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बेटे को कोरोना से मरे 6 महीने गुजर गए, मां आज भी उसे फोन कर पूछती है- कैसे हो बेटा

दिल नहीं मानता कि बेटा चल बसा.

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सितंबर में हुई थी 30 साल के बेटे की कोरोना से मौत. तब से गाहे-बगाहे मां अस्पताल के बाहर आकर वीडियो कॉल करती है. (बाईं वाली फोटो TOI से है और दाईं वाली सोशल मीडिया से ली गई है.)
गुजरात का अहमदाबाद. यहां 1200 बेड का कोविड हॉस्पिटल है. कुछ दिन पहले इस अस्पताल के बाहर खड़ी दर्जनों एंबुलेंसों ने सुर्खियां बटोरी थीं. अस्पताल में सभी बेड भर गए थे, इसलिए एंबुलेंस में ही कोरोना वायरस के मरीजों का इलाज किया जा रहा था. अब इसी अस्पताल के बाहर एक बूढ़ी मां देखी गईं. नाम है पूनम सोलंकी. वो फोन पर अपने बेटे महेंद्र से वीडियो कॉल पर बात करती रहती हैं. वो महेंद्र, जिसकी छह महीने पहले कोरोना से मौत हो चुकी है. लेकिन मां का दिल नहीं मानता कि उसका 30 साल का जवान बेटा अब इस दुनिया में नहीं है.
वीडियो कॉल कर पूनम अपने बेटे महेंद्र से पूछती हैं-
"तुम कैसे हो बेटे. क्या अस्पताल वाले तुम्हें अच्छा खाना खिला रहे हैं? मैं प्रार्थना कर रही हूं कि तुम कोरोना से जल्दी ठीक हो जाओ."
टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में पूनम सोलंकी के बारे में बताया है. अखबार के मुताबिक, दुनिया छोड़ चुके बेटे से बात करते हुए पूनम की आंखों में प्यार झलकता है. वो रह-रहकर अपने बेटे को दुआएं देती हैं. करीब पांच मिनट तक पूनम अपने बेटे से बात करती रहती हैं. आखिर में ये कहते हुए फोन रख देती हैं कि बेटा जल्दी से ठीक होकर घर वापस आ जा. दिल नहीं मानता कि बेटा चला गया दरअसल, पूनम को फोन पर वीडियो रिकॉर्डिंग दिखाई जाती है. ये वो आखिरी वीडियो रिकॉर्डिंग है, जिसमें कोरोना से जूझते हुए महेंद्र ने सितंबर में अपनी मां से आखिरी बार बात की थी. इस बारे में पूनम के एक रिश्तेदार ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया-
"महेंद्र नरोल में मिल्क पार्लर चलाता था. अपनी मां से बहुत प्यार करता था. सितंबर में वो कोरोना पॉजिटिव हो गया. उसे इसी अस्पताल में भर्ती किया गया था. 5-6 दिन भर्ती रहने के बाद वो जिंदगी की जंग हार गया. पूनम भी जानती है कि उसका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है. लेकिन उसका दिल ये नहीं मानता. गाहे-बगाहे वो अस्पताल के बाहर आ जाती है. अपने बेटे से बात करने के लिए. हम उसे वीडियो रिकॉर्डिंग दिखाते हैं. तब पूनम को थोड़ा सुकून मिलता है. हम जानते हैं कि पूनम का यहां आना खतरनाक है. लेकिन उसके दुख को हैंडल करने का हमारे पास यही एक तरीका है."
कोरोना से हो रही मौतों से बहुत से लोगों को सदमा पहुंचा है. अचानक से उनका कोई अपना बीमार हो जाता है. बीमारी से लड़ते-लड़ते उसकी मौत हो जाती है. फिर कोविड-19 के प्रोटोकॉल्स ऐसे हैं कि लोग ठीक तरीके से अंतिम संस्कार तक नहीं कर पाते. ऐसे में बहुत से लोग ये स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि उन्होंने सच में किसी अपने को हमेशा के लिए खो दिया है.
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अहमदाबाद के सिविल अस्पताल के बाहर रोते एक मृतक के रिश्तेदार. (तस्वीर- पीटीआई)

ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं. अहमदाबाद में हाल ही में एक बैंक कर्मचारी की पत्नी की मौत कोरोना से हो गई. लेकिन उस बैंक कर्मचारी ने कभी ये नहीं माना. उसे लगा कि पत्नी अपने भाई के यहां गई है और थोड़े दिन में वापस आ जाएगी. वो अपनी पत्नी के कपड़े फोल्ड करता और प्लान बनाता कि दोनों साथ मिलकर आगे क्या करेंगे. अपनी पत्नी को रोज फोन भी करता.
कोरोना वायरस हमारे शरीर के लिए जितना घातक है, उतना ही घातक यह मेंटल हेल्थ के लिए भी है. अचानक से किसी अपने का चला जाना, जहन में एक खालीपन सा छोड़ जाता है. ऐसे में जरूरी है कि हम एक-दूसरे से बात करते रहें. जरूरी पड़ने पर डॉक्टरी सहायता लें.

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