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मद्रास हाईकोर्ट की EC को फटकार, 'आपके अधिकारियों पर तो हत्या का केस दर्ज होना चाहिए'

'आयोग न तो चुनावी रैलियों पर रोक लगा पाया, न ही कोविड प्रोटोकॉल्स का पालन करा पाया'

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बाईं ओर- इलेक्शन रैली की भीड़. रैली भी किसी और की नहीं, बल्कि गृह मंत्री अमित शाह की. दाईं ओर- मेडिकल ऑक्सीजन की लाइन में हताश खड़ा लाचार, एकाकी परिजन. (फोटो- PTI)
देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) की दूसरी लहर पहली से भी ज़्यादा ख़तरनाक होती जा रही है. इसके लिए ज़िम्मेदार कौन है? अलग-अलग जवाब हो सकते हैं. सरकार, या फिर हमारी अपनी लापरवाहियां या वो बड़े-बड़े धार्मिक या राजनीतिक जमावड़े जो इस दौरान आयोजित किए गए. इन्हीं जमावड़ों में शामिल रही चुनावी रैलियां भी. 5 राज्यों में चुनाव हो रहे हैं. और इस दौरान कोविड प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ा दी गईं. न तो राज्य और केंद्र सरकार ने ध्यान दिया, न चुनाव आयोग ने. अब इस पर मद्रास हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है. Live Law की ख़बर के मुताबिक- हाई कोर्ट ने भारत के निर्वाचन आयोग (ECI) को फटकारते हुए कहा कि वह एक महामारी के समय में न तो चुनावी रैलियों पर रोक लगा पाया, न ही कोविड प्रोटोकॉल्स का पालन करा पाया. हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव बैनर्जी ने कहा –
“देश में कोविड-19 की दूसरी वेव के लिए आप और सिर्फ आप ज़िम्मेदार हैं. जब चुनावी रैलियां आयोजित की जा रही थीं तो क्या आप किसी दूसरे ग्रह पर थे. आपके अधिकारियों पर तो हत्या का केस दर्ज हो जाना चाहिए.”
हालांकि हत्या के केस वाली बात चीफ जस्टिस ने फटकार के तौर पर ही कही. लेकिन उनकी टिप्पणियां गंभीर रहीं. अपनी बात बढ़ाते जस्टिस बैनर्जी ने कहा –
“लोगों का स्वास्थ्य सबसे ऊंची प्राथमिकता होना चाहिए. ये शर्म की बात है कि आपके जैसी (चुनाव आयोग के लिए) संवैधानिक संस्थाओं को भी ये बात याद दिलानी पड़ती है. वो भी इस तरह से. कोई भी नागरिक जब ज़िंदा रहेगा, तभी तो लोकतंत्र में दिए अपने अधिकारों का पालन कर पाएगा. अभी तो संकट अस्तित्व पर है. बाकी सब बाद में.”
उन्होंने कहा कि चुनावों के दौरान मास्क और डिस्टेंसिंग जैसे बेसिक प्रोटोकॉल्स का पालन करा पाने में भी चुनाव आयोग नाकाम रहा. 2 मई को 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों की मतगणना होनी है. लेकिन चीफ जस्टिस बैनर्जी ने कहा कि अगर ECI उस दिन के लिए कोविड प्रोटोकॉल्स के हिसाब से मुकम्मल तैयारियां नहीं करा सका, तो कोर्ट मतगणना रुकवाने पर भी विचार कर सकता है. कोर्ट ने इस संबंध में 30 अप्रैल तक चुनाव आयोग से एक ब्लूप्रिंट भी मांगा है.

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