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कागजों में बांट दिया 110 करोड़ का राशन, मध्य प्रदेश में सामने आया बड़ा घोटाला!

ट्रकों की जगह मोटरसाइकिल और स्कूटर से भेजा राशन. बढ़ा-चढ़ाकर बताई लाभार्थियों की संख्या. अकाउंटेंट जनरल की रिपोर्ट में हुआ खुलासा.

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(फाइल फोटो: पीटीआई)

मध्य प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों में राशन बांटने को लेकर एक बड़ा घोटाला सामने आया है. राज्य के अकाउंटेंट जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक पोषण आहार को ले जाने के लिए ट्रकों का इस्तेमाल बताया गया था, लेकिन हकीकत में इसके लिए मोटरसाइकल और स्कूटर का इस्तेमाल हुआ. इसके साथ-साथ लाभार्थियों की संख्या भी खूब बढ़ा-चढ़ा कर बताई गई है, जिसके कारण टैक्स पेयर्स पर कई करोड़ रुपयों का भार पड़ा.

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अकाउंटेंट जनरल ने कहा है कि इस तरह आंकड़ों के हेरफेर के जरिए 110.83 करोड़ रुपये का राशन कागजों में ही बांट दिया गया.

टेक होम राशन योजना

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय 'टेक होम राशन' नाम की एक महत्वपूर्ण योजना चलाती है. इसका मकसद छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पोषणयुक्त राशन मुहैया कराना है, ताकि बच्चों में कुपोषण कम किया जा सके और महिलाओं को जरूरी प्रोटीन दिया जा सके. इस योजना के तहत मध्य प्रदेश में 49.58 लाख बच्चे और महिलाएं रजिस्टर्ड हैं, जिसमें 6 महीने से 3 साल तक के 34.69 लाख बच्चे, 14.25 लाख गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं और स्कूल छोड़ चुकीं 0.64 लाख लड़कियां (11 से 14 साल) शामिल हैं.

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हालांकि, राज्य के ऑडिटर जनरल ने अपनी जांच में पाया कि मध्य प्रदेश में इस योजना के तहत बड़े स्तर पर धांधली हुई है और लाभार्थियों की पहचान, राशन के परिवहन, वितरण और उसकी गुणवत्ता में काफी ज्यादा अनियमितता हुई है.

इस घोटाले के स्तर का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि छह कंपनियों ने दावा किया था कि उन्होंने 6.94 करोड़ रुपये के 1,125.64 टन राशन को पहुंचाने में ट्रकों का इस्तेमाल किया गया है. हालांकि, जब इसकी जांच की गई तो पता चला कि इन ट्रकों का रजिस्ट्रेशन नंबर मोटरसाइकिल, कार, ऑटो और टैंकर का है.

लाभार्थियों की संख्या बढ़ाई!

केंद्र और राज्य सरकार ने महिला और बाल विकास विभाग से कहा था कि वो अप्रैल 2018 तक ये सर्वे करके बताएं कि स्कूल छोड़ चुकीं कितनी लड़कियां 'टेक होम राशन' योजना के तहत लाभ पाने के लिए पात्र हैं. हालांकि, विभाग ने फरवरी 2021 तक ये सर्वे नहीं कराया और बाद में इसकी संख्या बढ़ा-चढ़ा कर दिखा दी. रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल शिक्षा विभाग में  2018-19 में कहा था ऐसी लड़कियों की संख्या 9 हजार है, लेकिन महिला और बाल विकास मंत्रालय ने बिना किसी सर्वे के कहा कि इन लड़कियों की संख्या 36.08 लाख है.

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ऑडिट के दौरान ये पाया गया कि आठ जिलों के 49 आंगनवाड़ी केंद्रो में सिर्फ तीन आउट-ऑफ-स्कूल लड़कियां रजिस्टर्ड हैं. जबकि इन्हीं 49 आंगनवाड़ी केंद्रों में विभाग ने कहा था कि इस श्रेणी में 63,748 लड़कियां हैं और ये दावा किया कि 2018-21 के दौरान 29,104 लड़कियों को पोषण आहार मुहैया कराया गया है.

जांच रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल, छिंदवाड़ा, धार, झाबुआ, रीवा, सागर, सतना और शिवपुरी जिलों में बाल विकास परियोजना अधिकारियों को करीब 97 हजार टन पोषण आहार प्राप्त हुआ था, लेकिन इसमें से करीब 86 हजार टन ही राशन आंगनवाड़ियों को भेजा गया. यानी कि 10 हजार से अधिक टन राशन प्राप्त होने के बावजूद लाभार्थियों को नहीं दिया गया. ये राशन गोदाम में भी नहीं रखा हुआ है. इसकी कीमत 62.72 करोड़ रुपये है. ऑडिट रिपोर्ट में इसकी चोरी की आशंका जताई गई है.

इसके अलावा मध्य प्रदेश के बाड़ी, धार, मांडला, रीवा, सागर और शिवपुरी के छह प्लांट ने दावा किया कि उन्होंने 4.95 करोड़ रुपये के 821 टन राशन की सप्लाई की है, जबकि इतनी मात्रा में राशन उनके पास उपलब्ध भी नहीं था.

गुणवत्ता भी खराब!

प्रदेश सरकार ने पोषण आहार की गुणवत्ता की जांच एक स्वतंत्र लैब से कराई थी. इसमें पाया गया राज्य की कई फर्मों ने करीब 40 हजार टन राशन घटिया गुणवत्ता वाला ही बांट दिया था. इसके बदले में करीब 238 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया गया, लेकिन इन फर्मों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई.

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि राशन वितरण के विभिन्न चरणों में इसकी जांच स्वतंत्र लैब्स द्वारा कराई जानी चाहिए, लेकिन कई जगहों पर ये नहीं किया गया. यानी कि बच्चों और महिलाओं को खराब गुणवत्ता वाला राशन मिलता रहा.

ऑडिट में शामिल किए गए आठ जिलों में यह पाया गया है कि 2018-21 के दौरान अधिकारियों ने आंगनवाड़ी केंद्रों की जांच नहीं की थी, जो कि राज्य में इस योजना की दयनीय स्थिति को दिखाता है.

सरकार का जवाब

इस मामले को लेकर राज्य सरकार का दावा है कि अधिकांश बिंदुओं पर पहले ही सुधारात्मक कार्रवाई की जा चुकी है. उन्होंने अपने जवाब में कहा, 

'आउट ऑफ स्कूल बालिकाओं के संबंध में बेसलाइन सर्वे विभाग द्वारा किया गया था और भारत सरकार को भी प्रतिवेदित किया गया था. वर्ष 2018 से 2021 तक राज्य द्वारा स्वत: ही किशोरी बालिकाओं का सर्वेक्षण पुन: कराकर लाभार्थियों की संख्या में कमी लाई गई.'

मध्य प्रदेश सरकार ने आगे कहा,

'वर्ष 2018-19 में जहां 2.60 लाख बालिकाओं को टेक होम राशन दिया जा रहा था, वहीं 2020-21 में यह संख्या घटकर 1.28 लाख और 2021 में सिर्फ 15 हजार हजार रह गई. वर्ष 2022-23 में मात्र 8,600 किशोरी बालिकाएं इस श्रेणी में पाई गईं, जिन्हें अब टेक होम राशन न देकर स्कूल में प्रवेश कराया जा रहा है.'

राज्य सरकार का कहना है कि ऑडिट रिपोर्ट में जो ये बात निकलकर सामने आई है कि ट्रकों की जगह मोटरसाइकिल, कार, ऑटो और टैंकर से राशन का परिवहन कराया गया है, दरअसल ये गाड़ियों का गलत नंबर देने की वजह से हुआ है.

उन्होंने यह भी कहा कि ऑडिट रिपोर्ट के निष्कर्ष फाइनल नही हैं, इसलिए विस्तार से जांच के बाद ही आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.

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