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भारत के बड़े नोटों की नोटबंदी की नेपाल ने, 100 रुपए से ऊपर के नोट बैन

नेपाल में भारत के 200, 500 और 2,000 रुपये के नोटों का इस्तेमाल गैरकानूनी माना जाएगा.

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मोदी सरकार ने पीएफ पर ब्याज दर कम कर दी है. (फोटो: AP)
नेपाल ने 100 रुपये से ऊपर की सारी इंडियन करंसी बैन कर दी है. हाल ही में हुई एक कैबिनेट मीटिंग में ये फैसला लिया गया. इस फैसले के बाद नेपाल में भारत के 200, 500 और 2,000 रुपये के नोटों का इस्तेमाल गैरकानूनी माना जाएगा. सरकार के प्रवक्ता गोकुल बासकोटा ने 13 दिसंबर को सरकार के इस फैसले की जानकारी देते हुए मीडिया को बताया-
सरकार ने इस बारे में एक नोटिस जारी करने का फैसला किया है. लोग भारतीय करंसी के 200, 500 और 2,000 रुपये के नोटों का न तो इस्तेमाल करें, न इन्हें साथ लेकर कहीं आएं-जाएं और न ही इसे अपने पास रखें. 
पिछले दो सालों से नेपाल में खुले हाथों से इस्तेमाल हो रहे हैं ये नोट नोटबंदी के बाद नेपाल राष्ट्र बैंक ने 2000 और 500 के नए भारतीय नोटों को बैन किया था. नेपाल की तरफ से कहा गया था कि ये नए नोट नेपाल में तभी वैध होंगे, जब भारत फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट ऐक्ट के तहत नोटिफिकेशन जारी करेगा. फिर जब भारत की तरफ से ये प्रक्रिया पूरी कर दी गई, तो नेपाल में इन नोटों का इस्तेमाल खुले हाथों से होने लगा. इससे पहले 2002 में भी नेपाल ने भारतीय करंसी के 1,000 और 500 रुपये के नोटों को अपने यहां बैन किया था. ये बैन 13 साल तक रहा. फिर 2015 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेपाल यात्रा पर गए, तो नेपाल ने ये बैन खत्म करने का फैसला किया. नेपाल जाने वाले भारतीय पर्यटक हों कि भारत में कमाने वाले नेपाल के लोग, नेपाल में इन नए नोटों को आम इस्तेमाल में लाया जाता रहा. भारत और नेपाल के बीच खुला बॉर्डर है. लोगों का खूब आना-जाना रहता है. तो बॉर्डर के पास वाले इलाकों में भारतीय करंसी का इस्तेमाल भी काफी ज्यादा होता है. अब एकाएक लिए गए नेपाल सरकार के इस फैसले से लोगों को दिक्कत तो होगी. भारत ने नोटबंदी की, नेपाल ने परेशानी उठाई नवंबर 2016 में भारत ने अपने यहां नोटबंदी की. 500 और 1,000 के नोट लीगल टेंडर नहीं रह गए. इस वजह से नेपाल को काफी परेशानी हुई थी. भारत के नोट हमेशा से नेपाल में खूब चलते थे. मान्य थे. नोटबंदी में पुराने नोट बदलवाने की एक मियाद थी. साथ में, कई सारी शर्तें भी रखी गई थीं. फिर ये हुआ कि नेपाल के पास 500 और 1,000 रुपये के वो भारतीय नोट बचे रह गए, जिन्हें भारत ने बंद कर दिया था. करीब 68 अरब रुपये की करंसी थी नेपाल के पास. इसे लेकर नेपाल ने कई बार भारत से बात की. नेपाल चाहता था कि भारत उस करंसी को भी एक्सचेंज करे. अप्रैल 2018 में जब नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली भारत आए, तब भी उन्होंने ये मुद्दा उठाया था. मगर नेपाल की इन कोशिशों का कोई नतीजा निकला नहीं. अगस्त 2018 में खबर आई कि भारत नेपाल और भूटान के पास पड़े अपने पुराने नोटों को एक्सचेंज नहीं करने जा रहा है. भारतीय वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने तब मीडिया से कहा था-
मुझे लगता है कि भारतीय करंसी के बंद हो चुके 500 और 1,000 रुपये के काफी कम नोट ही हैं भूटान और नेपाल के पास. इन्हें एक्सचेंज करने को लेकर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है अभी तक. उन नोटों को बदला जाएगा, इस बात की संभावना बहुत कम ही है.
नेपाल के प्रधानमंत्री खड्ग प्रसाद शर्मा ओली ने अपने यहां संसद में कहा था. कि भारत की नोटबंदी से नेपाल को परेशानी हुई. नेपाली नागरिकों को नुकसान उठाना पड़ा. नेपाल ने कई बार भारत के सामने पुराने नोटों को एक्सचेंज करने की बात उठाई. मगर इसपर कुछ हो नहीं सका (फोटो: रॉयटर्स)
नेपाल के प्रधानमंत्री खड्ग प्रसाद शर्मा ओली ने अपने यहां संसद में कहा था. कि भारत की नोटबंदी से नेपाल को परेशानी हुई. नेपाली नागरिकों को नुकसान उठाना पड़ा. नेपाल ने कई बार भारत के सामने पुराने नोटों को एक्सचेंज करने की बात उठाई. मगर इसपर कुछ हो नहीं सका (फोटो: रॉयटर्स)

नेपाल का सबसे ज्यादा कारोबार भारत के साथ ही होता है नेपाल का सबसे ज्यादा कारोबार भारत के साथ होता है. भारत उसका सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है. पेट्रोल से लेकर बाकी जरूरत की चीजें, सबसे ज्यादा सप्लाई भारत ही करता है नेपाल में. भारत के नोट नेपाल में नहीं चलेंगे, तो कारोबार में भी दिक्कत आएगी. इसके अलावा वहां लोग अपने घरों में जो सेविंग रखते हैं, उसमें भी भारत के नोट खूब होते हैं. तो उन्हें भी दिक्कत आने वाली है.


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