछ स्वचालित. अब जंग के बीच दुनिया के सबसे कुख्यात आतंकवादी की चर्चा है. ओसामा बिन लादेन.

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टिक-टॉकर्स को लादेन की एक चिट्ठी मिल गई है. उनवान है, 'अमेरिकी लोगों के नाम ख़त'. ये चिट्ठी 21 बरस पहले छपी थी. कई इंटरनेट यूजर्स ने चिट्ठी में लिखी गई बातों से सहमति ज़ाहिर की है. इस सहमति के हज़ारों वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर वायरल हो गए हैं.

क्या लिखा था ख़त में?

ये ख़त 9/11 के भयानक हमले के बाद लिखा गया था. इसमें लादेन ने हमलों को 'सही' बताने की कोशिश की है. वो कई वजहें गिनाता है. अल-क़ायदा के हमलों को 'बदला' बताता है. अमेरिका में 'आम हो चुके अनैतिक व्यवहार' की बात करता है. इसी में एक कथित कारण है फ़िलिस्तीन पर क़ब्ज़ा. इज़रायल के क़ब्ज़े और आज़ाद राज्य की मांग की चर्चा इन दिनों भी है. संभवतः तभी ओसामा का पत्र दोबारा सामने आया है.

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ख़त में जगह-जगह पर फ़िलिस्तीन का ज़िक्र आता है. जैसे राज्य का दर्जा देने वाली बात पर लिखा है:

"फ़िलिस्तीन दशकों से क़ब्ज़े में है और तुम्हारे किसी भी राष्ट्रपति ने 11 सितंबर के बाद तक इसके बारे में बात नहीं की..."

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ओसामा ने अपने ख़त के अंत में ये कौल लिया, कि फ़िलिस्तीन को क़ब्ज़े में नहीं देखा जा सकता और वो उसकी बेड़ियां तोड़ देंगे. साथ में अमेरिका को चेतावनी भी दी कि उन्हें अपने अहंकार की क़ीमत ईसाइयों के ख़ून से चुकानी होगी.

2 मई 2011 को अमेरिकी सेना की SEAL टीम ने पाकिस्तान के एब्टाबाद में ओसामा बिन लादेन को मार दिया था. (फ़ोटो - गेटी)
किसने वायरल करवाया?

द रोलिंग स्टोन्स वेबसाइट के मुताबिक़, टिक-टॉक यूज़र लिनेट एडकिंस ने 14 नवंबर को एक वीडियो पोस्ट किया. कहा,

"मैं चाहता हूं कि आप जो भी कर रहे, रुक जाएं. और केवल दो पेज का ये लेटर पढ़ें - 'अ लेटर टू अमेरिका'. पढ़ कर वापस आएं और मुझे बताएं कि आप क्या सोचते हैं. क्योंकि मुझे ऐसा लगता है कि मेरे पूरे नज़रिए पर ही सवाल खड़ा हो गया है."

ख़त वायरल हो गया. कई टिक-टॉकर्स ने तो इसे 'आंखें खोल देने वाला' और 'दिमाग़ हिला देने वाला' तक बता दिया. उन्होंने अपने फ़ॉलोअर्स को ख़त पढ़ने के लिए कहा. बहुतेरे लोग इस बात से चौंके भी कि लोगों में बिन लादेन के विचारों के लिए इतना समर्थन है. ऐसी मांगें भी उठीं कि इस ट्रेंड की जांच हो, क्योंकि कइयों ने इसे साज़िश बताया.

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द गार्डियन अख़बार की वेबसाइट पर 2002 से लादेन का ख़त मौजूद था, लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद उन्होंने 15 नवंबर को इसे हटा लिया.

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