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एंबुलेंस नहीं आई, रिक्शे पर मां को लाद बेटा हॉस्पिटल पहुंचा, तस्वीर ऐसी कि दिखा नहीं सकते

घटना लखनऊ की है.

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सरकारी दावे के उलट जमीनी हकीकत कुछ और है. तस्वीर: आजतक | पीटीआई)
उत्तर प्रदेश से लगातार ऐसी खबरें आ रही हैं जो दिखाती हैं कि मेडिकल सुविधाओं के मामले में राज्य की हालत कितनी खराब है.राजधानी लखनऊ सहित कई जगह ऑक्सीजन, बेड, दवाइयों की कमी की रिपोर्ट लगातार आ रही है. मरीजों को एंबुलेंस तक नहीं मिल पा रही है. 29 अप्रैल को भी लखनऊ में ऐसा ही एक वाकया हुआ. एक मरीज को एंबुलेंस नहीं मिलने पर रिक्शे पर बोरी की तरह लादकर सिविल हॉस्पिटल ले जाया गया. क्योंकि महिला की हालत इतनी खराब थी कि वो रिक्शे पर नहीं बैठ पा रही थीं. इसलिए उन्हें बीच में लिटा दिया गया. दो लोगों ने उन्हें पकड़ा और फिर सिविल हॉस्पिटल पहुंचाया. इसके बाद इमरजेंसी वार्ड में इलाज शुरू हुआ. रिक्शे पर अस्पताल ले जाते समय किसी ने इसका वीडियो बना लिया. यह सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हो रहा है. लोग प्रशासन और योगी सरकार को एंबुलेंस नहीं मुहैया करवाने को लेकर खरी-खोटी सुना रहे हैं. आजतक की रिपोर्ट मुताबिक़ लखनऊ में सिविल हॉस्पिटल के नज़दीक रहने वाले रमेश की मां की एकाएक तबीयत ख़राब हो गई. उनका ब्लड प्रेशर बहुत बढ़ गया. इसके बाद वह बेहोश हो गईंं. आनन-फानन में रमेश ने अपनी मां के लिए एंबुलेंस को कॉल किया. लेकिन  आधे घंटे बाद तक एंबुलेंस नहीं आई. नाईट कर्फ्यू की वजह से रमेश को कोई गाड़ी नहीं मिल रही थी. रमेश की मां की तबीयत ज्यादा खराब होने लगी. ऐसे में उन्हें रिक्शे पर लादकर सिविल हॉस्पिटल तक ले जाया गया. वह रिक्शे पर बैठ नहीं सकती थीं, इसलिए उन्हें लिटा दिया गया था. इमरजेंसी वार्ड में पहुंचने के बाद मरीज को ब्लड प्रेशर का इंजेक्शन लगाया गया. इसके बाद जाकर उनकी तबीयत सामान्य हो सकी. सिविल हॉस्पिटल के इमरजेंसी वार्ड में मौजूद डॉक्टरों ने तुरंत महिला का इलाज किया और बताया कि अगर और देर हो जाती तो काफी दिक्कत हो सकती थी. स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर योगी सरकार भले तरह-तरह के दावे करे लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है. और ये घटना इसका एक उदाहरण मात्र है.

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