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वेंटीलेटर के लिए पैसे नहीं, दो साल से AIIMS में है बच्चा

रोज दसियों का इलाज नहीं हो पाता क्योंकि सालों से ऐसे लोग बेड पर हैं जिन्हें एक्टिव ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं होती.

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फोटो - thelallantop
झारखंड के हजारी बाग का मोहम्मद जावेद, 15 साल उमर है और ढ़ाई साल से AIIMS में भर्ती है. वो अपने दोस्तों के साथ खेलने निकला था, लौटा तो हाथ-पैर नहीं चल रहे थे. गिरा होगा कहीं. इधर-उधर दिखाया डॉक्टर्स ने कहा तो दिल्ली ले आए. तब से AIIMS के ट्रामा सेंटर में एडमिट है. वेंटीलेटर पर. हाथ-पैर नहीं हिलते, अटक-अटक कर बोल पाता है. अब देखिए मसला ये है कि घरवाले चाहें तो घर ले जा सकते हैं. घर पर इलाज का खर्च आएगा कुछ 500 के लगभग. और अस्पताल में खर्चा आता है 10 हजार. AIIMS को कुछ पैसे लेकिन घर वाले क्या करें. कमाई इतनी कम है कि अफोर्ड नहीं कर सकते उसे घर ले जाना. क्योंकि वेंटीलेटर भी चाहिए होगा और घर वालों को इत्ते पैसे नहीं पुजते कि वेंटीलेटर खरीद सकें. कोई ढ़ाई साल से वेंटीलेटर पर हो तो सोचिए कितने लोगों को बिना इलाज के लिए लौटना पड़ता होगा. क्योंकि बेड तो लिमिटेड ही होते हैं. AIIMS वाले कोशिश कर रहे हैं कहीं से वो पैसे इकट्ठे कर जावेद की मदद कर सकें. एक वेंटीलेटर ही दिला दें कि घर जा सके.  लेकिन नहीं हो पाता AIIMS  जैसे अस्पताल में रोज एक्सीडेंट के ऐसे सैकड़ों केस आते हैं. जिसमें कईयों को वेंटीलेटर की जरूरत होती है. (हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार)

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