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पीएम मोदी मोरबी के जिस अस्पताल में गए, उसके बेड नंबर 126 की कहानी क्या है?

लल्लनटॉप की टीम को क्या पता लगा?

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फोटो - लल्लनटॉप/सोशल मीडिया

मोरबी पुल हादसे में 135 लोगों की जान चली गई. रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. नौ लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं. कभी प्रशासन पर, कभी 'जनता की ज़िम्मेदारी' पर सवाल उठाए जा रहे हैं. इस बीच वो अस्पताल भी चर्चा में आया, जिसमें हादसे के घायलों को भर्ती कराया गया है. मोरबी सिविल अस्पताल. दावा किया गया कि प्रधानमंत्री का दौरा होना था, तो रातोरात पूरे अस्पताल की सूरत बदल दी गई. लेकिन, इस चर्चा में भी एक तस्वीर बार-बार दिखी. बेड नंबर-126 की.

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राष्ट्रीय जनता दल ने तीन तस्वीरें ट्वीट कीं. तीनों में बेड नंबर-126. कैप्शन में लिखा, "बेड नंबर- 126 की कहानी क्या है?"

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इन तीन तस्वीरों में से दो में एक ही आदमी दिख रहा है. चर्चा उस आदमी की भी है. क्यों? क्योंकि 31 अक्टूबर की एक तस्वीर में उनके पैर पर छोटी पट्टी लगी है. और दूसरे ही दिन, यानी 1 नवंबर को बड़ी पट्टी. पूरे पैर भर की पट्टी. हमारी टीम मोरबी में ही है, तो हमने की पड़ताल. शख्स का नाम है अश्विन. उन्होंने बताया,

"पहले छोटी पट्टी बांधी थी. कच्ची पट्टी थी. इसके बाद एक्स-रे लिया, तब जाकर पता चला कि फ्रैक्चर है. उसके बाद प्लास्टर बंधा है."

फिर हमने पूछा कि बेड नंबर 126 का क्या माजरा है?

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"पहले मैं 125 नंबर बेड पर था. फिर बग़ल में एक लेडी थीं, जो दूसरे वॉर्ड में चली गईं. तो मैं बेड नंबर-126 पर आ गया."

क्या विवाद हुआ था?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले मोरबी अस्पताल को आनन-फ़ानन में चमकाया गया. इसके साथ ही मरीजों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाई गई. मसलन, साफ़-सुथरे बेडशीट, तकिया वग़ैरह. कई तस्वीरें भी वायरल हुईं, जिसमें सिविल अस्पताल में सफ़ाई-पुताई और मरम्मत होती दिख रही है. सवाल उठे कि प्रधानमंत्री आ रहे हैं तो पूरे अस्पताल की कायापलट कर दी गई. लल्लनटॉप की टीम अस्पताल पहुंची तो वहां नए वाटर कूलर, नए बेड लाए जा रहे थे. हालांकि, बीजेपी की ओर से इस पर कोई सफ़ाई या जवाब नहीं आया. फिर प्रशासन ने कहा कि रूटीन काम था.

फिर इसी कड़ी में अस्पताल में चार नए वाटर  कूलर भी लगा गए थे. लेकिन, कुछ मीडिया रिपोर्टों में बताया गया कि वाटर कूलर लगाने का काम इतनी जल्दबाजी में किया गया कि उसमें पानी का कनेक्शन ही नहीं हो सका, क्योंकि अस्पताल प्रशासन ये काम करना ही भूल गया था. हालांकि, जब मामला खबरों में आया तो अस्पताल ने पानी की सप्लाई सुनिश्चित कराई.

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