The Lallantop

मोरबी केबल ब्रिज गिरने की सबसे बड़ी वजह अब सामने आई

ठेकेदार और ओरेवा कंपनी के बीच एक पेज का कॉन्ट्रैक्ट हुआ था, जिसमें सिर्फ एक बात थी, 'पैसा-पैसा'.

Advertisement
post-main-image
मोरबी पुल हादसे पर नई अपडेट (फोटो- आजतक)

मोरबी में हुए पुल हादसे को लेकर पुलिस ने मोरबी नगरपालिका से पूछताछ की है (Morbi Bridge Collapse Update). पता चला है कि पुल को रिपेयर करने से पहले निजी ठेकेदारों ने ढांचे की सही से जांच तक नहीं की थी. जांच में ओरेवा और ठेकेदार कंपनी के बीच हुए एक पेज का कॉन्ट्रैक्ट भी मिला है. बताया गया है कि डॉक्युमेंट में ऐसी कोई जानकारी नहीं है कि काम कितना और कैसे होगा. सिर्फ पैसों की डील की जानकारी है.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

हादसे की जांच कर रहे DSP पीए जाला ने बुधवार, 2 नवंबर को नगरपालिका के मुख्य अधिकारी संदीप सिंह जाला से चार घंटे तक पूछताछ की. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, पुलिस को जानकारी मिली है की ओरेवा ने देव प्रकाश फैब्रिकेशन लिमिटेड कंपनी को पुल की मरम्मत का काम दिया था. इस कंपनी को चलाते हैं 63 साल के प्रकाशभाई लालजीभाई परमार और उनके बेटे देवंगभाई प्रकाशभाई परमार. जांच में पता चला है कि कंपनी ने पुल के ढांचे का सही मूल्यांकन किए बिना ही उसे रिपेयर कर दिया.

SVNIT में एप्लाइड मैकेनिक्स एक्सपर्ट और सिविल इंजीनियरिंग प्रोफेसर इंडियन एक्सप्रेस को बताते हैं-

Advertisement

“ऐसे पुलों की मरम्मत के दौरान कई जरूरी चीजों को ध्यान में रखना होता है. जैसे कि वो कितना लोड सह सकता है या हवा और भूंकप का पुल पर क्या असर होगा.”

आगे की जांच में पता लगाया जाएगा कि मरम्मत के वक्त इन बातों का ध्यान रखा गया था या नहीं.

तख्तों को बदला जाना था

रिपोर्ट के मुताबिक, मोरबी नगर पालिका ने इस साल मार्च में ओरेवा ग्रुप की ही कंपनी अजंता को 15 साल का कॉन्ट्रैक्ट दिया था. तभी पुल को मरम्मत के लिए सात महीने के लिए बंद किया गया था. DSP ज़ाला बताते हैं कि साल 2007 में पुल पर लकड़ी के तख्तों को बदलकर तीन-परत के एल्यूमीनियम वाले तख्त लगाए गए थे और इस बार की मरम्मत में इन तख्तों को चार-परत एल्यूमीनियम का बनाया जाना था.

Advertisement

DSP ज़ाला के मुताबिक, ओरेवा और ठेकेदार कंपनी के बीच एक पेज का कॉन्ट्रैक्ट साइन हुआ था. इसमें पुल की मरम्मत के लिए 29 लाख रुपये दिए गए थे. हालांकि क्या काम होगा, कैसे किया जाएगा... इस बात की कोई जानकारी नहीं थी.

हादसे वाले दिन बिके भरपूर टिकट

जांच दल का हिस्सा रहे एक अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा-

सुरक्षा गार्ड और टिकट क्लर्क प्रशिक्षित नहीं थे. सामान्य बात है कि जब उन्होंने ऐसी भीड़ देखी तो उन्हें टिकट जारी करना बंद कर देना चाहिए था.

पुलिस के मुताबिक, रविवार को दुर्घटना वाले दिन अनुमानित 2000-2500 टिकट जारी किए गए थे जो कि सामान्य दिनों की तुलना में कहीं ज्यादा है. उस दिन शाम करीब साढ़े छह बजे जब पुल टूटा तो उस पर करीब 300 लोग सवार थे.

देखें वीडियो- मोरबी पुल हादसे में सामने आई बड़ी चूक

Advertisement