कश्मीर के रैनावारी इलाके में एक मंदिर 27 सालों से बंद पड़ा था. अब वहां फिर से पूजा-पाठ शुरू हो गया है. 28 अप्रैल को वहां जोगी लंगर भी खिलाया गया. खूब सारे कश्मीरी पंडित तो आये ही, उनके साथ अड़ोस-पड़ोस के मुसलमान भी इकट्ठे हुए.

श्रीनगर के इस रैनावारी इलाके में एक समय बहुत आतंकवाद बढ़ गया था. खासकर अस्सी के दशक के आखिरी सालों में. पहले यहां बहुत सारे पंडित रहते थे. लेकिन फिर सब अपने घर छोड़ कर कहीं और बस गए. कुछ कश्मीर छोड़कर. कुछ देश ही छोड़ कर.
कश्मीर में पहले 532 मंदिर हुआ करते. कई तो तोड़-फोड़ दिए गए थे. कुछ बंद करवा दिए. रैनावारी के इस प्रसिद्ध 'बेताल भैरौ' मंदिर में भी पूजा बंद करवा दी गयी थी. पूजा करने वाले भी सब इलाका छोड़ कर चले गए थे. किसी धर्मात्मा ट्रस्ट ने मंदिर की ज़मीन वहां के एक लोकल प्रॉपर्टी डीलर को बेच दिया था. ये बात जब वहां के लोकल लोगों को पता चली तो उन्होंने पंडितों को बताई. जितने पंडित वहां बचे थे उन सबने मिल कर एक समिति बनाई. कश्मीर पंडित संघर्ष समिति (KPSS). समिति ने पास के मस्जिद से मंदिर खुलवाने के लिए मदद मांगी. फिर सबने मिल कर लीगल एक्शन लिया. गुरुवार को भैरो बाबा का जन्मदिन था. इसी मौके पर मंदिर फिर से खुला. वहां पूजा शुरू हुई.

यहां रहने वाले एक कश्मीरी पंडित उत्पल कौल ने बताया कि ये मंदिर पुराना है. बहुत सालों पहले वहां अमरनाथ यात्रा पर जाने वालों को भोग खिलाया जाता था. ये देख उन्हें पुराने दिन याद आ गए.
हबीबउल्लाह अपने पुराने पड़ोसियों को देखकर बहुत खुश हैं. वो दुआ करते हैं कि उनके दोस्त यहां वापस आ कर फिर से रह सकें.
मंदिर खुलने के मौके पर बहुत से लोग इकट्ठे हुए. कुछ लोग अमेरिका से भी अपने पुराने घर आये . जिन लोगो को कई सालों से नहीं देखा था उनसे फिर से मिले. बहुत भावुक भी हो गए. कश्मीरी पंडितों ने कहा कि वो लोग बहुत खुश हैं. मंदिर फिर से खुलने से उन्हें यकीन हुआ कि वो भी कश्मीर का हिस्सा हैं.