श्रद्धा हत्याकांड (Shraddha Murder Case) की कई कड़ियां अभी तक सुलझी नहीं हैं. अभी तक डेड बॉडी का सिर नहीं मिला है. आरोपी आफताब पूनावाला पुलिस को कई सवालों के गोलमोल जवाब दे रहा है. आफताब से राज उगलवाने के लिए पुलिस ने अब उसका नार्को टेस्ट कराने की तैयारी कर ली है. आखिर क्या होता है नार्को टेस्ट? इसे कैसे करते हैं? एक्सपर्ट्स से समझिए पूरा प्रोसेस.
नार्को टेस्ट में कोई व्यक्ति झूठ भी बोल सकता है? एक्सपर्ट ने क्या बताया
नार्को टेस्ट को लेकर एक्सपर्ट्स ने सबकुछ बता दिया!


नोएडा के विनायक अस्पताल के एमडी डॉ सौरभ चौधरी ने आजतक से जुड़े आशुतोष मिश्रा से बातचीत में बताया,
'नार्को टेस्ट का ग्रीक भाषा में मतलब 'एनेस्थीसिया' होता है. इसमें बहुत कम समय के लिए एनेस्थीसिया दिया जाता है. हालांकि, इससे पहले मरीज के कुछ रूटीन टेस्ट होते हैं. इनसे मरीज की फिटनेस का पता चलता है. ये पता चलता है कि क्या मरीज का शरीर एनेस्थीसिया झेल पाने के लायक है या नहीं. ये नार्को से पहले किया जाता है.'
विनायक अस्पताल के डॉ अनुज त्रिपाठी के मुताबिक,
'नार्को टेस्ट में हम ट्रुथ सिरप ड्रग्स यूज करते हैं. जब भी नार्को टेस्ट करते हैं उस समय हमारा दो बातों पर जोर रहता है. एक तो हम उसे टेस्ट के दौरान दर्द से निजात दिलाने की कोशिश करते हैं. दूसरा उसको सब-कॉन्शियस माइंड यानी अचेतन अवस्था में रखते हैं.'
मरीज का दिमाग किस स्थिति में होता है कि वो सवाल को सुन लेता है और उसका जवाब भी दे देता है. साथ ही नार्को टेस्ट के दौरान एक मनोवैज्ञानिक की क्या भूमिका रहती है. इस सवाल के जवाब में मनोवैज्ञानिक डॉ पुनीत जैन बताते हैं,
क्या कोई नार्को टेस्ट में झूठ बोल सकता है?'जब मरीज को एनेस्थीसिया दिया जाता है तो वो कॉन्शियस स्टेट से सब-कॉन्शियस स्टेट में पहुंच जाता है. इसे हम अल्फा स्टेट कहते हैं. अल्फ़ा स्टेट में मरीज सवालों को सुनता है और उनका सही-सही जवाब देता है. देखिए जब मरीज कॉन्शियस स्टेट में होता है तो वह सवाल का जवाब देने से पहले एनालिसिस कर लेता है और सोच-समझकर जवाब देता है. लेकिन, अल्फ़ा स्टेट में वो सीधे-सीधे जवाब देता है, सोच-समझ नहीं पाता.'
सवाल पूछने का कोई विशेष तरीका होता है जिसे फॉलो करना जरूरी होता है? इस सवाल के जवाब में डॉ जैन कहते हैं,
‘सवाल पूछते समय जरूरी बात ये है कि मरीज से छोटे-छोटे सवाल पूछे जाते हैं, क्योंकि लम्बे सवालों को वो याद नहीं रख पाता और उनके सही जवाब नहीं दे पाता. कई सवालों को तो बार-बार रिपीट किया जाता है जिससे मरीज सही से सुन ले और सच्चाई बता सके.’
क्या कोई मरीज नार्को टेस्ट के दौरान झूठ भी बोल सकता है? इस सवाल के जवाब में विनायक अस्पताल के एमडी डॉ सौरभ चौधरी ने आजतक को बताया,
'देखिए ये पाया गया है कि कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अचेतन अवस्था में भी झूठ बोल सकते हैं, उनके अंदर ऐसी क्षमता होती है. ऐसे लोग नार्को टेस्ट के दौरान भी सवाल सुनकर उसका गलत जवाब दे सकते हैं. इसीलिए कोर्ट इस टेस्ट को पूरी तरह सही नहीं मानता.'
डॉ चौधरी आगे ये भी बताते हैं कि मेडिकल साइंस में पाया गया है कि जब कोई व्यक्ति नार्को टेस्ट के दौरान झूठ बोलने की कोशिश करता है, तो उसका पल्स रेट बढ़ जाता है. ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है. कुछ को झूठ बोलते समय पसीना आने लगता है. कुछ जोर-जोर से सांस लेने लगते हैं. इससे ये भी समझ में आ जाता है कि ये आदमी शायद झूठ बोलने की कोशिश कर रहा है.
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