'जीना इसी का नाम है'. अक्सर हमें कुछ लोग ऐसे दिखते हैं, जिनके काम को देखकर ये शब्द मुंह से निकलते हैं. इंसानियत जैसे इन्हीं के दम पर कायम हो. मोरबी पुल हादसे के दौरान भी कुछ ऐसे ही लोग देखने को मिले, जिन्होंने इंसानियत की बड़ी मिसाल पेश की.
मोरबी के हीरो: तौफीक भाई और राजू चाय वाले की बातें भावुक कर देंगी
राजू चाय वाले ने कहा- 'बहुत दुख हुआ जब एक बच्ची को नदी से बाहर निकाला और उसने मेरी गोद में ही दम तोड़ दिया.'


इनमें से एक हैं तौफीक भाई. आजतक से जुड़ीं गोपी घांघर के मुताबिक रविवार, 30 अक्टूबर को मोरबी के सिविल अस्पताल में तौफीक भाई अपनी बेटी की डिलीवरी के लिए आए हुए थे. जैसे ही अस्पताल में मोरबी ब्रिज के पीड़ितों को लाया जाने लगा तो उन्होंने न धर्म देखा और न जाति, बस लोगों को बचाने के लिए मोरबी ब्रिज की ओर दौड़ पड़े.
तौफीक भाई ने घटना के बारे में बताया,
'जब मैंने वो मंजर देखा तो मेरे दिमाग ने काम करना ही बंद कर दिया. मेरा दिल दहल उठा, बच्चों को देखकर मेरी आंखों में आंसू आ गए. मैं अल्लाह और भगवान से यही दुआ मांगता हूं कि किसी के भी साथ ऐसा न हो… ऐसे समय में हिंदू-मुसलमान, धर्म नहीं देखना चाहिए, ये तो सेवा है, हिंदू-मुसलमान सब एक हैं. मैंने दिल से लोगों की सेवा की. अभी भी मेरे दिमाग में वही सब चल रहा है. दिमाग से हादसा बाहर नहीं जा रहा.'
तौफीक भाई ने इस दौरान ये भी कहा कि उन्होंने करीब 30 से 35 बच्चों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की.
10 से ज्यादा लोगों को डूबने से बचा लियातौफीक भाई की तरह ही मोरबी के एक और हीरो हैं, राजू चाय वाले. राजू की चाय की दुकान मोरबी के झूलते पुल से कुछ ही दूरी पर है. उन्हें जैसे ही पता चला कि ब्रिज गिर गया है, वे दुकान छोड़कर नदी की तरफ भाग खड़े हुए. राजू ने आजतक से बातचीत में घटना के दौरान का पूरा वाकया बताया.
कहा,
'बच्ची ने मेरे हाथों में दम तोड़ दिया''जैसे ही हादसा हुआ, शोर मचने लगा, लोग नदी की तरफ भागने लगे. मैंने भी दुकान छोड़ दी और लोगों को बचाने के लिए नदी किनारे पहुंच गया. कई घायलों को बाहर निकाला. मैंने खुद नदी में घुसकर करीब 10 से ज्यादा लोगों को बाहर निकाला होगा. वे डूबने वाले थे.'
भरभराए हुए गले से राजू आगे कहते हैं, ‘पूरी रात मैं लोगों की मदद में जुटा रहा. मैं बहुत दुखी हुआ जब एक बच्ची को मैंने नदी से जैसे ही बाहर निकाला, उसने मेरी गोद में ही दम तोड़ दिया. दुर्भाग्य की एक गर्भवती महिला को भी मैं नहीं बचा पाया. मैं उसे नदी से बाहर तो निकाल लाया था, लेकिन थोड़ी ही देर बाद उसकी सांसें थम गईं.’
वीडियो: मोरबी ब्रिज पर 141 मौतों से पहले इतना बड़ा झूठ क्यों बोला गया?











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