



मैं दुनिया का सबसे खतरनाक मशहूर दहशतगर्द था. मैं छह साल बड़ी सहूलियत के साथ पाकिस्तान मिलिट्री अकेडमी के साथ रहता था. फिर अमेरिकियों ने दाखिल होकर मुझे क़त्ल कर दिया.
मैं एक अमन पसंद मुहाजिर थी. मैं अफ़ग़ानिस्तान की ख़ूबसूरती की एक निशानी थी. जंग से प्रभावित बेवा औरत थी. मैं अपने काम से काम रखती थी. मैं अब पाकिस्तान की कैद हूं. क्योंकि मैं इस मुल्क की शहरियत (नागरिकता) इख़्तियार करना चाहती थी. जहां मैंने बतौर मुहाजिर (शरणार्थी) अपनी जिंदगी के 30 साल गुजारे थे.
शेख बिलाल ने लिखा, ' अफसोस ओसामा जैसा दुनिया का बड़ा दहशतगर्द पाकिस्तान से निकला और पाकिस्तान का नाम पूरी दुनिया में बदनाम हुआ. ऐसे ही दुनिया पाकिस्तान को दहशतगर्दी का गढ़ नहीं कहती. मुल्ला मंसूर ड्रोन हमलों में मारा गया. पाकिस्तानी आईडी कार्ड और पासपोर्ट पर सफ़र करता था. कराची में प्रॉपर्टी थी उसकी. वाह क्या बात है हमारी आईएसआई की.अशर हफीज ने लिखा, अफसोस पाकिस्तान पर! हम जिस मुल्क में भी जाएं, वहां की राष्ट्रीयता के लिए दरख्वास्त दे दें. लेकिन कोई हमारे मुल्क में 30 साल रहे और वो हमारी देशवासी न बने? क्या जज्बात लेकर ये खातून अफगानिस्तान जाएगी. क्या इसके खानदान का कोई भी आदमी पाकिस्तान के लिए अच्छे खयाल रख सकता है? अब दुश्मन बनाकर उसे भेज रहे हैं.
leon king नाम से कमेंट किया गया, 'भाई अमन पसंदों में कोई जगह नहीं. हां अगर ये खातून किसी किसी संगठन की मेंबर होती तो उसको सर आंखों पर बैठाया जाता. पुलिस और रेंजर्स के चौकस दस्ते उसकी हिफाज़त कर रहे होते. राजा मोहम्मद पारस ने लिखा, 'कानून, कानून होता वो फर्जी डॉक्यूमेंट के साथ पकड़ी गई है.'
वशदिल बलोच ने लिखा, ' कोई भी है. है तो औरत. और वो भी मजबूर और बेवा. उसके साथ ऐसा नहीं होना चाहिए था. एक साथ सजा और जुर्माना. वो भी एक लाख 10 हजार. क्या कानून सिर्फ उस बेवा अफगान औरत के लिए है?'
ऐसा नहीं कि लोगों ने सिर्फ इसके पक्ष और विपक्ष में ही बातें लिखी हो. ओसामा का नाम आया और कई पाकिस्तानी भड़क गए. जिसने ये पोस्ट किया एक से बढ़कर एक गालियों से भी उसे नवाज दिया. मां बहन की गालियां. ये गालियां देने वालों की औकात दिखा रही थीं. वो क्या है न कि गालियां जिसे दी जाती हैं उसका कुछ नहीं होता. हां देने वाले की नस्ल और तरबियत जरूर ऐलान कर देती हैं.