पति नहीं, इस बार पत्नी ने दिया ट्रिपल तलाक़. वो भी फोन पर!
जो मंजूर हो गया. और पति जी मिमियाते रह गए.
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फोटो - thelallantop
ट्रिपल तलाक के बारे में तो पता ही होगा. अच्छा न याद आ रहा हो तो बता दें. कुछ मुसलमान समुदायों में ऐसा होता है कि अगर पति तीन बार 'तलाक़, तलाक़, तलाक़' कह दे, तो पति-पत्नी का रिश्ता उसी समय ख़त्म हो जाता है. कई किस्से सुनने में आते हैं. कि कभी पति ने पत्नी को फोन पर तलाक़ दे दिया, कभी फेसबुक पर. दुनिया भर में कई जगह मुसलमान औरतें इसका विरोध भी कर रही हैं. लेकिन इस बार पति नहीं, पत्नी ने दिया ट्रिपल तलाक़. वो भी फोन पर. और ये तलाक़ मंजूर भी हो गया. आम तौर पर ये हक केवल पुरुषों को होता है. 19 साल की मोहसिना लखनऊ की रहने वाली है. शादी हुई बाघपत के रहने वाले आरिफ से. तो आरिफ ने मोहसिना के घर वालों से दहेज़ मांगा. जाने कितना था. लेकिन जितना भी रहा होगा, दिया गया. मोहसिना विदा होकर पति के घर पहुंची. और उसी रात को आरिफ 2 लाख रुपये और मांगने लगा. मोहसिना ने कहा तुम्हारी ऐसी-तैसी. एक्को पैसा न देंगे. और मायके लौट गई. फिर गांव में लगी पंचायत. और फ़ोन मिलाकर लाउडस्पीकर पर उससे बात हुई. आरिफ ने दहेज़ मांगने के लिए माफ़ी मांगी. लेकिन मोहसिना अड़ चुकी थी. उसने फ़ोन पर आरिफ से कहा, 'तलाक़, तलाक़, तलाक़.' पंचायत ने आरिफ से भी ट्रिपल तलाक़ कहने को कहा. क्योंकि धार्मिक नियम के हिसाब से पति का तलाक़ ही फाइनल होता है. और तलाक़ हो गया. पंचायत ने उल्टे आरिफ के परिवार से मोहसिना को 2 लाख देने को कहा. क्योंकि मोहसिना के घर वालों ने इतने ही पैसे खर्च किए शादी में. पंचायत के सरपंच सुनील कुमार ने टेलीग्राफ अख़बार को बताया कि हिंदू हो या मुसलमान, दहेज लेना गुनाह है. हम गांव में ये सब नहीं होने देंगे. उधर मस्जिद के ईमाम ने भी कहा कि तलाक़ जायज़ है. और किसी भी समुदाय को ऐसे लालची परिवारों को स्वीकार नहीं करना चाहिए. कितनी अच्छी बात हो, अगर हमारे समाज में सभी समुदाय ऐसे ही रहने लगें. औरतों को फैसले लेने का अधिकार दें, समझदारी से काम करें, एक-दूसरे का सहयोग करें. और सही फैसले लें.
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