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मोरबी हादसे पर हाई कोर्ट ने नगर निगम को फिर से सुनाया, कहा- शाम तक जवाब दो, नहीं तो...

हाई कोर्ट ने पूछा कि बिना टेंडर निकाले मरम्मत की जिम्मेदारी कैसे दी गई?

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मोरबी पुल हादसा. (फोटो- आजतक)

मोरबी पुल हादसे (Morbi Bridge Collapse) पर गुजरात हाई कोर्ट ने एक बार फिर मोरबी नगर निगम को फटकार लगाई है. पुल हादसे का स्वत: संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट सुनवाई कर रहा है. कोर्ट ने नगर निगम से कहा कि आज शाम (16 नवंबर) तक हलफनामा दाखिल करें, नहीं तो एक लाख रुपये का जुर्माना भरें. इससे पहले 30 अक्टूबर को मोरबी में केबल पुल टूटने के कारण 135 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे.

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मोरबी नगर निगम ने मांगा समय 

गुजरात हाई कोर्ट में चीफ जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस आशुतोष जे शास्त्री की बेंच मामले की सुनवाई कर रही थी. नगर निगम की तरफ से पेश हुए वकील ने कोर्ट से जवाब दाखिल करने के लिए और समय की मांग की थी. इस पर बेंच ने फटकार लगाते हुए कहा, 

"इस मामले को थोड़ी गंभीरता से लें. या तो आज शाम तक हलफनामा दायर करें, नहीं तो एक लाख रुपये का भुगतान करें."

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इससे पहले 15 नवंबर को भी कोर्ट ने मोरबी नगर निगम को फटकार लगाई थी. बेंच ने कहा था कि नोटिस जारी होने के बावजूद कोर्ट में पेश ना होकर नगर निगम 'चालाकी कर रहा' है. दरअसल, हाई कोर्ट नगर निगम से पुल टूटने पर विस्तृत रिपोर्ट की मांग कर रहा है.

हालांकि, आज कोर्ट में नगर निगम के वकील ने कहा कि डिप्टी कलेक्टर चुनाव ड्यूटी पर हैं. वकील ने जवाब दिया, 

"नोटिस डिप्टी कलेक्टर को भेजा जाना चाहिए था लेकिन 9 नवंबर को नगर निगम को भेजा गया. इसलिए कोर्ट में पेश होने में देरी हुई."

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टेंडर क्यों नहीं निकाला- कोर्ट

इससे पहले 15 नवंबर को सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने पुल की मरम्मत के लिए कॉन्ट्रैक्ट देने के तरीके की आलोचना की थी. राज्य के मुख्य सचिव से पूछा कि सार्वजनिक पुल की मरम्मत के लिए टेंडर क्यों नहीं निकाला गया? इसके अलावा कोर्ट ने गुजरात सरकार से कई खामियों पर सवाल किए. कोर्ट ने कहा कि सरकार को ये भी बताना चाहिए कि नगर निगम के मुख्य अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई.

करीब 150 साल से भी अधिक पुराने इस पुल की मरम्मत करने का कॉन्ट्रैक्ट ओरेवा कंपनी को मिला था. अंग्रेजों के समय साल 1879 में मोरबी शहर की मच्छू नदी पर यह केबल पुल बनाया गया था. पिछले महीने गुजराती नववर्ष के मौके पर इस पुल को पब्लिक के लिए खोला गया था. लेकिन 30 अक्टूबर को दर्दनाक हादसा हुआ. राज्य सरकार ने हादसे की जांच के लिए पांच सदस्यों की एक कमिटी बनाई है.

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